उत्तराखंड एसआईआर में एक व्यक्ति पर 6000 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्ति लगाने का आरोप, हाईकोर्ट में सुनवाई, याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ली, याचिका निस्तारित

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नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2026 (High Court-Uttarakhand SIR Allegation)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान मतदाता सूची (Voter List) से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) में सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी शादाब आलम ने आरोप लगाया था कि एक ही व्यक्ति ने प्रपत्र-7 (Form-7) के माध्यम से लगभग छह हजार मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दाखिल की हैं।

High Court-Uttarakhand SIR Allegation, Nainital Activities News 17 June 2026सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा एसआईआर से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में लंबित होने की बात स्पष्ट किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ (Division Bench) में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्षों से क्षेत्र में रह रहे मूल निवासियों के नाम भी मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं, जबकि कई फर्जी या बाहरी लोगों के नाम सूची में शामिल होने का आरोप है।

एक व्यक्ति द्वारा करीब छह हजार आपत्तियां दाखिल करने का आरोप

हल्द्वानी निवासी शादाब आलम ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि एक ही व्यक्ति द्वारा प्रपत्र-7 के माध्यम से करीब छह हजार मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दाखिल की गई हैं।

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याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही गलत आपत्तियां दाखिल करने वालों और कथित रूप से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।

मूल निवासियों के नाम गायब होने का दावा

याचिका में कहा गया था कि वर्षों से क्षेत्र में रह रहे मूल निवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जबकि कई फर्जी या बाहरी लोगों के नाम सूची में बने हुए हैं। याचिकाकर्ता ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

हालांकि मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से संबंधित विषय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है। अदालत के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही इस विषय पर आगे की कार्रवाई संभव हो सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फिर हाईकोर्ट आने की स्वतंत्रता

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने का निर्णय लिया। साथ ही उसने यह स्वतंत्रता मांगी कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद आवश्यकता होने पर वह दोबारा हाईकोर्ट का रुख कर सके।

अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और मामले का निस्तारण कर दिया। इस तरह फिलहाल हाईकोर्ट में इस याचिका पर कार्यवाही समाप्त हो गई है, जबकि एसआईआर से संबंधित व्यापक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

एसआईआर के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े, 90 फीसदी से अधिक आपत्तियां मैदानी जिलों से, एक व्यक्ति ने की हैं 10 प्रतिशत आपत्तियाँ

नैनीताल। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूचियों को लेकर सामने आए आंकड़ों में मैदानी और पर्वतीय जिलों के बीच आपत्तियों का बड़ा अंतर सामने आया है। प्रदेश में फॉर्म-10 के माध्यम से कुल 59,604 वास्तविक आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें 90 प्रतिशत से अधिक आपत्तियां मैदानी जिलों से संबंधित हैं।

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निर्वाचन आयोग की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक 40,906 आपत्तियां ऐसे मतदाताओं से संबंधित हैं, जो सत्यापन के दौरान अपने घर पर नहीं मिले अथवा स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं। यह संख्या कुल आपत्तियों का लगभग 69 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त 2,575 मतदाताओं के स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित होने की अलग से शिकायतें दर्ज की गई हैं।

एसआईआर के आंकड़ों में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला तथ्य यह है कि एक व्यक्ति ने अकेले 5,906 आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के अनुसार राजेश तिवारी की ओर से दाखिल की गई ये सभी आपत्तियां किच्छा विधानसभा क्षेत्र से संबंधित हैं। इस तरह प्रदेश में दर्ज कुल 59,604 वास्तविक आपत्तियों में लगभग दस प्रतिशत आपत्तियां अकेले एक व्यक्ति के नाम से दर्ज हुई हैं।

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