उत्तराखंड से लोक सभा चुनाव लड़े दलों की रोचक कहानी: 1 ने पहले चुनाव में सभी पांचों सीटें जीतीं-पर आज कोई नामलेवा नहीं, दूसरा शून्य जीता पर आज सिरमौर..

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-अपने भारतीय लोक दल ने पहले चुनाव में पांचों जबकि जनता दल व तिवारी कांग्रेस ने 2-2 व भाजपा ने शून्य सीटें जीती थीं
डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अप्रैल 2024 (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)। देश-प्रदेश में 2009 का लोक सभा चुनाव दो गठबंधनों-एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एवं यूपीए यानी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के बीच दोनों ओर के दर्जनों दलों के बीच लड़ा गया। 2014 के चुनाव में भी हालांकि मुकाबला एनडीए व यूपीए के बीच ही था लेकिन कहा जाने लगा था कि चुनावी प्रतिस्पर्धा भाजपा यानी भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच है।

(Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)लेकिन 2014 के लोक सभा में चुनाव ऐसे स्वर दिखाई दे रहे हैं और स्वयं कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल भी भाजपा के ‘400 पार’ के नारे के साथ देश में एक दल के ही प्रभावी होने की बात कहने लगा है। इधर उत्तराखंड में भी देखें तो यहां पिछले चुनाव की दो पार्टियां समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी चुनाव मैदान में ही नहीं हैं। राज्य का प्रमुख क्षेत्रीय दल उक्रांद यानी उत्तराखंड क्रांति दल अपना चुनाव चिन्ह खो चुका है और उसके प्रत्याशी निर्दलीय तथा अलग-अलग चुनाव चिन्हों पर लड़ने को मजबूत हो गये हैं।

ऐसे में उक्रांद को बकायदा इस बात पर सार्वजनिक तौर पर दुःख व्यक्त करते हुये उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी को अपने समर्थन देने की घोषणा करनी पड़ी है। टिहरी व पौड़ी सीटों पर भी उन्होंने जिन प्रत्याशियों को अपना बताया है उन्होंने पता नहीं उक्रांद की सदस्यता ली भी है या नहीं। ऐसे में आज हम देश की आजादी के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उभरे व विलीन हुए राजनीतिक दलों की रोचक कहानी पेश करने जा रहे हैं।

इंदिरा की तानाशाही तोड़ भारतीय लोक दल ने जीती थीं पांच की पांच सीटें (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाये गये आपातकाल के बाद 1977 में हुये आम चुनाव में जय प्रकाश नारायण के आंदोलन की आंधी में उत्तराखंड में बीएलडी यानी भारतीय लोक दल एक ताकत बनकर उभरी। इस चुनाव में उत्तराखंड की टिहरी, गढ़वाल, अल्मोड़ा, नैनीताल व हरिद्वार सीट पर बीएलडी के प्रत्याशियों ने जीत भी दर्ज की। टिहरी गढ़वाल को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर बीएलडी प्रत्याशियों को 60 फीसदी से अधिक जबकि हरिद्वार सीट पर 71 फीसदी वोट मिले।

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बीएलडी से मुरली मनोहर जोशी अल्मोड़ा से चुनाव जीते जो बाद में वर्तमान भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। नैनीताल से बीएलडी के टिकट पर भारत भूषण ने तीन बार के सांसद केसी पंत को हराया। बीएलडी के टिकट पर हरिद्वार से भगवान दास, टिहरी से बीएलडी के त्रेपन सिंह नेगी और पौड़ी से जगन्नाथ शर्मा भी जीते। अगले 1980 के चुनाव में उत्तराखंड की टिहरी से बीएलडी के त्रेपन सिंह नेगी फिर जीते, लेकिन बाद में आगे यह दल चुनावी दलदल में विलीन हो गया।

पहले चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई थी भाजपा (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

1980 में जनसंघ से भाजपा का नया अवतार 1984 हुआ। में भाजपा ने उत्तराखंड की सभी सीटों से प्रत्याशी उतारे, लेकिन सभी सीटों पर उसके प्रत्याशी बुरी तरह से हारे। टिहरी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी चौथे, नैनीताल में तीसरे और गढ़वाल में तीसरे स्थान पर रहे। अल्मोड़ा में भाजपा के मुरली मनोहर जोशी को कांग्रेस के नये चेहरे हरीश रावत ने हरा दिया।

जनता दल ने पहले चुनाव में 2 सीटें जीतीं (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

1988 में जनता पार्टी में शामिल दलों ने जनता दल का गठन भी किया व 1989 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी भी उतारे। गढ़वाल सीट से चंद्रमोहन सिंह नेगी और नैनीताल सीट से डॉ.महेंद्र सिंह पाल जनता दल के टिकट पर जीते। लेकिन अगले चुनाव से यह दल चुनावी परिदृश्य से गायब हो गया। डॉ. पाल कांग्रेस में शामिल हुए और नैनीताल से उपचुनाव जीतकर दूसरी बार संसद पहुंचे।

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1991 में भाजपा ने पांचों सीटें जीतकर दिये अपनी भविष्य की राजनीति के संकेत (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

1980 के अपने पहले चुनाव में शून्य पर रही पर अपने अनुभवों से सीखती और लगातार मेहनत करती हुई भाजपा ने 1991 के लोकसभा चुनाव में पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर अपने भविष्य के इरादों का संकेत दिया। (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

तिवारी कांग्रेस भी पहले चुनाव में दो सीटें जीती (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

इस बीच कांग्रेस के बुरे हो चुके दौर में उत्तराखंड से आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी ने मध्य प्रदेश के अर्जुन सिंह के साथ मिलकर 1996 के लोस चुनाव के दौरान कांग्रेस से अलग अखिल भारतीय कांग्रेस (तिवारी) नाम की नयी पार्टी बना ली। इस पार्टी को इस चुनाव में गढ़वाल से सतपाल महाराज व नैनीताल से स्वयं एनडी तिवारी के साथ देश में कुल 3 सीटें मिलीं। चुनाव बाद तिवारी कांग्रेस का कांग्रेस पार्टी में ही विलय हो गया। (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

उत्तराखंड बनने के बाद भाजपा-कांग्रेस में सिमटी लड़ाई (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

उत्तराखंड बनने के बाद 2004 में हुये पहले लोस चुनाव में भाजपा ने 5 में से 3 सीटें जीतीं। हरिद्वार सीट से सपा और नैनीताल से कांग्रेस प्रत्याशी जीते। लेकिन 2009 में भाजपा पांचों सीटें हार गयी। लेकिन 2014 और 2019 के लगातार दो चुनाव में भाजपा ने पांचों सीटें जीतकर अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत का अहसास भी कराया। (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

अलबत्ता उत्तराखंड में दलों के इस राजनीति इतिहास के बीच प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय जनसंघ, जेएनपी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी), स्वतंत्र पार्टी (एसडब्ल्यूए), बीजेएस, एनसीपी, एनसीओ, पीएसपी, उत्तराखंड क्रांति दल, बहुजन समाज पार्टी व आम आदमी पार्टी सहित अनेकों दलों ने भी अपने प्रत्याशी लोक सभा चुनाव में उतारे, लेकिन वे जीत दर्ज नहीं कर पाये। इस चुनाव में भी नैनीताल से ‘भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी’ सहित कई अनाम पंजीकृत दल चुनाव मैदान में हैं और इस कड़ी में अपना नाम लिखा रहे हैं। (Story of Parties Contested UK Lok Sabha election)

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