उत्तराखंड में सरकारी कब्जे में जा सकती हैं 3500 वक्फ संपत्तियां, ‘उम्मीद पोर्टल’ में नहीं किया गया है पंजीकरण…

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नवीन समाचार, देहरादून, 7 मई 2026 (UK-3500 Waqf Properties in Danger)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की 3,500 वक्फ संपत्तियाँ राज्य सरकार के कब्जे में जा सकती हैं। वक्फ संपत्तियों (Waqf Properties) के प्रबंधन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) के ‘उम्मीद पोर्टल’ (Umeed Portal) पर विवरण दर्ज करना अनिवार्य किया है। किन्तु सूत्रों के अनुसार लगभग 3,500 संपत्तियों ने अब तक ‘उम्मीद पोर्टल’ में पंजीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में राज्य सरकार (State Government) इन्हें अवैध (Illegal) मानते हुए अपने अधिकार में ले सकती है।

(UK-3500 Waqf Properties in Danger) Umeed Portal' launched for registration of Waqf properties - Sanskriti IASउल्लेखनीय है कि वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण (Digitization) और उनके उचित रखरखाव के लिए भारत सरकार (Government of India) ने ‘उम्मीद पोर्टल’ (Umeed Portal-WAMIQ) का शुभारंभ किया है। इस पोर्टल पर प्रत्येक वक्फ संपत्ति का वक्फनामा (Waqf Nama), खसरा-खतौनी (Land Records) और अन्य आवश्यक साक्ष्य (Evidence) अपलोड करना अनिवार्य है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) में दर्ज कुल संपत्तियों में से एक बड़ा हिस्सा इस डिजिटल डेटाबेस (Digital Database) से गायब है, जिसने प्रशासन (Administration) के कान खड़े कर दिए हैं।

संपत्तियों के आंकड़ों में भारी अंतर और सरकार का संदेह

उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों के विवरण और पोर्टल पर उनकी वर्तमान स्थिति के बीच एक बड़ा अंतराल दिखाई दे रहा है। विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 7,000 से अधिक संपत्तियां वक्फ बोर्ड (Waqf Board) में पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 2,100 ‘औकाफ’ (Donated Properties) संपत्तियां हैं और शेष 5,000 में मस्जिद (Mosque), मदरसा (Madarsa), मजार (Mazar), कब्रिस्तान (Graveyard), ईदगाह और स्कूल (School) आदि सम्मिलित हैं।

आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इनमें से अब तक केवल 3,700 संपत्तियां ही ‘उम्मीद पोर्टल’ पर सफलतापूर्वक पंजीकृत की गई हैं। शेष साढ़े तीन हजार संपत्तियां ऐसी हैं जिनकी जानकारी पोर्टल पर नहीं दी जा रही है। सरकार को संदेह है कि इनमें से कई संपत्तियां सार्वजनिक भूमि (Public Land) या वन भूमि (Forest Land) पर अवैध रूप से कब्जा करके स्थापित की गई थीं, जिन्हें बाद में वक्फ के अभिलेखों में सम्मिलित कर लिया गया। अब जब डिजिटल साक्ष्य मांगे जा रहे हैं, तो संबंधित प्रबंधक (Manager) जानकारी देने से बच रहे हैं।

मैदानी जिलों में सबसे अधिक संदिग्ध संपत्तियां

पंजीकरण की इस प्रक्रिया में उत्तराखंड के मैदानी जनपद (Plain Districts) सबसे अधिक चर्चा में हैं। जनपद स्तर पर आंकड़ों का विश्लेषण करने पर निम्नलिखित स्थिति सामने आई है:

  • हरिद्वार (Haridwar): धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले इस जिले में सर्वाधिक लगभग 350 संपत्तियों का विवरण ‘उम्मीद पोर्टल’ पर उपलब्ध नहीं है।

  • देहरादून (Dehradun): राज्य की राजधानी में भी 188 ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं जिनका रिकॉर्ड संदिग्ध श्रेणी में है।

  • अल्मोड़ा (Almora): पर्वतीय जनपदों में भी स्थिति अलग नहीं है; यहाँ भी 14 ऐसी संपत्तियां मिली हैं जिनका ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया है।

प्रशासन का मानना है कि विवरण छुपाने की यह प्रवृत्ति उन संपत्तियों के स्वामित्व (Ownership) पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। यदि इन संपत्तियों के पास वैध दस्तावेज (Legal Documents) होते, तो इनके पंजीकरण में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए थी।

6 अगस्त की समय सीमा और संभावित प्रशासनिक कार्यवाही

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के नेतृत्व वाली सरकार ने इस विषय पर किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। वक्फ संपत्तियों के प्रबंधकों को अब 6 अगस्त 2026 तक का अंतिम समय (Deadline) दिया गया है। जो संपत्तियां इस निर्धारित अवधि तक ‘उम्मीद पोर्टल’ पर पंजीकृत नहीं होंगी, उन्हें सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण (Encroachment) मान लिया जाएगा।

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इसके उपरांत, ऐसी संपत्तियों को सरकार में निहित (Vesting in Government) करने की वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इसका अर्थ यह है कि उन संपत्तियों का स्वामित्व सीधे राज्य सरकार के पास चला जाएगा और प्रशासन उन पर कब्जा प्राप्त कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राज्य में भू-कानून (Land Law) की रक्षा और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए अनिवार्य है। आने वाले समय में उन ढांचों पर भी कार्यवाही हो सकती है जो नदी क्षेत्रों या सड़क किनारे अवैध रूप से बनाए गए हैं।

क्या ‘उम्मीद पोर्टल’ के माध्यम से वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों को रोकने में पूर्णतः सफल हो पाएगा? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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