कैंची धाम में जाम और बढ़ते पर्यटन दबाव के बीच 26 होटल-होम स्टे की जांच, नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अक्टूबर (Kainchi Dham-Snapshots of Traffic Jams)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जिले में कैंची धाम (Kainchi Dham) क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन और श्रद्धालुओं के दबाव के साथ व्यवस्थागत चुनौतियां भी सामने आने लगी हैं। लगातार जाम, पर्यटन इकाइयों में नियमों के उल्लंघन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के बीच प्रशासन ने होटल-होम स्टे की जांच तेज कर दी है। वहीं, यातायात जाम के कारण गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सालय पहुंचाने में होने वाली संभावित परेशानी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ‘बर्थ वेटिंग होम’ (Birth Waiting Home) की सुविधा पर विशेष जोर देना शुरू किया है।
कैंची धाम क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को इन तीन घटनाओं से समझा जा सकता है—पर्यटन इकाइयों के संचालन में नियमों की अनदेखी, लगातार जाम के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का व्यवस्था संबंधी निर्णयों में अधिक भागीदारी की मांग। ऐसे में कैंची धाम में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ केवल यातायात प्रबंधन ही नहीं, बल्कि आवास, किराया नियंत्रण, स्थानीय आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
26 होटल-होम स्टे में से 22 पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड
गत दिनों कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और इस दौरान अत्यधिक किराया वसूले जाने की शिकायतों के बाद कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत (Deepak Rawat) एवं नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Ryal) ने क्षेत्र में संचालित होटल और होम स्टे इकाइयों के निरीक्षण के निर्देश दिए थे।
इन निर्देशों के क्रम में बुधवार को जिला पर्यटन विकास अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य (Kirti Chandra Arya) के नेतृत्व में टीम ने कैंची धाम क्षेत्र में होटल और होम स्टे इकाइयों का निरीक्षण किया। कुल 26 इकाइयों की जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान पंजीकृत कक्षों से अधिक कक्ष संचालित किए जाने सहित नियमावली का उल्लंघन पाए जाने पर 22 पंजीकृत इकाइयों पर प्रति इकाई 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। चार इकाइयों में रेट लिस्ट निर्धारित तरीके से प्रदर्शित नहीं मिली और अन्य कमियां पाए जाने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
दो गैरपंजीकृत होम स्टे भी संचालित पाए गए। इन पर अर्थदंड लगाने के साथ ही तत्काल प्रभाव से संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
अर्थदंड वाली इकाइयों में चिराग, त्रिशूल, कृष्णा, त्रिलोकी, माधवी, निर्मल, मां भगवती, रक्षिता, दीप्ति, कुंदन नेगी, शरद तिवारी, उर्बा दत्त तिवारी होम स्टे, मंजू पांडे और रेखा बिष्ट के होम स्टे, होटल ट्रिनीटि (Hotel Trinity), बाबा बेन्सन रिसोर्ट (Baba Benson Resort), होटल ग्रीन वैली (Hotel Green Valley), हर्षित तिवारी होम स्टे और मारूती होम स्टे और होटल मोहन स्टे शामिल हैं।
वहीं हर्षित तिवारी होम स्टे और मारूती होम स्टे को तत्काल बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हेमंत कुमार मेहता, कासा माउंटेन (Casa Mountain), गिरी राज किशोर गुप्ता और विवेक कुमार शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी आर्य ने बताया कि जिले में होटल और होम स्टे इकाइयों का नियमित भौतिक निरीक्षण किया जा रहा है। मानकों के अनुरूप संचालन नहीं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
कैंची धाम के जाम के बीच गर्भवती महिलाओं के लिए ‘बर्थ वेटिंग होम’ का सहारा
कैंची धाम क्षेत्र में लगातार लग रहे जाम का असर केवल पर्यटकों और स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों के दूरस्थ गांवों से प्रसव के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए भी यातायात की स्थिति चुनौती बन सकती है।
इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘बर्थ वेटिंग होम’ की सुविधा दी जा रही है। इसमें प्रसव की संभावित तिथि नजदीक आने पर दूरस्थ और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक सुरक्षित स्थान पर ठहराया जाता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय पर चिकित्सकीय सुविधा मिल सके।
अल्मोड़ा जिले के विशालकोट गांव निवासी भावना का गांव गरमपानी से लगभग 32 किलोमीटर दूर है। प्रसव की संभावित तिथि नजदीक आने पर उन्हें गरमपानी स्थित बर्थ वेटिंग होम में ठहराया गया। इसके बाद गरमपानी स्वास्थ्य केंद्र में उनका सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया।
इसी तरह गरमपानी से लगभग 16 किलोमीटर दूर ग्राम सिलटोना निवासी हीरा देवी तथा लगभग 14 किलोमीटर दूर कोरल हल्सो ग्राम निवासी हेमा देवी और कल्पना ने भी बर्थ वेटिंग होम की सुविधा का लाभ लिया। सभी को प्रसव के दौरान समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिली और गरमपानी चिकित्सालय में सुरक्षित प्रसव कराया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत (Dr. Rashmi Pant) ने कैंची धाम क्षेत्र में यातायात और जाम की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय से पहचान करने और आवश्यकता के अनुसार उन्हें बर्थ वेटिंग होम में ठहराने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) के माध्यम से गर्भवती महिलाओं तथा उनके परिजनों को इस सुविधा की जानकारी देने और समय रहते स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
डॉ. पंत के अनुसार प्रत्येक गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। बर्थ वेटिंग होम के माध्यम से दूरी और यातायात के कारण उपचार में होने वाली देरी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
जाम की बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाने पर नाराजगी
इधर, कैंची धाम क्षेत्र में लगातार गंभीर हो रही जाम की समस्या को लेकर प्रशासन की ओर से मंगलवार को नैनीताल में बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्थानीय ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को आमंत्रित नहीं किए जाने पर बुधवार को ग्राम प्रधान संगठन और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने नाराजगी जताई।
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष जेडी कत्यूरा ने कहा कि कैंची धाम की जाम की वास्तविक स्थिति और इससे स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों, टैक्सी चालकों तथा मरीजों को होने वाली परेशानियों की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बेहतर तरीके से है। इसके बावजूद कैंची धाम क्षेत्र के ग्राम प्रधानों को बैठक से बाहर रखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संगठन ने मांग की कि यातायात व्यवस्था से संबंधित आगामी बैठकों और निर्णयों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। प्रतिनिधियों ने कहा कि अनदेखी जारी रहने और एकतरफा निर्णय लिए जाने पर वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
बाईपास पर पार्किंग और कूड़े की समस्या भी उठी
बैठक में सेनेटोरियम-रातीघाट बाईपास मार्ग की स्थिति और यातायात व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। चौरसा के ग्राम प्रधान किशोर ढैला ने कहा कि बाईपास मार्ग के दोनों ओर बेतरतीब पार्किंग और शटल सेवा के संचालन से जाम की स्थिति बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि सड़क किनारे कूड़ा-कचरा पड़े रहने से सिरोड़ी, भवालीगांव, चौरसा और पाडली सहित आसपास के गांवों तथा मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को परेशानी हो रही है।
बैठक में छड़ा खैरना की ग्राम प्रधान उषा पिनारी, सिलटोना की ग्राम प्रधान किरन आर्या, तल्लाकोट के ग्राम प्रधान, मझेड़ा के ग्राम प्रधान भास्कर चंद्र, सीम के ग्राम प्रधान खीम सिंह, दिग्थीरी के ग्राम प्रधान दीपक रावत और बारगल की ग्राम प्रधान गीता पाठक सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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