नवीन समाचार, बागेश्वर, 19 सितंबर 2026 (Police Complaint Against Pawan Khera)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में प्रस्तावित 1,320 मेगावाट (MW) कोयला आधारित बिजली खरीद (Coal-Based Power Procurement) के टेंडर को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने टेंडर की शर्तों में बदलाव कर किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था।
इसके बाद पूर्व में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष एवं दर्जाधारी राज्य मंत्री भूपेश उपाध्याय (Bhupesh Upadhyay) ने बागेश्वर (Bageshwar) थाने में लिखित शिकायत देकर पवन खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि पवन खेड़ा ने गत 17 सितंबर को आरोप लगाया था कि 1,320 मेगावाट बिजली खरीद के टेंडर में 84 बदलाव किए गए, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अडानी पावर (Adani Power) को लाभ पहुंचाने का रास्ता बना। उन्होंने 25 वर्ष की प्रस्तावित बिजली खरीद व्यवस्था से राज्य के उपभोक्ताओं पर लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारी आने का दावा भी किया था। ये कांग्रेस के आरोप हैं, जिनका सरकार ने खंडन किया है।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए
भूपेश उपाध्याय की शिकायत में पवन खेड़ा के बयानों को तथ्यहीन बताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि बिजली खरीद की प्रक्रिया उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (Uttarakhand Electricity Regulatory Commission-UERC) की स्वीकृति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चल रही है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम (R. Meenakshi Sundaram) ने भी 17 सितंबर को बिजली खरीद प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि 1,320 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding) और यूईआरसी की मंजूरी के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार के अनुसार केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने वर्ष 2019 में मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट (Model Bidding Document) जारी किया था। अलग-अलग परियोजनाओं की तकनीक, स्थान, ईंधन की उपलब्धता और परिवहन लागत सहित परिस्थितियों के आधार पर इसमें बदलावों की समीक्षा की जा सकती है। सरकार के अनुसार बोलीदाताओं से मिले सुझावों और आपत्तियों की तकनीकी एवं व्यावहारिक दृष्टि से समीक्षा के बाद प्रस्तावित बदलाव यूईआरसी के समक्ष रखे गए और आयोग ने उन पर विचार के बाद स्वीकृति दी।
यूईआरसी के आधिकारिक अभिलेखों में भी मई 2025 में 1,320 मेगावाट आरटीसी (RTC) कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालीन खरीद के लिए जारी आरएफक्यू (RFQ) की कुछ शर्तों में विचलन, संशोधन अथवा स्पष्टीकरण के संबंध में आवेदन दर्ज होने की जानकारी उपलब्ध है।
पवन खेड़ा ने लगाए थे 84 बदलाव के आरोप
पवन खेड़ा ने अपने बयान में आरोप लगाया था कि टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए और इससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। उन्होंने इसे अडानी पावर को लाभ पहुंचाने से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे।
वहीं सरकार का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालीन और बढ़ती बिजली आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से की जा रही है। सरकार ने आरोपों को तथ्यों पर आधारित नहीं बताया है।
कौन हैं भूपेश उपाध्याय
- भूपेश पहले कांग्रेस में थे और दर्जा राज्य मंत्री रहे।
- मई 2015 में उन्होंने पहली बार कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण की थी।
- 2017 के चुनाव के आस-पास वह बसपा (BSP) में गए और कपकोट से बसपा (BSP) के आधिकारिक टिकट पर चुनाव लड़ा। लेकिन चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
- अगस्त 2021 में उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन थामा।
- इसके बाद वे पुनः भाजपा में लौट आए और वर्तमान में उत्तराखंड सरकार में जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री) की भूमिका निभा रहे हैं।
असम मामले का भी शिकायत में उल्लेख
भूपेश उपाध्याय ने शिकायत में पवन खेड़ा से जुड़े वर्ष 2026 के असम (Assam) मामले का भी उल्लेख किया है। अप्रैल 2026 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा (Riniki Bhuyan Sarma) की शिकायत पर पवन खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसमें दस्तावेजों की कथित जालसाजी, मानहानि और आपराधिक षड्यंत्र सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं।
इस मामले में खेड़ा की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर शिकायतकर्ता ने उन्हें फर्जी बताया था। बाद में मामला न्यायालय तक पहुंचा और सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल 2026 में खेड़ा को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दी थी।
बागेश्वर में दी गई नई शिकायत में भूपेश उपाध्याय ने इसी मामले का हवाला देते हुए पवन खेड़ा के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल बागेश्वर पुलिस के समक्ष दी गई शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और आगे की कानूनी कार्रवाई के संबंध में पुलिस का निर्णय सामने आना बाकी है। वहीं 1,320 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोप और सरकार का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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