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उच्च न्यायालय परिसर में कल राष्ट्रीय लोक अदालत, हाई कोर्ट में 230 से अधिक गुड़ और कोल्हू इकाइयों के मामले, प्रधानाचार्य के निलंबन, सहायक अध्यापक का रिक्त पद पुनर्जीवित करने व शिक्षकों के स्थानांतरण में दिव्यांगता और पहाड़-मैदान के आधार मामलों में सुनवाई-निर्देश

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उच्च न्यायालय परिसर में कल राष्ट्रीय लोक अदालत, वर्चुअल रूप से भी शामिल हो सकेंगे वादकारक

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 सितंबर 2026 (Nainital High Court News 11 Sept 2026)। नैनीताल में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) परिसर में शनिवार 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) आयोजित होगी, जिसमें आपसी समझौते और सुलह के माध्यम से विभिन्न लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा। लोक अदालत में दीवानी तथा शमनीय फौजदारी मामलों सहित चेक बाउंस, बैंक ऋण, पारिवारिक विवाद और मोटर दुर्घटना जैसे मामलों को लिया जाएगा। इसकी खास सुविधा यह है कि शारीरिक रूप से उपस्थित होने में असमर्थ वादकारक और अधिवक्ता उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से वर्चुअल रूप से भी कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे।

Nainital High Court News 11 Sept 2026समिति की सचिव नेहा कुशवाहा के अनुसार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority) के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस लोक अदालत का उद्देश्य विवादों का आपसी सहमति से त्वरित और अंतिम निस्तारण करना है। लोक अदालत में शमनीय आपराधिक मामलों के साथ परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस के मामले, बैंक ऋण एवं वित्तीय विवाद, श्रम एवं रोजगार संबंधी मामले और बिजली-पानी के अवशेष से जुड़े मामले सुने जा सकेंगे।

समझौते से समय और धन की बचत

लोक अदालत में पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, भूमि अधिग्रहण एवं प्रतिकर, किराया, निषेधाज्ञा तथा मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से जुड़े मामलों का भी निस्तारण किया जा सकेगा। इसके अलावा ऐसे अन्य दीवानी मामले भी लिये जा सकेंगे जिनमें आपसी समझौता संभव हो। समिति के अनुसार लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से होने वाला निस्तारण अंतिम होता है, जिससे लंबे न्यायिक विवाद से समय और धन की बचत होती है। समझौते के बाद न्यायालय शुल्क की वापसी का भी प्रावधान है।

जो वादकारक या अधिवक्ता न्यायालय परिसर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, वे वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं। समिति ने संबंधित वादकारकों और अधिवक्ताओं से अपने मामलों को आगामी लोक अदालत में निस्तारण के लिए संबंधित पीठ के समक्ष समय से सूचीबद्ध कराने की अपील की है। ऐसे में समझौते योग्य लंबित विवादों के शीघ्र निस्तारण का यह अवसर संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

230 से अधिक गुड़ और कोल्हू इकाइयों के मामले में सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी

नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने हरिद्वार जिले के झबरेरा नगर पंचायत (Jhabrera Nagar Panchayat) सहित अन्य क्षेत्रों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board) की अनुमति के बिना संचालित बतायी जा रही लगभग 230 से अधिक गुड़ एवं कोल्हू इकाइयों के मामले में राज्य सरकार, राज्य प्रदूषण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। न्यायालय ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अब तक की गयी कार्रवाई और समाधान के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि हरिद्वार के झबरेरा नगर पंचायत सहित जिले के अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में गुड़ एवं कोल्हू इकाइयां राज्य प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के बिना संचालित हो रही हैं और इनके संचालन में प्लास्टिक, रबर तथा पुराने टायर जैसी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

चार सप्ताह में कार्रवाई का ब्यौरा देना होगा

सुनवाई के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित राज्य प्रदूषण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से पूछा कि इन इकाइयों से संबंधित समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गयी है। न्यायालय ने संबंधित रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है।

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मामला पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा होने के कारण आगे की न्यायिक कार्रवाई संबंधित विभागों की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। न्यायालय के निर्देश के बाद अब संबंधित विभागों को यह बताना होगा कि बिना अनुमति संचालित बतायी जा रही इकाइयों और उनके संचालन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के संबंध में क्या कदम उठाये गये हैं।

हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य सत्यपाल सिंह के निलंबन आदेश पर लगायी रोक

नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने हरिद्वार जिले के एक शासकीय सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सत्यपाल सिंह (Satyapal Singh) के निलंबन आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई के दौरान निलंबन से पहले आवश्यक अनुमति लिये जाने के प्रश्न को भी रिकॉर्ड पर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गयी कि उनके विरुद्ध लगाये गये आरोप मामूली प्रकृति के हैं और निलंबन से पहले मुख्य शिक्षा अधिकारी (Chief Education Officer) की अनिवार्य अनुमति भी नहीं ली गयी थी। इसी आधार पर निलंबन आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया।

प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के निर्देश

खंडपीठ ने एक अप्रैल 2016 को प्रबंधक की ओर से जारी निलंबन आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। न्यायालय ने प्रतिवादी संख्या छह को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया है। अन्य प्रतिवादियों को भी अगली सुनवाई से पहले प्रतिशपथपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गयी है।

अब मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी। उस समय न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्षों के जवाब और अभिलेख रखे जा सकेंगे। निलंबन आदेश पर लगायी गयी रोक फिलहाल अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।

खटीमा के विद्यालय में सहायक अध्यापक का रिक्त पद पुनर्जीवित करने पर चार सप्ताह में निर्णय का आदेश

नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने ऊधम सिंह नगर जिले के श्रीपुर बिछवा, खटीमा (Shripur Bichhwa, Khatima) स्थित श्राणा थारू किशन पूर्व माध्यमिक विद्यालय (Shrana Tharu Kishan Purva Madhyamik Vidyalaya) में सहायक अध्यापक हिंदी एवं संस्कृत के रिक्त पद को पुनर्जीवित करने के मामले में अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने पहले जिला शिक्षा अधिकारी को प्रबंधन समिति का आवेदन प्रारंभिक शिक्षा निदेशक तक पहुंचाने और इसके बाद निदेशक को पद पुनर्जीवित करने के संबंध में निर्णय लेने को कहा है।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा, ऊधम सिंह नगर को निर्देश दिया कि प्रबंधन समिति की ओर से 18 जून 2026 को दिये गये आवेदन को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को प्रेषित करें।

निदेशक को चार सप्ताह में उचित निर्णय लेना होगा

न्यायालय के निर्देश के अनुसार आवेदन प्रारंभिक शिक्षा निदेशक तक पहुंचने के बाद निदेशक को चार सप्ताह के भीतर रिक्त पद को पुनर्जीवित करने के संबंध में उचित निर्णय लेना होगा। इस आदेश से विद्यालय में सहायक अध्यापक हिंदी एवं संस्कृत के रिक्त पद से जुड़े मामले में विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया के लिए समयसीमा निर्धारित हो गयी है।

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न्यायालय ने इन अधिकारियों को उनके स्तर पर लंबित प्रक्रिया को निर्धारित अवधि में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब प्रबंधन समिति के आवेदन को पहले जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा निदेशक तक भेजा जाएगा और उसके बाद पद पुनर्जीवित करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

शिक्षकों के स्थानांतरण में दिव्यांगता प्रमाणपत्र और पहाड़-मैदान के मानकों पर हाईकोर्ट ने मांगे दस्तावेज

नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग से स्थानांतरण के आधार बने दिव्यांगता प्रमाणपत्रों और पहाड़ी तथा मैदानी क्षेत्रों के वर्गीकरण के मानकों की जानकारी मांगी है। न्यायालय ने कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अपर निदेशकों सहित संबंधित शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने अल्मोड़ा जिले के सल्ट निवासी जीवन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को पर्वतीय क्षेत्रों में तथा मैदानी क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को मैदानी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नीति के अनुसार की गयी है।

पहाड़ और मैदान की पहचान का आधार बना न्यायालय का प्रश्न

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह प्रश्न उठाया गया कि किसी स्थान को पहाड़ी अथवा मैदानी मानने का स्पष्ट आधार क्या है। इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार से स्थानांतरण प्रक्रिया में अपनाये गये वर्गीकरण के मानदंड बताने को कहा। इससे स्थानांतरण नीति में पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र के निर्धारण के आधार का प्रश्न महत्वपूर्ण हो गया है।

न्यायालय ने विद्यालयी शिक्षा विभाग के निदेशक तथा कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अपर निदेशकों को उन शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं जिनके स्थानांतरण अनुरोध इन प्रमाणपत्रों के आधार पर स्वीकार किये गये। अब संबंधित अधिकारियों को न्यायालय के समक्ष स्थानांतरण के आधार, क्षेत्रीय वर्गीकरण और दिव्यांगता प्रमाणपत्रों से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। आगे की न्यायिक प्रक्रिया इन दस्तावेजों और विभागीय पक्ष के आधार पर आगे बढ़ेगी।

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