10 इंच का पिज्जा मंगाया, मिला 7 इंच का; 505 रुपये के पिज्जा पर 10,520 रुपये का जुर्माना

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नवीन समाचार, हरिद्वार, 21 अगस्त 2026 (Ordered 10-Inch Pizza-Got 7-Inch Fined)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार जनपद (Haridwar District) में ऑनलाइन पिज्जा (Pizza) मंगाने वाले उपभोक्ता को तय आकार से छोटा पिज्जा देना ऑनलाइन कंपनी (Online Delivery Platform) और कैफे (Cafe) को भारी पड़ गया। ज्वालापुर (Jwalapur) निवासी राजत्रेहन (Rajtraihan) की शिकायत पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) हरिद्वार ने मैसर्स बण्डल टैक्नोलॉजिस प्रा. लि. (M/s Bundl Technologies Pvt. Ltd.) और कैफे फोस्ट फैक्टरी (Cafe Fost Factory) को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने दोनों को संयुक्त रूप से 10,520 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

Ordered 10-Inch Pizza-Got 7-Inch Fined एक महिला ने 10 इंच के बजाय 8 इंच का पिज्जा मिलने पर ट्विटर पर अपनी भड़ास  निकाली, इंटरनेट पर लोगों ने इस पर खूब प्रतिक्रिया दी - NDTV Food
प्रतीकात्मक चित्र

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 10 मार्च 2020 को मोबाइल ऐप (Mobile App) के माध्यम से तपोवन (Tapovan) स्थित कैफे फोस्ट फैक्टरी से 505 रुपये में दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। ऐप पर पिज्जा का आकार 10 इंच (10 Inch) दर्शाया गया था, लेकिन डिलीवरी (Delivery) मिलने पर पिज्जा का वास्तविक आकार सात इंच (7 Inch) पाया गया। शिकायतकर्ता ने तत्काल ग्राहक सेवा (Customer Care) से संपर्क किया, लेकिन आरोप है कि समस्या स्वीकार करने के बावजूद धनवापसी (Refund) नहीं की गई।

शिकायत के बाद भी राहत नहीं मिली तो आयोग पहुंचा उपभोक्ता

उत्तराखंड: उपभोक्ता फोरम में एक साल से नहीं हो रही सुनवाई, जानिए क्या है वजहशिकायतकर्ता ने इसके बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) पर शिकायत दर्ज कराई और संबंधित पक्ष को कानूनी नोटिस (Legal Notice) भी भेजा। संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया। सुनवाई के दौरान ऑनलाइन मंच की ओर से यह तर्क दिया गया कि उसकी भूमिका केवल मध्यस्थ (Intermediary) की है और वास्तविक सेवा कैफे की ओर से दी गई थी।

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आयोग के अध्यक्ष (President) गगन कुमार गुप्ता (Gagan Kumar Gupta), सदस्य (Member) डॉ. अमरेश रावत (Dr. Amaresh Rawat) और रंजना गोयल (Ranjana Goyal) की पीठ ने ऑनलाइन मंच के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने दोनों पक्षों को उपभोक्ता सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना और शिकायतकर्ता के पक्ष में आदेश पारित किया।

505 रुपये के पिज्जा पर 10,520 रुपये की देनदारी

आयोग ने आदेश दिया कि उपभोक्ता को पिज्जा की कीमत के 505 रुपये और 15 रुपये वितरण शुल्क (Delivery Charge) की राशि लौटाई जाए। इसके अतिरिक्त मानसिक क्षतिपूर्ति (Mental Compensation) के रूप में 5,000 रुपये और वाद व्यय (Litigation Cost) के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान किया जाए।

इस तरह कुल 10,520 रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा। आदेश का निर्धारित अवधि में पालन नहीं करने पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (Annual Interest) भी देना होगा।

इस मामले की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि 505 रुपये के दो पिज्जा के ऑर्डर से शुरू हुआ उपभोक्ता विवाद आयोग के आदेश के बाद संबंधित कंपनियों पर 10,520 रुपये की देनदारी में बदल गया। इससे ऑनलाइन खरीदारी में वस्तु या सेवा का विवरण सही तरीके से देखना और डिलीवरी मिलने के बाद उसकी जांच करना उपभोक्ता के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

मामला कई मायनों में महत्वपूर्ण

यह मामला उपभोक्ता अधिकारों (Consumer Rights) के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन मंच पर किसी वस्तु का आकार, मात्रा, मूल्य या अन्य विवरण जिस रूप में प्रदर्शित किया जाता है, वह उपभोक्ता के खरीद निर्णय को प्रभावित करता है। ऐसे विवरण और वास्तविक रूप से उपलब्ध कराई गई वस्तु में अंतर होने पर उपभोक्ता के पास शिकायत और प्रतितोष (Redressal) मांगने का अधिकार रहता है।

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ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए इस मामले से यह सीख मिलती है कि ऑर्डर करने से पहले उत्पाद का विवरण ध्यान से पढ़ें, भुगतान और ऑर्डर की रसीद सुरक्षित रखें तथा वस्तु मिलने पर उसमें किसी स्पष्ट अंतर की स्थिति में ग्राहक सेवा से शिकायत करने के साथ संबंधित प्रमाण भी सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन या उपभोक्ता आयोग की सहायता ली जा सकती है।

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