नवीन समाचार, नैनीताल, 16 मार्च 2026 (Anand Mahindra wrote on Phool Dei)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ों में मनाए जाने वाले पारंपरिक वसंत उत्सव ‘फूलदेई’ (Phool Dei Festival) ने अब राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। महिंद्रा समूह (Mahindra Group) के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने इस लोक पर्व की सराहना करते हुए इसे प्रकृति, संस्कृति और ‘देने’ की भावना का अद्भुत प्रतीक बताया है। उनकी सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का कार्य किया है।
क्या है फूलदेई और क्यों है खास
उत्तराखंड के कुमाऊं (Kumaon) क्षेत्र में चैत्र मास के प्रथम दिवस, जिसे मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) या फूल संक्रांति भी कहा जाता है, ‘फूलदेई’ पर्व मनाया जाता है। यह बसंत ऋतु के आगमन और नव वर्ष के स्वागत का प्रतीक है। इस समय पहाड़ बुरांस (Rhododendron), फ्यूंली (Primrose), आड़ू, खुबानी और सरसों के फूलों से सजे होते हैं, जो प्रकृति के नवजीवन का संदेश देते हैं।
इस दिन छोटे बच्चे सुबह जंगलों से ताजे फूल एकत्र करते हैं और घर-घर जाकर देहरी (Doorstep) पर उन्हें सजाते हैं। वे पारंपरिक लोकगीत गाते हुए परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं—
“फूलदेई, छम्मा देई.…
जतुकै देला, उतुकै सही ।
देंणी द्वार, भर भकार,
सास ब्वारी, एक लकार,
यो देलि सौ नमस्कार ।
फूलदेई, छम्मा देई.…
जतुकै देला, उतुकै सही ।”
इसका अर्थ है: आपके द्वार (देहली) फूलों से भरे रहें। आप जितना देंगे-उतना ही सही है, यानी संतुष्टि का भाव। आपके द्वार पर ईश्वर कृपालु हों। आपके भंडार भरे रहें। घर में समृद्धि, अन्न-धन और सुख बना रहे। सास-बहु एक समान रहें। इस देहली-द्वार को सौ बार प्रणाम है। आप यह भी जरूर पढ़ना चाहेंगे : उत्तराखंड का प्रसिद्ध ऋतु पर्व ’फूल देई’ जानें इस लोक पर्व के बारे में सब कुछ
आनंद महिंद्रा की पोस्ट ने क्यों जीता दिल
आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर इस पर्व का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने हाल तक इस पर्व के बारे में नहीं सुना था, लेकिन इसे जानकर वे बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने लिखा कि बच्चे घर-घर जाकर पहले फूल देते हैं और फिर आशीर्वाद स्वरूप गीत गाते हैं।
उन्होंने इस परंपरा की तुलना अमेरिका के ‘हैलोवीन’ (Halloween) से करते हुए एक महत्वपूर्ण अंतर बताया—जहां हैलोवीन में बच्चे ‘ट्रिक या ट्रीट’ कहते हुए कुछ मांगते हैं, वहीं फूलदेई में बच्चे पहले ‘देते’ हैं, मांगते नहीं।
उन्होंने इसे पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति से जुड़ाव का सुंदर उदाहरण बताते हुए कहा कि जैसे होली (Holi) विश्वभर में प्रसिद्ध हुई है, वैसे ही फूलदेई को भी वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड के बच्चों को अपना ‘मंडे मोटिवेशन’ भी बताया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और सांस्कृतिक महत्व
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने आनंद महिंद्रा की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि फूलदेई पर्व प्रकृति के प्रति आस्था, सद्भाव और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रयासों से उत्तराखंड की लोक परंपराएं देश-दुनिया तक पहुंचेंगी।
महिंद्रा ने भी मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस अनूठी परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान देना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
परंपरा, प्रकृति और समाज का सुंदर संगम
फूलदेई केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पहाड़ की जीवनशैली, प्रकृति से जुड़ाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दिन बच्चे केवल फूल नहीं चढ़ाते, बल्कि घर-घर जाकर रिश्तों को जोड़ते हैं और सामूहिकता का संदेश देते हैं।
शाम को एकत्र चावल और गुड़ से ‘सई’ नामक पारंपरिक प्रसाद भी बनाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन से लोकगीतों का स्वर भी बदल जाता है और ‘चैती’ व ‘ऋतुरैंण’ गायन की शुरुआत होती है।
क्यों जरूरी है इस परंपरा को पहचान देना
आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जुड़ाव जैसे विषय महत्वपूर्ण हो गए हैं, ऐसे में फूलदेई जैसे पर्व हमें मूल्यों की याद दिलाते हैं। यह पर्व सिखाता है कि समाज ‘लेने’ से नहीं, ‘देने’ से मजबूत होता है।
क्या यह समय नहीं है कि हम अपने ऐसे लोक पर्वों को वैश्विक मंच तक पहुंचाएं? क्या हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी सबसे बड़ी पहचान नहीं है?
यह स्पष्ट है कि आनंद महिंद्रा की एक पोस्ट ने इस पारंपरिक पर्व को नई चर्चा में ला दिया है और अब यह अवसर है कि इसे व्यापक स्तर पर पहचान दी जाए।
कौन हैं आनंद महिंद्रा
आनंद महिंद्रा का जन्म पहली मई 1955 को हुआ। वह भारत के एक प्रमुख अरबपति उद्योगपति और मुंबई स्थित 100 से अधिक देशों में सक्रिय महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन हैं। उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा को ऑटोमोबाइल, आईटी, कृषि उपकरण और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है। उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से कला स्नातक और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है। वह सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता और जमीनी स्तर के इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने वंचित लड़कियों की शिक्षा के लिए नन्ही कली नामक सामाजिक संगठन की भी स्थापना की है।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
नैनीताल में क्लिक करके नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य सभी महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ी जा सकती हैं। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचार, अल्मोड़ा के समाचार, बागेश्वर के समाचार, चंपावत के समाचार, ऊधमसिंह नगर के समाचार, देहरादून के समाचार, उत्तरकाशी के समाचार, पौड़ी के समाचार, टिहरी जनपद के समाचार, चमोली के समाचार, रुद्रप्रयाग के समाचार, हरिद्वार के समाचार और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार भी पढ़ सकते हैं।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ें। हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (Anand Mahindra wrote on Phool Dei) :
Anand Mahindra wrote on Phool Dei, Uttarakhand News, Nainital News, Hindi News, Culture News, Phool Dei Festival Significance Uttarakhand Culture, Anand Mahindra Tweet On Phool Dei Festival India, Traditional Spring Festival Kumaon Uttarakhand Details, Environmental Message In Indian Festivals Phool Dei, Cultural Heritage Promotion Uttarakhand Folk Festival, Comparison Phool Dei And Halloween Cultural Analysis, Importance Of Folk Traditions In Modern Society India, Spring Festival Celebration In Himalayan Region India, Role Of Social Media In Promoting Culture India, Nature Based Festivals Awareness India Uttarakhand, Indian Traditional Festivals Global Recognition Strategy, #PhoolDeiFestival #UttarakhandCulture #IndianFestivals #CulturalHeritage #EnvironmentalAwareness #AnandMahindra #FolkTradition #SustainableCulture #IndiaTraditions #UttarakhandNews
डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं।