नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जुलाई 2026 (Husband Convicted for Wifes Murder)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के नैनीताल (Nainital) नगर स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश (Second Additional Sessions Judge) कुलदीप शर्मा (Kuldeep Sharma) के न्यायालय ने नैनीताल नगर में हुई एक महिला की हत्या के एक चर्चित मामले में महिला के पति दीप शर्मा (Deep Sharma) को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 302 के अंतर्गत दोषी करार दिया है।
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए मामले को दहेज मृत्यु के बजाय हत्या का मामला माना। दोषसिद्धि के बाद आरोपित को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। अब मामले में सजा के निर्धारण पर 9 जुलाई 2026 को सुनवाई होगी। यह निर्णय महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा और वैवाहिक अपराधों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भीमताल (Bhimtal) क्षेत्र के सोन गांव (Son Village) निवासी नीरज पलड़िया (Neeraj Paladiya) ने 2 फरवरी 2021 को मल्लीताल (Mallital) कोतवाली में शिकायत दर्ज करायी थी कि उनकी बहन अंशु (Anshu) का विवाह 28 फरवरी 2017 को मल्लीताल के अयारपाटा (Ayarpata) निवासी दीप शर्मा के साथ हुआ था। आरोप था कि विवाह के बाद से दीप शर्मा तथा उसके परिजन दहेज की मांग को लेकर अंशु को प्रताड़ित करते थे और उसके साथ मारपीट करते थे। इसी कड़ी में 2 फरवरी 2021 को अंशु शर्मा की हत्या कर दी गयी। जबकि उसे फंदे पर लटका बताया गया था।
शव परीक्षण रिपोर्ट बनी महत्वपूर्ण साक्ष्य
विचारण के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) (District Government Counsel-Criminal) सुशील कुमार शर्मा (Sushil Kumar Sharma) तथा सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (Assistant District Government Counsel) राम सिंह रौतेला (Ram Singh Rautela) ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए न्यायालय में 15 गवाहों के बयान कराए।
अभियोजन ने शव परीक्षण (Post Mortem) रिपोर्ट तथा चिकित्सकों की गवाही के आधार पर न्यायालय को बताया कि 3 फरवरी 2021 को हुए शव परीक्षण में मृतका के शरीर पर मृत्यु से पूर्व लगी छह चोटें पायी गयी थीं। चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मृत्यु गला दबाने से दम घुटने के कारण हुई थी तथा यह मृत्यु फंदे से लटकने के कारण नहीं हुई थी।
घटना के बाद के व्यवहार को भी माना गया महत्वपूर्ण
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि घटना के समय आरोपित घर पर मौजूद था, लेकिन उसने न तो पत्नी को स्वयं चिकित्सालय पहुंचाया, न पुलिस को सूचना दी और न ही पंचनामा अथवा अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सहयोग किया। अभियोजन के अनुसार घटना के बाद वह कुछ समय तक फरार भी रहा। अभियोजन का कहना था कि दहेज की मांग पूरी न होने पर आरोपित ने पत्नी के साथ मारपीट की और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या का मामला मानते हुए दोषसिद्धि
न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट, गवाहों के बयानों तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मामले को दहेज मृत्यु नहीं बल्कि हत्या का मामला माना। इसके आधार पर दीप शर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अंतर्गत दोषी ठहराया गया।
दोषसिद्धि के बाद न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया तथा सजा सुनाने के लिए 9 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की।
पूर्व में भी आया था चर्चित फैसला
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व नैनीताल नगर में ही अधिवक्ता मनीष अरोड़ा (Manish Arora) से जुड़े एक चर्चित मामले में भी इसी प्रकार दहेज मृत्यु और हत्या के आरोपों पर विचारण हुआ था। उस मामले में भी अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी से यह साबित हुआ था कि अभियुक्त मनीष अरोड़ा की पत्नी की संदिग्ध मृत्यु नहीं हुई थी, बल्कि उसकी घर में हत्या कर नाटकीय रूप से उसे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया था।
चिकित्सालय ने पुलिस को सूचना दी थी लेकिन अभियुक्त पत्नी के शव को जबरन अपने घर रुड़की ले जाकर दाह संस्कार की कार्रवाई कर रहा था, लेकिन इससे पूर्व अभियोग दर्ज होने के कारण रुड़की में पत्नी के शव का पोस्टमार्टम हो पाया था। इस मामले में अभियुक्त आजीवन कारावास की सजा मिली थी। अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष यह स्थापित किया था कि मृतका की मृत्यु स्वाभाविक अथवा संदिग्ध परिस्थितियों में नहीं हुई थी, बल्कि उसकी हत्या की गयी थी। बाद में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। वर्तमान मामले में भी अभियोजन पक्ष ने चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या का आरोप सिद्ध कराया।
9 जुलाई को होगी सजा पर सुनवाई
अब न्यायालय 9 जुलाई को सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम आदेश पारित करेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार हत्या के मामलों में दोषसिद्धि के बाद सजा निर्धारण की प्रक्रिया न्यायालय के विवेक तथा मामले की परिस्थितियों पर आधारित होती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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