हल्द्वानी से आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा का श्रीगणेश, 20 श्रद्धालुओं का प्रथम दल रवाना होने को तैयार
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 6 मई 2026 (Nainital Latest News 6 May 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की पावन भूमि पर आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड (Kumaon Mandal Vikas Nigam Limited-KMVN) द्वारा संचालित आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा (Adi Kailash-Om Parvat Yatra) का शुभारंभ होने जा रहा है। यात्रा का प्रथम दल आगामी शुक्रवार, 8 मई को प्रातः 8 बजे हल्द्वानी (Haldwani) के तिकोनिया स्थित लोक निर्माण विभाग (Public Works Department-PWD) के विश्राम गृह से अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान करेगा। यह यात्रा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के विकल्प के रूप में श्रद्धालुओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के व्यवसाय विकास प्रबंधक (Business Development Manager) दीपक पांडे (Deepak Pandey) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रथम दल में कुल 20 श्रद्धालु सम्मिलित हैं। इस जत्थे में भक्ति और उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है, जिसमें 13 महिला और 7 पुरुष यात्री शामिल हैं। निगम ने यात्रियों की सुगम यात्रा, आवास और सुरक्षा के लिए सीमांत क्षेत्रों तक व्यापक प्रबंध सुनिश्चित किए हैं।
धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ शुरू होगी यात्रा
अपनी यात्रा के प्रथम दिवस पर श्रद्धालु उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। दल सबसे पहले नीम करोली बाबा की तपोस्थली कैंची धाम (Kanchi Dham), न्याय के देवता चितई गोलू देवता मंदिर (Chitai Golu Devta Temple) और प्राचीन जागेश्वर धाम (Jageshwar Dham) में शीश नवाएगा। इसके पश्चात, दल पर्यटक आवास गृह (Tourist Rest House) जागेश्वर में मध्याह्न भोजन करेगा और फिर पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के लिए प्रस्थान करेगा। यह यात्रा श्रद्धालुओं को हिमालय की गोद में स्थित आदि कैलाश के अलौकिक दर्शन कराएगी।
मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर प्रशासन का कड़ा रुख, आपदा प्रबंधन के लिए ‘अलर्ट मोड’
आगामी मानसून (Monsoon) ऋतु के दृष्टिगत नैनीताल (Nainital) जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और राहत कार्यों की रणनीतियां अभी से सुदृढ़ कर दी हैं। जिलाधिकारी (District Magistrate) ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) के निर्देशों पर बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में सभी विभागों को 24 घंटे ‘अलर्ट मोड’ (Alert Mode) पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। अपर जिलाधिकारी (Additional District Magistrate) सौरभ असवाल (Saurabh Aswal) ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित प्रतिक्रिया (Response Time) को न्यूनतम रखना ही प्रशासन की प्राथमिकता है।
विभागों को सौंपी गई विशिष्ट जिम्मेदारियां
प्रशासन ने भूस्खलन (Landslide) संभावित मार्गों पर जेसीबी (JCB) और पोकलैंड (Poclain) जैसी भारी मशीनरी की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को सभी चिकित्सालयों (Hospitals) में जीवनरक्षक औषधियों और एंटी-वेनम (Anti-venom) का पर्याप्त भंडारण रखने को कहा गया है। वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को दुर्गम क्षेत्रों में तीन माह का अग्रिम खाद्यान्न (Food Grains) सुरक्षित करने के निर्देश मिले हैं। जल संस्थान और विद्युत विभाग को भी वैकल्पिक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने की हिदायत दी गई है, ताकि आपात स्थिति में जनजीवन प्रभावित न हो।
उत्तराखंड के भू-विज्ञानी डॉ. डिमरी को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, ‘कूटा’ ने जताया हर्ष
उत्तराखंड मूल के प्रख्यात भू-विज्ञानी (Geologist) डॉ. विजय प्रकाश डिमरी (Dr. Vijay Prakash Dimri) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2026 के लिए ‘यूरोपियन जियोसाइंस यूनियन’ (European Geosciences Union-EGU) के प्रतिष्ठित ‘क्रिस्टियन हग्जेन मेडल’ (Christiaan Huygens Medal) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें भू-विज्ञान (Geoscience) के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (Kumaun University Teachers Association-KUTA) ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है। पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित डॉ. डिमरी पूर्व में ‘नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (National Geophysical Research Institute-NGRI) के निदेशक भी रह चुके हैं। कूटा अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी (Prof. Lalit Tiwari) सहित अन्य पदाधिकारियों ने इसे राज्य के शैक्षिक और वैज्ञानिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वनकर्मियों को मिला ‘रेडियो टेलीमेट्री’ का प्रशिक्षण
नैनीताल और चंपावत (Champawat) वन प्रभागों में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। नैनीताल चिड़ियाघर (Nainital Zoo) में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया (WWF-India) के सहयोग से आयोजित एक कार्यशाला में लगभग 50 वनकर्मियों को ‘रेडियो टेलीमेट्री’ (Radio Telemetry) तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि बाघों (Tigers) और तेंदुओं (Leopards) की सटीक निगरानी के लिए रेडियो कॉलर (Radio Collar) और सैटेलाइट टैग (Satellite Tag) अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। इस तकनीक के माध्यम से हिंसक वन्यजीवों के व्यवहार और उनके संचरण क्षेत्र (Movement Area) पर नजर रखी जा सकेगी, जिससे भविष्य में संभावित संघर्षों को समय रहते टाला जा सके। कार्यशाला में डेटा विश्लेषण (Data Analysis) और वन्यजीव अनुसंधान से जुड़े विधिक पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
