बीमार पत्नी को कंधे पर उठाकर 7 किलोमीटर पैदल चला पति, लोक निर्माण विभाग के मंत्री के क्षेत्र का मामला, सड़क के लिए सीएम धामी से लगाई गुहार

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नवीन समाचार, पौड़ी गढ़वाल, 19 अगस्त 2026 (Husband Carried Wife 7KM on Shoulders)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के लोक निर्माण विभाग के मंत्री के क्षेत्र में आने वाले पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) के बीरोंखाल (Bironkhal) विकासखंड के दूरस्थ पल्ला कमलिया (Palla Kamaliya) गांव में सड़क सुविधा नहीं होने की वजह से एक पति को बीमार पत्नी को कंधे पर उठाकर करीब 7 किलोमीटर पैदल अस्पताल पहुंचाना पड़ा। बेबस पति ने इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) से गांव तक सड़क पहुंचाने की गुहार लगाई है।

Husband Carried Wife 7KM on Shoulders BIRONKHAL PALLA KAMALIYA VILLAGEग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से बीमारी की स्थिति में मरीज को समय पर चिकित्सालय पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है और पहले भी कई लोगों को डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक ले जाना पड़ा है।

सड़क नहीं, इसलिए बीमार पत्नी को कंधे पर लेकर निकला पति

स्थानीय निवासी से प्राप्त जानकारी के अनुसार पल्ला कमलिया गांव में बीते दिन साहिल नाम के व्यक्ति की पत्नी काजल (Kajal) की तबीयत खराब हो गई। उसे तत्काल चिकित्सालय पहुंचाने की जरूरत महसूस हुई, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण वाहन से उसे ले जाना संभव नहीं था। ऐसे में साहिल अपनी बीमार पत्नी को कंधे पर उठाकर करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित चिकित्सालय के लिए पैदल निकल पड़ा।

साहिल ने इस दौरान वीडियो बनाकर मुख्यमंत्री से गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग की। उसका कहना है कि सड़क के अभाव में गांव में पहले भी कई लोगों की समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण जान जा चुकी है। रात में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ने पर समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि मरीज को कंधे पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ता है।

तीन किलोमीटर सड़क का सर्वे पूरा, निर्माण अब भी शुरू नहीं

ग्राम प्रधान नरेंद्र कुमार (Narendra Kumar) के अनुसार गांव के लिए करीब 3 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है और इसका सर्वे भी हो चुका है। उनका कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी ग्रामीण मरीजों को डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक ले जाते रहे हैं।

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सड़क का अभाव केवल आपात स्थिति में ही परेशानी नहीं बढ़ाता, बल्कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी कठिन बना देता है। गांव के लोगों के लिए जोगिमणि (Jogimani) के पास स्थित चिकित्सालय प्राथमिक उपचार का प्रमुख सहारा है, लेकिन वहां भी स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के बावजूद सड़क नहीं होने से फिलहाल ग्रामीणों के पास यही निकटतम विकल्प है।

साहिल के पिता को भी कंधों के सहारे पहुंचाया गया था

सड़क सुविधा की समस्या साहिल के परिवार के लिए नई नहीं है। उसके 55 वर्षीय पिता बलवीर सिंह (Balveer Singh) की तबीयत खराब होने पर कुछ समय पहले उन्हें भी ग्रामीणों की मदद से कंधों के सहारे सड़क तक पहुंचाया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियां गांव में लंबे समय से सामने आती रही हैं।

साहिल शहर में नौकरी करता है और समय-समय पर अपने गांव आता-जाता रहता है। उसके अनुसार गांव में किसी व्यक्ति के रात में गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर स्थिति विशेष रूप से कठिन हो जाती है। कई बार मरीज को तत्काल चिकित्सालय पहुंचाने के बजाय ग्रामीणों को सुबह होने का इंतजार करने की मजबूरी भी सामने आती है और इस देरी से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।

लोक निर्माण विभाग के मंत्री के क्षेत्र में सड़क की मांग

उत्तराखंड क्रांति दल (Uttarakhand Kranti Dal-UKD) के नेता बलवंत गुसांई (Balwant Gusain) ने इस मामले को पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच के संकट से जोड़ते हुए सवाल उठाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र के विधायक सतपाल महाराज (Satpal Maharaj) लोक निर्माण विभाग (Public Works Department-PWD) के मंत्री भी हैं, इसके बावजूद ग्रामीण सड़क सुविधा के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं।

गुसांई के अनुसार पल्ला कमलिया की स्थिति केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सड़क सुविधा के अभाव में पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कितनी कठिन हो सकती है। हालांकि सड़क निर्माण की जिम्मेदारी और प्रक्रिया संबंधित विभागों की निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है।

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विभाग ने डीपीआर और निविदा प्रक्रिया का दिया भरोसा

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana-PMGSY) से जुड़े अधिशासी अभियंता पान सिंह बिष्ट (Pan Singh Bisht) के अनुसार सड़क का सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि सड़क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report-DPR) जल्द तैयार की जाएगी। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस बयान से ग्रामीणों को सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन उनके सामने मूल सवाल अब भी यही है कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद वास्तविक निर्माण कब शुरू होगा और गांव को सड़क सुविधा कब मिलेगी।

सड़क केवल आवागमन नहीं, आपात स्वास्थ्य सुविधा से भी जुड़ा सवाल

पर्वतीय गांवों में सड़क की उपलब्धता का सीधा संबंध केवल आवागमन या विकास से नहीं, बल्कि आपात स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच से भी है। किसी मरीज को चिकित्सालय तक पहुंचाने में यदि कई किलोमीटर पैदल चलना पड़े तो उपचार मिलने में लगने वाला समय बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

पल्ला कमलिया के ग्रामीणों की मांग इसलिए केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि लंबे समय से किए जा रहे सर्वेक्षण और प्रस्ताव के बाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया धरातल पर दिखाई दे। सड़क बनने से गांव के लोगों को चिकित्सालय तक पहुंच, दैनिक आवागमन, शिक्षा, रोजगार और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में भी सुविधा मिल सकती है।

ग्रामीणों का सवाल सीधा है कि जब सड़क निर्माण के लिए सर्वेक्षण पहले ही हो चुका है तो आगे की प्रक्रिया कब पूरी होगी। क्या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निविदा के बाद निर्माण वास्तव में समयबद्ध तरीके से शुरू होगा, या फिर ग्रामीणों को अगली आपात स्थिति में भी मरीज को कंधे पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा?

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