न्यायालय पर ‘तारीख पर तारीख’ वाली टिप्पणी पूर्व विधायक को पड़ी भारी, हाई कोर्ट की फटकार के बाद मांगनी पड़ी माफी

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मई 2026 (HC Hard on Tarikh par Tarikh)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध टिप्पणी करने पर पूर्व भाजपा (BJP) विधायक राजेश शुक्ला (Rajesh Shukla) को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा कि “यह न्यायालय है, कोई फिल्म (Film) नहीं चल रही है।” इस तल्ख टिप्पणी और व्यक्तिगत रूप से तलब किए जाने के बाद पूर्व विधायक को न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी। मामला किच्छा (Kichha) नगर पालिका के चुनाव और सिरौलीकलां (Sirauli Kalan) को पृथक किए जाने से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Justice Rakesh Thapliyal) की एकलपीठ (Single Bench) ने बुधवार को इस संवेदनशील मामले की सुनवाई की। मामला तब गंभीर हो गया जब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता (Advocate) दुष्यंत मैनाली (Dushyant Mainali) ने न्यायालय के समक्ष एक वीडियो क्लिप (Video Clip) प्रस्तुत की। इस वीडियो में पूर्व विधायक द्वारा न्यायालय की कार्यप्रणाली पर ‘तारीख पर तारीख’ (Tarikh Par Tarikh) जैसी टिप्पणी की गई थी, जिसे न्यायमूर्ति ने न्यायालय की अवमानना और गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य माना।

“न्यायालय सबके लिए खुला है, कोई किसी को रोक नहीं सकता”

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायालय हर सप्ताह इस मामले की सुनवाई कर रहा है, इसके बावजूद ऐसी बयानबाजी करना निंदनीय है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि कोई भी पक्षकार या राजनीतिक दल किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने के लिए न्यायालय की शरण लेने से वंचित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय लेना न्यायालय का अधिकार है और इसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या अनुचित टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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(HC Hard on Tarikh par Tarikh) बेहड़ जी असल मुद्दों के साथ ज़मीन पर आइये, विकास के विषय पर चर्चा करिये  अपराध और षड्यंत्र की गंदी राजनीति बंद करिये..., #rajeshshukla #bjp #kiccha  #uttarakhandउच्च न्यायालय की फटकार के बाद पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने अपने शब्दों पर गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने न्यायालय को विश्वास दिलाया कि भविष्य में उनकी ओर से ऐसी किसी भी टिप्पणी की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

किच्छा नगर पालिका विस्तार और सिरौलीकलां का विवाद

यह पूरा विवाद किच्छा नगर पालिका (Kichha Municipal Council) के विस्तारीकरण से जुड़ा है। मोहम्मद याशीन (Mohammad Yashin) व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation-PIL) के अनुसार, 2018 में सिरौलीकलां, बंडिया, देवरिया और आजादनगर को किच्छा नगर पालिका में शामिल किया गया था। पिछले 6 वर्षों से ये क्षेत्र नगर पालिका का हिस्सा रहे हैं, लेकिन अब वर्तमान में सिरौलीकलां को किच्छा नगर पालिका से पृथक किया जा रहा है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि उन्हें पालिका में ही बनाए रखा जाए और वहां भी अन्य क्षेत्रों की भांति चुनाव कराए जाएं।

शहरी विकास सचिव से मांगा गया शपथपत्र

मामले की कानूनी पेचीदगियों को देखते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार से भी स्पष्टीकरण मांगा है। एकलपीठ ने प्रश्न किया कि नगर पालिका बनाने की अधिसूचना (Notification) जिस धारा के अंतर्गत जारी की गई थी, क्या वह वैधानिक रूप से उचित है? न्यायालय ने शहरी विकास सचिव (Secretary Urban Development) को आगामी मंगलवार तक इस संबंध में एक विस्तृत शपथपत्र (Affidavit) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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