जसुली दीदी-उत्तराखंड की सबसे बड़ी दानवीर महिला : जो हेनरी रैमजे को नदी में रुपए बहाती मिली थीं

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल। स्व. जसुली दताल जिनकी पहचान जसुली शौक्याणी, जसुली दीदी व जसुली बुड़ी के नाम से और कुमाऊं-उत्तराखंड की सबसे बड़ी महान दानवीर महिला के नाम से विख्यात हैं, आज उनकी कहानी जानिए। उनका जन्म दांतू गाँव, तहसील धारचूला, परगना दारमा, जिला पिथौरागढ में हुआ था। धनी माता-पिता की इकलौती संतान … Read more

मुख्यमंत्री ने किया प्रदेश के 26 वन गांवों को बिजली, पानी, सड़क के साथ ही ग्राम प्रधानों को मुहर भी देने का दावा

-जिम कार्बेट पार्क में अब 50-50 महिला नेचर गाइड व जिप्सी चालकें भी होंगी -10 हजार स्थानीय युवा कौशल विकास कर प्राप्त करेंगे स्वरोजगार नवीन समाचार, रामनगर, 21 मार्च 2021। प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथसिंह रावत ने रविवार को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर नैनीताल जनपद के रामनगर में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस … Read more

चिंताजनक: हिमालय की छटा इस वर्ष मनमोहक नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 दिसम्बर 2020। नगर के हिमालय दर्शन प्वाइंट सहित किलबरी रोड एवं नैना पीक चोटी, स्नो व्यू व टिफिन टॉप आदि से गढ़वाल मंडल की पोरबंदी, केदारनाथ, कर्छकुंड से लेकर चौखंभा, नीलकंठ, कामेत, गौरी पर्वत, हाथी पर्वत, नंदाघुंटी, त्रिशूल, मैकतोली (त्रिशूल ईस्ट), प्रख्यात पिंडारी व सुंदरढूंगा ग्लेशियर, नंदा देवी, नंदाकोट, राजरम्भा, लास्पाधूरा, … Read more

हनुमानगढ़ी में पर्यटन के लिए मौजूद है एक अनछुवा आयाम

-हिरन प्रजाति के वन्य जीवों से गुलजार है यह क्षेत्र, बन सकते हैं पर्यटन का नया जरिया
नवीन समाचार, नैनीताल, 06 सितंबर 2020। जैव विविधता से परिपूर्ण सरोवरनगरी का हनुमानगढ़ी क्षेत्र इन दिनों हिरन प्रजाति के वन्य जीवों से गुलजार है। इस मौसम में यहां हिरन प्रजाति के घुरड़ों के कई सारे झुंड कई बार नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी आसानी से नजर आ जाते हैं। खुले में वन्य जीवों को इस तरह सड़क के पास खुले में घूमते देखना आम लोगों के लिए भी अनूठा व रोमांचक अनुभव होता है। सामान्यतया मानवों से दूर भागने वाले ये वन्य जीव हालिया समय से यहां लगातार वाहनों एवं लोगों के गुजरने से भी अधिक डरते नहीं हैं और अपनी जगह पर बने रहकर लोगों को फोटो खींचने का मौका भी देते हैं।
उल्लेखनीय है कि हनुमानगढ़ी क्षेत्र सूर्यास्त तथा सर्दियों में खूबसूरत ‘विंटर लाइन’ के प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। साथ ही यहां बाबा नीब करौरी द्वारा स्थापित, कई नई-पुरानी फिल्मों में दिख चुका हनुमानगढ़ी मंदिर, स्वामी लीला शाह का आश्रम जहां कभी विवादित धर्म गुरु आशाराम भी रहा था, तथा चेचक व छोटी-बड़ी माता आदि त्वचा संबंधी रोगों के निदान के लिए जाना जाने वाला माता शीतला देवी का मंदिर भी स्थित है, और इन्हें देखने के लिए प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में सैलानी व श्रद्धालु आते हैं। गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी व मोदी जी की धर्मपत्नी जशोदा बेन भी आए थे। गौरतलब है कि वन विभाग ने इस क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पहाड़ी घर व छतरियों युक्त पार्क बनाए हैं, तथा हनुमानगढ़ी मोड़ पर भी इन दिनों पार्क बनाए जा रहे हैं। ऐसे में यहां घुरड़ों की मौजूदगी इस क्षेत्र के पर्यटन महत्व को एक नया आयाम दे सकती है।

यह भी पढ़ें : झील के साथ ही खूबसूरत झरने भी बन सकते हैं नैनीताल की पहचान

नवीन जोशी, नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान केवल नगर के भीतर के नैनी सरोवर व अन्य आकर्षणों की वजह से नहीं, इसके बाहरी क्षेत्रों की खूबसूरती के समग्र से भी है। और यह खूबसूरती भी सैलानियों को सर्वाधिक आकर्षित करने वाले ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के दौरान की ही नहीं, वरन वर्ष भर और कमोबेस हर मौसम में अलग-अलग रूपों में कुदरत द्वारा उदारता से बरती जाने वाली नेमतों की वजह से भी है। मौजूदा वर्षा काल की ही बात करें तो इस मौसम में जहां पहाड़ की कमजोर प्रकृति की वजह से होने वाले खतरों की वजह से कम संख्या में सैलानी यहां आने का रुख कर पाते हैं, परंतु यही समय है जब यहां प्रकृति सुंदरी को उसकी वास्तविक सुंदरता को मानो नहा-धो कर साफ-स्वच्छ हुई स्थिति में देखा जा सकता है।

Read more

कोरोना पर सबसे बड़ी खबर: नैनीताल के सबसे बड़े मनुमहारानी होटल में ‘ले ऑफ’, 80 कर्मचारियों को मिलेगा सिर्फ आधा वेतन

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2020। कोराना की महामारी का कानूनी तौर पर सबसे पहला शिकार पर्यटननगरी सरोवरनगरी का सबसे बड़ा होटल मनुमहारानी हुआ है। पिछले तीन माह से भी अधिक समय से बंद होने के बावजूद अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहे होटल प्रबंधन ने होटल में कानूनी तौर पर ‘ले-ऑफ’ (छंटनी) घोषित … Read more

देखें धरती पर स्वर्ग, जैसा पहले कभी न देखा हो, रहस्यमय दारमा-पंचाचूली वैली…

-पर्यटको की पसंदीदा सैरगाह व पयर्टन स्थल के साथ ही ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी व साधकों की साधना स्थली भी है दारमा वैलीडॉ. एम0 एस0 दुग्ताल @ नवीन समाचार, 26 जुलाई 2019। पौराणिक अभिलेखों के अनुसार भारत के उत्तर में 75 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल तक फैला, तिब्बत के पश्चिम सीमा से लगा ‘उत्तर कुरू‘ … Read more

‘लंदन फॉग’ से दिलकश-रुमानी हुआ नैनीताल का मौसम

-पर्यटन एवं पैदल घूमने के लिए बेहतर होता है यह मौसम
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जुलाई 2019। प्रदेश में मानसून के आगमन एवं मौसम विभाग द्वारा जनपद में मानसूनी वर्षा की चेतावनी पर बृहस्पतिवार को मुख्यालय एवं आसपास के क्षेत्रों में बारिश तो नहीं हुई, अलबत्ता ‘लंदन फॉग’ कहे जाने वाले मानसूनी कोहरे से नगर का मौसम दिलकश व रुमानी हो गया। इस दौरान नगर में दोपहर से पहले वालों को हेड लाइट जलाकर गुजरना पड़ा। जुलाई माह में इस तरह का अनुभव खासकर मैदानी क्षेत्रों से आये सैलानियों के लिए रोमांचक रहा, जो ऐसी स्थितियों की अपेक्षा केवल सर्दियों के दिनों में करते हैं।

नैनीताल में लंदन फॉग का सुंदर वीडियो देखें :

उल्लेखनीय है कि नगर के जुलाई-अगस्त माह में मानसूनी मौसम में इस कोहरे को अंग्रेजी दौर से लंदन में लगने वाले कोहरे ‘लंदन फॉग’ की संज्ञा प्राप्त है। इस दौरान कोहरे से हल्की बूंदों का झरना पैदल घूमने वाले सैलानियों को अद्भुत अनुभूति देता है। इस मौसम को नगर में रंग-बिरंगी छतरियां लेकर पैदल घूमने वाले लोग भी खासा पसंद करते हैं। उल्लेखनीय है कि पर्यटन के लिहाज से भी यह मौसम सैलानियों के खासा लाभप्रद होता है, जब शहर में अधिक भीड़भाड़ नहीं होती है। होटलों में कमरे एवं अन्य सुख-सुविधाएं अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर उपलब्ध हो जाती हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में ‘लंदन फॉग’ संग मानो आसमां झुक जाता हो जमीं पर

नवीन जोशी नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल को यूं ही प्रकृति का स्वर्ग नहीं कहा जाता है। हर मौसम में यह शहर विश्वस्तर के एक नये आकर्षण को लेकर आता है, और छा जाता है। ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में तो यहां देश-दुनिया से सैलानी प्राकृतिक एयरकंडीशनर (नेचुरल एसी) सरीखे मौसम का आनंद ले ही पाते हैं, लेकिन इसके बाद भी, जब देश मानसून का इंतजार कर रहा होता है, यहां लोकल मानसून झूम के बरसने लगता है। इस दौरान यहां एक नया आकर्षण नजर आता है, जिसे नगर के अंग्रेज निर्माताओं ने अपने घर इंग्लैंड को याद कर ‘लंदन फॉग’ और ‘ब्राउन फॉग ऑफ इंग्लैंड’ नाम दिये थे।

Read more

नैनीताल में ‘नेचुरल एसी’ बना कौतूहल का केंद्र, उमड़ रहे सैलानी

-बारापत्थर चौराहे पर सैलानी आकर लेने लगे हैं इसका अनुभव नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। सरोवरनगरी में एक पहाड़ी चट्टान पर करीब पांच वर्ष पूर्व प्रकाश में आया ‘नेचुरल एसी’ सैलानियों के साथ ही नगरवासियों के बीच भी आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। अब बड़ी संख्या में सैलानी और स्थानीय लोग … Read more

‘भारत के स्विटजरलेंड’ में गांधी जी ने लिखी थी ‘अनासक्ति योग’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, कौसानी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक अलग दृष्टि के महामानव थे। यही कारण है कि उन्होंने अपनी आग उगलती बंदूकों और जुल्मो-सितम के लिए पहचाने जाने वाले अंग्रेजों को, जिनके राज में तब कभी सूर्य अस्त न होता था, एक अलग तरह के अहिंसा के अस्त्र का प्रयोग कर असंभव … Read more

महेश खान: यानी प्रकृति और जैव विविधता की खान

पहली नजर में दो हिंदू-मुस्लिम नामों का सम्मिश्रण लगने वाले महेश खान के नाम में ‘खान’ कोई जाति या धर्म सूचक शब्द नहीं है, लेकिन ‘खान’ शब्द को दूसरे अर्थों में प्रयोग करें तो यह स्थान प्रकृति के लिए भी प्रयोग किए जाने वाले महेश यानी शिव की धरती कहे जाने वाले कुमाऊं में वानस्पतिक … Read more

पक्षी-तितली प्रेमियों का सर्वश्रेष्ठ गंतव्य है पवलगढ़ रिजर्व

उत्तराखंड का नैनीताल जनपद में रामनगर वन प्रभाग स्थित पवलगढ़ रिजर्व पक्षी प्रेमियों के लिए बेहतरीन गंतव्य है। दिल्ली से सड़क और रेल मार्ग से करीब 260 किमी तथा नजदीकी हवाई अड्डे पंतनगर से करीब 87 किमी दूर रामनगर के जिम कार्बेट नेशनल पार्क से कोसी नदी के दूसरी-पूर्वी छोर से सटा 5824 हैक्टेयर में फैला प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधिता से लबरेज पवलगढ रिजर्व, पक्षियों को देखने यानी बर्ड वाचिंग के शौकीनों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है। यहां अब तक करीब 365 प्रजातियों के पक्षी देखे और पहचाने जा चुके हैं। साथ ही यहां मिलती करीब 83 तरह की तितलियां और 100 प्रकार के मॉथ यानी तितलियों की ही दूसरी प्रजातियां भी मिलती हैं।

Read more

नैनीताल में पर्यटन

नैनीताल-कुमाऊं में पर्यटन सुविधाएं Hotels in Nainital-Kumaon :  CLick the Links and Directly reach to the concerned Establishments: Kumaon Mandal Vikas Nigam Limited for Best Accommodation in all over Kumaon Region. HiMADRi Tour Trek & Adventure Gears The Manu Maharani  Shervani Hilltop-Nainital Balrampur House-A Heritage Resort Alka-The Lake Side Hotel Chevron-Fair Havens, Nainital, Ranikhet, Kausani, Mukteshwar, … Read more

नैनीताल की स्मरणीय सौगातें

यदि आपको कोई फोटो अच्छी लगती हैं, और उन्हें बिना “वाटर मार्क” के और बड़े उपलब्ध आकार में चाहते हैं तो यहाँ क्लिक कर “संपर्क” कर सकते हैं। नैनीताल में कई स्थानों पर बने सुन्दर भित्ति चित्र (graffiti‬) (कृपया चित्रों को बड़ा देखने के लिए  क्लिक करके देखें) डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड … Read more

देवभूमि के कण-कण में ‘देवत्व’: विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा के हाथों हुआ विमोचन

नैनीताल। अमेरिका में हिंदी के जरिये रोजगार के अवसर विषयक कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन के संयोजक, अमेरिकी सरकार समर्थित स्टारटॉक हिंदी कार्यक्रम के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डा. अशोक ओझा, उत्तराखंड मुक्त विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक डा. गोविंद सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. … Read more

भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।

माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।

Read more