छह वर्षों से पहाड़ के लोगों की सेवा कर रहे चिकित्सक की अंधेरे में नदी में गिरने से गयी जान

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नवीन समाचार, चंपावत, 4 जून 2026 (Lohaghat-Doctor Died Falling in River)। चंपावत जनपद के लोहाघाट क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में मायावती अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. लोकेश जोशी की मृत्यु हो गयी। बताया जा रहा है कि ड्यूटी से लौटने के बाद घर जाते समय अंधेरे में उनका पैर फिसल गया और वह लगभग 14 फीट नीचे बह रही नदी में जा गिरे। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी। इस घटना से चिकित्सा जगत, स्थानीय लोगों और उनके परिचितों में शोक की लहर दौड़ गयी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा रेलिंग होती तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था।

Lohaghat-Doctor Died Falling in Riverबताया गया है 40 वर्षीय डॉ. लोकेश जोशी मूल रूप से कश्मीर से थे, और पिथौरागढ़ से पारिवारिक संबंध रखते थे। वह पिछले छह वर्षों से पत्नी डॉली जोशी और नौ वर्षीय पुत्री के साथ लोहाघाट के बाड़ीगाड़ क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे और लोहाघाट स्थित अद्वैत आश्रम मायावती के धर्मार्थ चिकित्सालय में दंत चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे थे। डॉ. लोकेश जोशी के पिता जाने-माने एनेस्थेटिस्ट हैं और डॉ. जोशी जाने-माने यूरो सर्जन भी थे।

गांव-गांव जाकर करते थे निःशुल्क उपचार

डॉ. लोकेश जोशी केवल धर्मार्थ चिकित्सालय तक सीमित चिकित्सक नहीं थे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों का निःशुल्क उपचार भी करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने अनेक गांवों में दंत स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क परामर्श तथा उपचार उपलब्ध कराया।

सरकारी विद्यालयों, ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ बस्तियों में नियमित रूप से आयोजित शिविरों के कारण वह क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे। उनकी मृत्यु को क्षेत्र के लोग केवल एक चिकित्सक की नहीं, बल्कि समाजसेवी व्यक्तित्व की क्षति मान रहे हैं।

ड्यूटी से लौटने के बाद हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार रात्रि में डॉ. जोशी अपनी स्कूटी से अस्पताल से घर लौट रहे थे। उन्होंने हमेशा की तरह सड़क किनारे वाहन खड़ा किया और पैदल घर की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान रास्ते में अंधेरा होने और नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया।

बताया जा रहा है कि जिस स्थान से वह गुजर रहे थे वहां न तो स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था थी और न ही नदी की ओर किसी प्रकार की सुरक्षा रेलिंग लगी हुई थी। संतुलन बिगड़ते ही वह सड़क से लगभग 14 फीट नीचे बह रही बाड़ीगाड़ नदी में जा गिरे।

पत्नी की तलाश के दौरान चला घटना का पता

काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर उनकी पत्नी डॉली जोशी चिंतित हो गयीं। उन्होंने बाहर निकलकर उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान उनकी नजर नदी क्षेत्र की ओर गयी, जहां डॉ. जोशी अचेत अवस्था में पड़े दिखाई दिये।

इसके बाद उन्होंने शोर मचाकर स्थानीय लोगों को बुलाया। आसपास के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और भारी मशक्कत के बाद उन्हें नदी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

सिर पर गंभीर चोट बनी मौत का कारण

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार नदी में गिरने के दौरान उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यही चोट उनकी मृत्यु का प्रमुख कारण बनी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गयी।

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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

इस दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बाड़ीगाड़ क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा रेलिंग की कमी पर चिंता जतायी है। उनका कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं, लेकिन सुरक्षा के प्रबंध पर्याप्त नहीं हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी किनारे सुरक्षा अवरोधक और प्रकाश व्यवस्था होती तो डॉ. जोशी बच सकते थे। लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील स्थानों पर तत्काल सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

क्षेत्र ने खोया एक समर्पित चिकित्सक

डॉ. लोकेश जोशी की पहचान केवल एक चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवा के लिए समर्पित व्यक्ति के रूप में भी थी। दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने और गरीब लोगों के उपचार के लिए उनके प्रयासों को स्थानीय लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

उनकी असामयिक मृत्यु ने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचाया है। लोगों का कहना है कि पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है और उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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