नवीन समाचार, हल्द्वानी, 1 मार्च 2026 (Haldwani-2 Died Collided-Elephant)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद के हल्द्वानी (Haldwani) क्षेत्र में टांडा जंगल (Tanda Forest) स्थित हाथी कॉरिडोर (Elephant Corridor) में शनिवार शाम दर्दनाक दुर्घटना में दो रिश्तेदरों की मृत्यु हो गई। हल्द्वानी से रुद्रपुर (Rudrapur) जा रहे दोनों भाई अचानक सामने आए हाथी से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष और राजमार्ग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
दुर्घटना कैसे हुई और क्या सामने आया
पुलिस के अनुसार मूल रूप से कटरा, शाहजहांपुर (Katra Shahjahanpur) निवासी तथा वर्तमान में बनभूलपुरा (Banbhoolpura) की गफूर बस्ती (Gafoor Basti) में रहने वाले 26 वर्षीय शकील (Shakeel) और रुद्रपुर में रहने वाले उसके जीजा 28 वर्षीय जाफर (Jafar) शनिवार रात्रि लगभग 11 बजे हल्द्वानी से रुद्रपुर की ओर दोपहिया वाहन से जा रहे थे। बेलबाबा (Belbaba) से आगे टांडा रोड (Tanda Road) स्थित हाथी कॉरिडोर में अचानक उनके वाहन के सामने हाथियों का झुंड आ गया।
हाथी को देखकर दोपहिया अनियंत्रित हो गई और दोनों सड़क पर गिर पड़े। शकील के सिर में गंभीर चोट आई, जबकि पीछे बैठे जाफर भी घायल हो गए। राहगीरों ने तुरंत डायल 112 (Dial 112) पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि हाथियों के झुंड में बच्चे भी थे, बच्चों के कारण हाथी अचानक हमलावर हो गए। उन्होंने घायलों को कुचल भी दिया।
चिकित्सालय में उपचार और मृत्यु
पुलिस ने दोनों घायलों को डॉ. सुशीला तिवारी चिकित्सालय (Dr. Sushila Tiwari Hospital) भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने शकील को मृत घोषित कर दिया, जबकि जाफर को उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए बरेली (Bareilly) रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार जाफर ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
जाफर की टूटी पसलियां, शकील के कानों से बहा खून
बताया गया है कि मृतक जीजा जाफर की हाथियों के हमले से पसलियां टूट गई थीं जबकि साले शकील के दोनों कानों से खून बह रहा था। उसके सीने पर हाथी ने पैर रखा था, जिस कारण उसका चेहरा बाईं ओर बुरी तरह फूल गया था और उसकी बाईं आंख को भी गंभीर नुकसान पहुंचा था। रविवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। बताया गया है कि उन्हें शाहजहांपुर ले जाया जाएगा। बताया गया कि दोनों हल्द्वानी में कृत्रिम आभूषण व वस्त्रों की फेरी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना
टांडा क्षेत्र लंबे समय से हाथी आवाजाही वाला संवेदनशील कॉरिडोर माना जाता है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या चेतावनी संकेत, प्रकाश व्यवस्था और वाहन गति नियंत्रण पर्याप्त हैं। मानव-वन्यजीव टकराव की बढ़ती घटनाएं वन विभाग और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। वन विभाग ने घटना की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से हाथियों के आवागमन पर नजर रखने की अपील की है।
प्रशासनिक पहल और आगे की राह
पुलिस ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में—
रात्रि में गति नियंत्रण,
चेतावनी संकेतों की संख्या बढ़ाने,
और वन्यजीव निगरानी प्रणाली मजबूत करने
की आवश्यकता है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्या ऐसी दुर्घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं। यह घटना सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों दृष्टियों से गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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