भाजपा ने ‘हैट ट्रिक’ के लिए कराया विधायकों का ‘ट्रैफिक लाइट’ टेस्ट, 8 विधायक फेल, 19 से 23 डेंजर जोन में..!!

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 मई 2026 (8 BJP MLA Fail-19-23 in Danger Zone)। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के संकल्प के साथ पार्टी ‘मिशन 2027’ पर काम कर रही है। इस रणनीति के तहत कराए गए हालिया आंतरिक (इंटरनल) सर्वे ने कई सिटिंग विधायकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। पार्टी ने अपने विधायकों के प्रदर्शन को परखने के लिए उन्हें ‘ट्रैफिक लाइट’ की तरह तीन श्रेणियों—ग्रीन, येलो और रेड जोन में वर्गीकृत किया है, जिससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आगामी चुनाव में कई चेहरों की छुट्टी हो सकती है।

(8 BJP MLA Fail-19-23 in Danger Zone)प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड (Uttarakhand) की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party-BJP) ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) को लेकर अपना ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार कर लिया है। पार्टी द्वारा गोपनीय रूप से कराए गए दो आंतरिक सर्वे (Internal Survey) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

संगठन के सूत्रों के अनुसार, कम से कम 8 वर्तमान  विधायक (MLA) सीधे तौर पर ‘फेल’ श्रेणी में पाए गए हैं, जबकि लगभग 19 से 23 विधायकों को ‘डेंजर जोन’ (Danger Zone) यानी रेड कैटेगरी (Red Category) में रखा गया है। यह सर्वे विधायकों की धरातल पर सक्रियता, जनसंपर्क, और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता जैसे कड़े मानकों पर आधारित है। ‘नवीन समाचार’ इन दावों की पुष्टि नहीं करता है। 

विधायकों के लिए बना ‘ट्रैफिक लाइट’ सिस्टम

पार्टी ने विधायकों के प्रदर्शन को समझने के लिए उन्हें तीन विशेष जोनों में विभाजित किया है:

  • ग्रीन जोन (Green Zone): इस श्रेणी में वे कर्तव्यशील विधायक शामिल हैं जिनकी स्थिति क्षेत्र में मजबूत है और जनता के बीच जिनकी छवि बेदाग है। इनके लिए टिकट की राह आसान मानी जा रही है।

  • येलो जोन (Yellow Zone): यहाँ उन विधायकों को रखा गया है जिनका प्रदर्शन औसत है। संगठन ने इन्हें अपनी कार्यप्रणाली सुधारने की सख्त हिदायत दी है। यदि समय रहते इन्होंने सुधार नहीं किया, तो ये भी रेड जोन में जा सकते हैं।

  • रेड जोन (Red Zone): यह श्रेणी खतरे की घंटी है। इस जोन में शामिल विधायकों के विरुद्ध क्षेत्र में असंतोष, निष्क्रियता और भारी ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (Anti-incumbency) देखी गई है। सूत्रों का दावा है कि इस श्रेणी के विधायकों का टिकट कटना भी लगभग तय माना जा रहा है।

‘जिताऊ’ उम्मीदवार ही एकमात्र पैमाना

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट (Mahendra Bhatt) ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के लिए व्यक्ति से बड़ा लक्ष्य है। पार्टी का एकमात्र उद्देश्य 2022 की उन गलतियों को दोहराने से बचना है, जहाँ 2017 की 57 सीटों के मुकाबले पार्टी 47 सीटों पर सिमट गई थी। 10 सीटों और करीब 2.20 प्रतिशत वोट शेयर के नुकसान की भरपाई के लिए इस बार ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ (Micro-management) का सहारा लिया जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन केवल ‘जिताऊ’ (Winable) चेहरों पर ही दांव लगाएगा, चाहे वह कितना ही कद्दावर नेता क्यों न हो।

चमोली का बचाव : सर्वे अंतिम आधार नहीं

इस सर्वे के बाद विधायकों के बीच मचे हड़कंप के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली (Vinod Chamoli) ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया है। चमोली के अनुसार, किसी एक सर्वे के आधार पर टिकट कटने का फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा कि सर्वे केवल फीडबैक (Feedback) लेने का एक माध्यम है जिससे कमजोरियों को पहचाना जा सके। चमोली ने तर्क दिया कि टिकट वितरण की एक लंबी प्रक्रिया होती है और चुनाव में अभी पर्याप्त समय है, जिसमें विधायक अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं।

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संगठन की सख्ती और भविष्य की रणनीति

भले ही सार्वजनिक रूप से बचाव किया जा रहा हो, लेकिन संगठन के भीतर यह संदेश साफ है कि ‘परफॉर्म करो या बाहर जाओ’। रेड जोन में 19 से 23 विधायकों का नाम होना यह दर्शाता है कि भाजपा अपनी लगभग एक-तिहाई सीटों पर नए चेहरों को उतारने का मन बना चुकी है। यह उन विधायकों के लिए अंतिम चेतावनी है जो केवल सत्ता के भरोसे क्षेत्र से कटे हुए थे।

क्या भाजपा का यह ‘कठोर’ सर्वे राज्य में सत्ता विरोधी लहर को थामने में सफल होगा, या इससे पार्टी के भीतर बगावत के सुर तेज होंगे? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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