नवीन समाचार, देहरादून, 12 मई 2026 (Major Action Against KFC-4 Lakhs Fine)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) में विश्व प्रसिद्ध फास्ट फूड चेन केएफसी (KFC) को खाद्य सुरक्षा विभाग को गुमराह करना महंगा साबित हुआ है। राजपुर रोड स्थित आउटलेट द्वारा पानी की जांच की फर्जी रिपोर्ट पेश करने के मामले में अपर जिला मजिस्ट्रेट/न्याय निर्णायक अधिकारी केके मिश्रा की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए केएफसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और रेस्टोरेंट मैनेजर पर कुल 3.95 लाख रुपये का भारी जुर्माना (Penalty) लगाया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में गलत दस्तावेज प्रस्तुत करना न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि यह कानून के साथ खिलवाड़ भी है।
क्या है पूरा मामला?
यह प्रकरण 23 सितंबर 2024 का है, जब खाद्य सुरक्षा विभाग और औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने राजपुर रोड स्थित केएफसी रेस्टोरेंट का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट के मैनेजर तुहिन कुमार ने टीम को पानी की गुणवत्ता से जुड़ी ‘वाटर टेस्टिंग रिपोर्ट’ सौंपी।
ऐसे पकड़ी गई चोरी: जब विभाग ने रिपोर्ट पर अंकित ULR नंबर और QR कोड को ऑनलाइन सत्यापित किया, तो रिपोर्ट में दर्ज तारीख और वास्तविक रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया।
छेड़छाड़ का खुलासा: प्रस्तुत रिपोर्ट पर परीक्षण की तिथि 13 जून 2024 अंकित की गई थी, जबकि डिजिटल सत्यापन (QR Scan) करने पर पता चला कि वह रिपोर्ट वास्तव में 13 जनवरी 2024 की थी। यानी पुरानी रिपोर्ट की तारीख बदलकर टीम को गुमराह करने का प्रयास किया गया था।
अदालत में प्रबंधन की दलील और कानूनी हंटर
सुनवाई के दौरान केएफसी प्रबंधन ने इस गड़बड़ी का ठीकरा स्टोर मैनेजर पर फोड़ते हुए खुद को निर्दोष बताया। कंपनी का तर्क था कि यह मानवीय भूल थी और बाद में सही रिपोर्ट उपलब्ध करा दी गई थी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
अदालत ने माना कि ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम’ (FSSAI Act) के तहत यह किसी भी संस्थान की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह निरीक्षण टीम को प्रमाणित और सटीक दस्तावेज उपलब्ध कराए। किसी भी बड़े ब्रांड को अपने प्रबंधकों की गलती की आड़ में जिम्मेदारी से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जुर्माने का विवरण:
केएफसी इंडिया प्रा. लि.: 3,75,000 (तीन लाख 75 हजार) रुपये।
रेस्टोरेंट मैनेजर (तुहिन कुमार): 20,000 (बीस हजार) रुपये।
शर्त: निर्धारित अवधि के भीतर जुर्माना जमा न करने पर कड़ी वसूली कार्यवाही की जाएगी।
बड़े ब्रांड्स की जवाबदेही पर उठे सवाल
इस कार्यवाही ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या नामी फूड ब्रांड्स भी मानक प्रक्रियाओं में लापरवाही बरत रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस सख्ती ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून की नजर में छोटा प्रतिष्ठान हो या बहुराष्ट्रीय कंपनी, उपभोक्ताओं की सेहत और नियमों के साथ समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
क्या आपको लगता है कि इस तरह के भारी जुर्माने बड़े फूड ब्रांड्स को भविष्य में अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए पर्याप्त हैं? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
