नवीन समाचार, बागेश्वर, 26 फरवरी 2026 (Mother Accused of Murdering Baby Girl)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के बागेश्वर (Bageshwar) जनपद के बैजनाथ (Baijnath) क्षेत्र के जैसर (Jaisar) गांव में 21 दिन की नवजात बच्ची की संदिग्ध मृत्यु का मामला हत्या के अभियोग में बदल गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर चोट के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने बच्ची की मां के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया है। प्रकरण पारिवारिक विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार 10 फरवरी की रात जैसर गांव निवासी केशर सिंह कोरंगा (Keshar Singh Koranga) के परिजन नवजात बच्ची को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ (Community Health Centre Baijnath) पहुंचे थे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों को मृत्यु संदिग्ध लगी और बच्ची के गले पर निशान दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मृत्यु प्राकृतिक नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार गर्दन पर गंभीर चोट के कारण मौत होना संभावित है। इसके बाद पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
शिकायत और दर्ज अभियोग
मृतका के दादा केशर सिंह कोरंगा ने अपनी बहू के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि परिवार के अन्य सदस्य एक विवाह समारोह में गए हुए थे और उसी दौरान घर पर मौजूद मां ने नवजात की हत्या कर दी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita–BNS) की धारा 103(1) के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर लिया है।
थानाध्यक्ष बैजनाथ कैलाश सिंह बिष्ट (Kailash Singh Bisht) ने बताया कि प्रकरण की प्रत्येक पहलू से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई होगी।
पारिवारिक विवाद का भी एंगल
प्राथमिक जानकारी के अनुसार महिला का विवाह प्रेम विवाह बताया जा रहा है और उसका पति विदेश में निजी कार्य में कार्यरत है। परिवार में लंबे समय से विवाद की स्थिति बताई गई है तथा पूर्व में पुलिस हेल्पलाइन के माध्यम से परामर्श भी कराया गया था। मामले में महिला के द्वारा अपनी 21 दिन की बेटी की गर्दन मरोड़कर हत्या किये जाने और दूसरी ओर महिला पक्ष द्वारा सास-ससुर पर उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने और प्रति-अभियोग की तैयारी की बात भी सामने आई है।
क्यों महत्वपूर्ण है मामला
नवजात की मृत्यु जैसे संवेदनशील मामलों में चिकित्सीय साक्ष्य, पारिवारिक परिस्थितियां और जांच प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में जल्दबाजी के बजाय वैज्ञानिक जांच, फोरेंसिक (Forensic) प्रमाण और बयान निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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