नवीन समाचार, देहरादून, 31 मई 2026 (Fraud in Ayushman Scheme-Doon Hospital)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) स्थित दून मेडिकल कॉलेज (Doon Medical College Hospital) में आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) के तहत इलाज में कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक आयुष्मान कार्ड धारक ने स्वयं को मरीज बताकर अपने परिचित का हृदय रोग का ऑपरेशन करवा दिया और उसके दिल में तीन स्टेंट तक डलवा दिए।
हैरानी की बात यह है कि भर्ती से लेकर ऑपरेशन तक की प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और संबंधित तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला तब उजागर हुआ जब डिस्चार्ज से पहले दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान मरीज के बेड का फोटो मांगा गया।
प्रकरण सामने आने के बाद आयुष्मान कार्ड को तत्काल ब्लॉक कर दिया गया है, जबकि संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध अभियोग दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना ने सरकारी अस्पतालों में पहचान सत्यापन और आयुष्मान योजना की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेड का फोटो मांगते ही खुल गया पूरा मामला
जानकारी के अनुसार देहरादून निवासी मंजीत ने अपने परिचित विक्की पुत्र रवि कुमार निवासी ओल्ड हस्तिनापुर, मवाना (मेरठ) का उपचार अपने आयुष्मान कार्ड पर कराने की योजना बनाई। बताया गया है कि विक्की को 26 मई को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 28 मई को उसकी हृदय संबंधी सर्जरी की गई और तीन स्टेंट डाले गए। 30 मई को उसे डिस्चार्ज किया जाना था।
इसी बीच आयुष्मान अनुभाग की ओर से अस्पताल में भर्ती मरीज का बेड साइड का फोटो मांगा गया। इसके बाद मामले में गड़बड़ी सामने आने लगी। आरोप है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने की आशंका के चलते संबंधित व्यक्ति अस्पताल से फरार हो गया और वास्तविक मरीज को भी वहां से भगा दिया गया।
डेढ़ लाख रुपये से अधिक के उपचार का मामला
प्राथमिक जानकारी के अनुसार हृदय रोग के उपचार और तीन स्टेंट लगाने में लगभग डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया, जिसका दावा आयुष्मान योजना के तहत किया जाना था। आयुष्मान सोसायटी में क्लेम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने मामले को संदिग्ध मानते हुए संबंधित कार्ड को तत्काल ब्लॉक कर दिया।
सूत्रों के अनुसार मामले को प्रारंभ में आपसी समझौते से निपटाने का प्रयास भी हुआ। बताया गया कि उपचार पर हुए खर्च की भरपाई की पेशकश की गई, लेकिन आयुष्मान अधिकारियों की सख्ती और मामला सार्वजनिक होने के बाद कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
चिकित्सालय की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण ने अस्पताल की पहचान सत्यापन व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि भर्ती के समय मरीज के दस्तावेजों का मिलान क्यों नहीं किया गया और ऑपरेशन जैसी गंभीर चिकित्सा प्रक्रिया से पहले पहचान की पुष्टि कैसे नहीं हुई।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आयुष्मान योजना में लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर सत्यापन की व्यवस्था होती है। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति दूसरे के नाम पर भर्ती होकर हृदय सर्जरी तक करवा लेता है, तो यह केवल व्यक्तिगत फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि प्रणालीगत लापरवाही का भी संकेत है।
कभी साला, कभी परिचित बताता रहा व्यक्ति
अस्पताल में पूरे घटनाक्रम के दौरान संबंधित व्यक्ति कभी मरीज को अपना साला बता रहा था तो कभी परिचित। इससे अधिकारियों का संदेह और गहरा गया। मामले में कुछ कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की आशंकाओं की भी जांच की जा रही है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस को दी गई तहरीर, जांच शुरू
करीब चार घंटे तक चले घटनाक्रम और पूछताछ के बाद दून अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एन.एस. बिष्ट की ओर से कोतवाली पुलिस को तहरीर भेजी गई। अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नितिन शर्मा ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि पहचान सत्यापन प्रक्रिया में चूक कहां हुई। साथ ही यह भी जांच होगी कि कहीं किसी कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही।
आयुष्मान योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल है। यदि इस प्रकार के फर्जीवाड़े सामने आते हैं तो वास्तविक पात्र लाभार्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
