-साथ ही 10 लाख का वार्षिक आर्थिक बोझ बनेगा 12 लाख का आय उत्पादक
-नगर के पर्यटन स्थलों की जानकारी भी डिजिटल स्वरूप में मिल सकेगी
नवीन जोशी, नैनीताल। नवगठित जिला विकास प्राधिकरण ने नगर की बमुश्किल जलती-बुझती हाईमास्ट लाइटों को लगातार जगमगाने का ऐसा अनूठा रास्ता ढूंढ लिया है कि न केवल प्राधिकरण प्रतिवर्ष करीब 10 लाख रुपए के अपने आर्थिक भार से मुक्ति पा लेगा, बल्कि उसे उल्टे 12 लाख रुपए की आय प्राप्त हो पाएगी। वहीं नगरवासियों एवं यहां आने वाले सैलानियों को बेहतर 4जी इंटरनेट सेवाओं के साथ ही नगर के पर्यटन स्थलों की जानकारी भी डिजिटल स्वरूप में मिल सकेगी।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन झील विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2007-08 में नगर में करीब 20 मीटर ऊंचे पोलों पर 12 हाईमास्ट लाइटें लगाई थीं। इन हैलोजन बल्ब युक्त लाइटों के लिए प्राधिकरण का हर वर्ष करीब 6 लाख रुपए बिजली का बिल और करीब 4 लाख रुपए मरम्मत आदि पर वार्षिक खर्च आ जाता है। बावजूद कई स्ट्रीट लाइटें बंद रह जाती हैं। कई बार लंबे समय के लिए भी ये लाइटें बंद रहीं। वर्तमान में भी 12 में से कम से कम तीन लाइटें बंद बतायी गयी हैं।

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इस समस्या के समाधान के तौर पर इधर प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार की पहल पर एक कंपनी के साथ करार होने जा रहा है, जो इन पोलों की ही 1 वर्ग मीटर की छोटी सी जगह पर अपने करीब 20 मीटर ऊंचे यानी पहले के पोलों की ऊंचाई के टावर लगाएगी। टावरों पर एयरटेल, आईडिया व वोडाफोन आदि कंपनियों के 4जी इंटरनेट सेवा प्रदाता माइक्रोवेव एंटीना लगाए जाएंगे, जिनके जरिये नगर में बेहतर 4जी इंटरनेट सेवा नगर वासियों व सैलानियों को मिल सकेगी। साथ ही इन टावरों पर हैलोजन बल्बों के मुकाबले बेहद कम बिजली की खपत के बावजूद बेहतर रोशनी देने वाले एलईडी बल्ब लगाए जाएंगे। साथ ही इन टावरों पर नगर के पर्यटन स्थलों के डिजिटल स्वरूप में जानकारी देने वाले ‘मूवेबल बोर्ड’ भी लगाए जाएंगे, जो अपने आप में एक अलग आकर्षण होगा। प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार ने बताया संबंधित कंपनी से प्राधिकरण को प्रति पोल एक लाख रुपए वार्षिक की धनराशि भी प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह करार हो जाने और योजना के धरातल पर आ जाने से न केवल प्राधिकरण अपने एक आर्थिक बोझ को आय के स्रोत में बदल पाएगा, बल्कि नगर वासियों और सैलानियों को बेहतर सुविधाएं व आकर्षण भी उपलब्ध हो जाएगा।

भीमताल एक्वेरियम को निजी हाथों में देने की तैयारी
नैनीताल। निर्माण प्रतिबंधों के कारण अपने आर्थिक स्रोत खो चुका प्राधिकरण अपने कुछ बोझों से मुक्ति का मार्ग भी ढूंढ रहा है। इसी कड़ी में भीमताल के टापू में संचालित किये जा रहे समुद्री मछलियों के एक्वेरियम को जिला विकास प्राधिकरण निजी हाथों में देने की तैयारी में है। यह एक्वेरियम भी प्राधिकरण के लिए बड़ा आर्थिक बोझ एवं सैलानियों के लिए ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। एक सैलानी को इस तक पहुंचने के लिए 230 रुपए नाव के और 60 रुपए देखने हेतु शुल्क प्राधिकरण को देना पड़ता है, जबकि एक्वेरियम में जनरेटर की व्यवस्था न होने से लगातार मछलियों के ठंड में मरने की समस्या रहती है। इस कारण सैलानियों को अपने खर्च का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता है। इसी तरह प्राधिकरण के लिए तीसरा बड़ा आर्थिक बोझ नैनी झील में एयरेशन का करीब 60 लाख का है। चूंकि नैनी झील का प्रबंधन सिचाई विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है, इसलिए यह कार्य भी सिचाई विभाग को हस्तांतरित किये जाने की तैयारी है। बताया गया है कि इस बारे में प्राधिकरण के अध्यक्ष कुमाऊं आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट सिचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर चुके हैं।

About Admin

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है।

यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।

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2 Comments

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