डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 मार्च 2026 (Workshop On Development of Kumaoni)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद के भीमताल स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्राथमिक कक्षाओं के लिए कुमाउनी भाषा के मॉड्यूल निर्माण की कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला के समापन अवसर पर विषय विशेषज्ञ और संदर्भदाता उत्तराखंड की लोकभाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के प्रबंध संपादक डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने प्रदेश में होने वाली सरकारी भर्तियों में स्थानीय लोकभाषाओं के ज्ञान को पात्रता के रूप में शामिल किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश की नौकरियों में स्थानीय भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य या वांछनीय पात्रता के रूप में जोड़ा जाए तो इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार में अवसर मिलेंगे और बाहरी अभ्यर्थी भी इन भाषाओं को सीखने के लिए प्रेरित होंगे।
जनगणना में स्थानीय भाषाओं को दर्ज करने की मांग
डॉ. जोशी ने आगामी जनगणना में उत्तराखंड के लोगों की मातृभाषा के रूप में कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, रंवाल्टी और रं जैसी स्थानीय लोकभाषाओं को दर्ज किए जाने की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना था कि यदि इन भाषाओं को बोलने वालों की वास्तविक संख्या सरकारी अभिलेखों में सामने आएगी तो इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस नीतिगत पहल संभव हो सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे इन भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए राज्य का दावा भी मजबूत होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप स्थानीय भाषा को बढ़ावा
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. हेम चंद्र तिवारी ने समापन अवसर पर कार्यशाला में किए गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. राजेश कुमार जोशी ने विषय की गंभीरता और उपयोगिता को देखते हुए पांच दिन की एक और कार्यशाला आयोजित किए जाने का सुझाव दिया, जिस पर संस्थान के प्राचार्य सुरेश चंद्र आर्य ने सहमति व्यक्त की।
प्राचार्य आर्य ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप स्थानीय भाषा कुमाउनी के महत्व को बढ़ावा देना, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद को सशक्त करना तथा अभिव्यक्ति कौशल का विकास करना है।
विशेषज्ञों और शिक्षकों की सहभागिता
कार्यशाला में कुमाउनी मासिक पत्रिका ‘पहरू’ के संपादक नीरज पंत तथा पारंपरिक लोक संस्था ‘परम्परा’ के निदेशक बृजमोहन जोशी ने भी संदर्भदाता के रूप में अपने विचार साझा किए और कार्यशाला को उपयोगी बताया।
विषय विशेषज्ञ के रूप में भावना पांडे, बसंती लोहनी, नमिता भट्ट, भगवान बोरा, देवेंद्र सिंह, उमेश जोशी, हेम चंद्र शर्मा और महेश चंद्र शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी सहभागिता की और उल्लेखनीय योगदान दिया।
इसके अतिरिक्त वरिष्ठ प्रवक्ता ललित प्रसाद तिवारी, प्रवक्ता डॉ. विमल किशोर, डॉ. सुमित पांडे, डॉ. आरती जैन, रेखा तिवारी, डॉ. संजय गुरूरानी, तनुजा उप्रेती, मनोज चौधरी, डॉ. शैलेंद्र धपोला, डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी, सुभाष जोशी, नीरज नेगी, प्रयाग सिंह फर्स्वाण, भगवत सिंह, दीपक बोहरा, दलीप सिंह, भुवन जोशी, मीना देवी और पिंकी सहित अन्य शिक्षकों ने भी सहयोग दिया। कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
