नवीन समाचार, देहरादून, 4 जून 2026 (Dhami Govt A;ssigned Responsibilities)। उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से पहले धामी सरकार ने राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला तेज कर दिया है। सरकार ने विभिन्न आयोगों, परिषदों, निगमों और बोर्डों में नई नियुक्तियां करते हुए कई नेताओं को दायित्व सौंपे हैं। खास बात यह है कि इन नियुक्तियों में भारतीय जनता पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे अन्य दलों से भाजपा में शामिल हुए चुनाव हारे नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
राजनीतिक हलकों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। जबकि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता व नेता इन नियुक्तियों से स्वयं को ठगा सा महसूस भी कर रहे हैं। दायित्व वितरण में कुमाऊँ क्षेत्र के नेताओं की उपेक्षा भीई नजर आ रही है।
पूर्व कांग्रेस मंत्री दिनेश अग्रवाल को सेतु आयोग में सलाहकार की जिम्मेदारी
सबसे चर्चित नियुक्तियों में पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल का नाम शामिल है। लंबे समय तक कांग्रेस सरकारों में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले दिनेश अग्रवाल ने 2017 व 2022 के विधान सभा चुनाव लगातार हारने के बाद 2024 में भाजपा का दामन थामा था।
अब धामी सरकार ने उन्हें सेतु आयोग में सलाहकार नियुक्त कर स्पष्ट संकेत दिया है कि भाजपा में शामिल होने वाले वरिष्ठ नेताओं को भी संगठन और सरकार में सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह नियुक्ति विपक्षी दलों से भाजपा में आने वाले नेताओं के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का सफर तय कर भाजपा पहुंचे जोत सिंह बिष्ट को भी मिला दायित्व
धनोल्टी क्षेत्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट को ग्रामीण अभियंत्रण सेवा परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनकी राजनीतिक यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है।
उन्होंने वर्ष 1996 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी वे कांग्रेस राजनीति में सक्रिय रहे और वर्ष 2022 में कांग्रेस ने उन्हें पुनः विधानसभा चुनाव का टिकट दिया। हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सके। इससे पहले वर्ष 2012 में उन्होंने धनोल्टी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर लगभग 10,500 मत प्राप्त किए थे, जिसने उनकी क्षेत्रीय राजनीतिक पकड़ को रेखांकित किया था।
बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा और फिर भाजपा में शामिल हो गए। अब उन्हें ग्रामीण अभियंत्रण सेवा परिषद का उपाध्यक्ष बनाए जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नियुक्ति माना जा रहा है।
पूर्व सैनिकों और गोरखा समाज को भी साधने की कोशिश
सरकार ने पूर्व सैनिकों और गोरखा समाज को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं।
उत्तराखंड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद में कैप्टन गंभीर सिंह धामी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा शमशेर सिंह बिष्ट को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। दोनों लंबे समय से पूर्व सैनिकों के मुद्दों से जुड़े रहे हैं। वहीं गोरखा कल्याण परिषद में ज्योति कोटिया को अध्यक्ष तथा अभिषेक शाही को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसे गोरखा समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
निगमों और समितियों में भी नियुक्तियां
सरकार ने अन्य संस्थाओं में भी कई नियुक्तियां की हैं। भाजपा नेता माधव सेमवाल को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) का सलाहकार बनाया गया है।
गढ़वाल मंडल विकास निगम में विशाल गुप्ता, पारस गोयल और रितु मित्र को गैर सरकारी निदेशक नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त मनोज कलाकोटी को उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देते हुए अनुराधा वालिया को माटी कला बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
चुनावी रणनीति के रूप में देखी जा रहीं नियुक्तियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार की ये नियुक्तियां केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन, विभिन्न सामाजिक समूहों, पूर्व सैनिकों, गोरखा समाज, अनुसूचित जाति वर्ग और क्षेत्रीय नेतृत्व को साधने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।
लंबे समय से दायित्वों की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी इन नियुक्तियों को सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही विपक्षी दलों से भाजपा में आए नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने उनके राजनीतिक अनुभव और प्रभाव को स्वीकार करने का संकेत दिया है।
आगे भी जारी रह सकता है दायित्व वितरण
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दायित्व वितरण की यह सूची अभी अंतिम नहीं है। आने वाले दिनों में अन्य बोर्डों, निगमों, आयोगों और परिषदों में भी नई नियुक्तियां हो सकती हैं। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम अभी भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। ऐसे में चुनावी वर्ष में उत्तराखंड की राजनीति में दायित्वों का यह दौर आने वाले समय में और गति पकड़ सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
