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उपनल संविदा कर्मियों के नियमितीकरण व वेतन से जीएसटी कटौती पर उच्च न्यायालय का सरकार को कड़ा नोटिस

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2026 (HC on Regularization of UPNL Workers)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने प्रदेश के शासकीय विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल (UPNL) संविदा कर्मचारियों (Contractual Employees) के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय ने आदेश के उपरांत भी संविदा कर्मियों को नियमित (Regularization) न करने, उन्हें चयनित वेतनमान (Selected Pay Scale) का लाभ न देने तथा उनके मानदेय से वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) की कटौती किए जाने के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका (Contempt Petition) पर सुनवाई की।

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HC on Regularization of UPNL Workers 🚨 उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई  देहरादून | विशेष रिपोर्ट उत्तराखंड में लंबे समय से विभिन्न विभागों में ...मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार से इस पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करते हुए स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Justice Rakesh Thapliyal) की एकलपीठ (Single Bench) के समक्ष इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हुई। उपनल कर्मचारी संघ (UPNL Employee Union) ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर शासन पर अदालती आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया कि नवंबर 2025 में उच्च न्यायालय की खंडपीठ (Division Bench) की ओर से पारित किए गए आदेश का अनुपालन अभी तक राज्य सरकार की ओर से नहीं किया गया है।

समान कार्य समान वेतन और जीएसटी विलोपन के थे आदेश

उपनल कर्मचारी संघ ने न्यायालय को अवगत कराया कि पूर्व में उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए थे कि उपनल कर्मचारियों को सर्वप्रथम समान कार्य के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work) का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही उनके वेतन या मानदेय पर लगने वाले जीएसटी को न वसूला जाए और उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया को नियमानुसार अपनाया जाए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस स्पष्ट आदेश के बाद भी राज्य सरकार की तरफ से अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जिससे हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

शासन ने प्रस्तुत किए संविदा और कट ऑफ तिथि से जुड़े शासनादेश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय के समक्ष एक जुलाई 2026 का एक शासनादेश (Government Order) प्रस्तुत किया गया। इस शासनादेश में सरकार ने कहा कि राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए पात्रता की कट ऑफ तिथि (Cut-off Date) वर्ष 2018 से बढ़ाकर 15 अक्तूबर 2024 कर दी है। सरकार का तर्क है कि जो भी संविदा कर्मचारी इस नई समयसीमा के अंतर्गत आएंगे, वे समान कार्य के लिए समान वेतन पाने के अधिकारी होंगे और इसका आर्थिक लाभ उन्हें एक मार्च 2026 से प्रदान किया जाएगा।

इसके साथ ही सरकार की तरफ से तीन फरवरी 2026 का एक अन्य आदेश भी न्यायालय के समक्ष रखा गया। इस आदेश में यह शर्त जोड़ी गई है कि ये संविदा कर्मचारी नियमित कर्मचारियों की सेवा शर्तों की भांति अन्य भत्तों या लाभों की मांग नहीं करेंगे और भविष्य में होने वाली नियुक्ति भी पूर्णतः संविदा के आधार पर ही मान्य होगी।

न्यायालय ने नीतिगत विरोधाभास पर मांगा जवाब

शासकीय शासनादेशों में संविदा की शर्तों और पूर्व आदेशों के अनुपालन की स्थिति को देखते हुए एकलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की। न्यायालय ने सरकार की इन शर्तों और जीएसटी कटौती के औचित्य पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से पूछा है कि आदेश के बावजूद अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति क्यों नहीं हुई। न्यायालय ने इस पूरे मामले में सरकार को अपना पक्ष और स्पष्टीकरण दाखिल करने का समय दिया है। इस न्यायिक हस्तक्षेप से उत्तराखंड के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों उपनल कर्मचारियों में नियमितीकरण और न्याय की उम्मीद एक बार फिर जाग गई है।

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