नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2026 (HC Hard on Jyolikot-11 Samples Fail)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) के नैनीताल (NAINITAL) जनपद के ज्योलीकोट (Jyolikot) और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से तीन लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के बीमार होने के मामले में नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने जिला प्रशासन और जल संस्थान के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है, और अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए जांच के लिए गठित कमेटी में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttarakhand Pollution Control Board) के अधिकारियों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने मुख्य सचिव आनंद वर्धन को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट एक हफ्ते के अंदर दाखिल करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में स्थिति सामान्य और पेयजल आपूर्ति ठीक बताए जाने के विपरीत जांच में 15 में से 11 पानी के नमूने दूषित पाए गए। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव आनंद वर्धन को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संस्थान की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट में ज्योलीकोट क्षेत्र में स्थिति सामान्य तथा पेयजल आपूर्ति ठीक बताई गई थी। इसके बाद जब वास्तविक जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष रखी गई तो स्थिति इसके विपरीत मिली। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लिए गए 10 नमूनों में सात नमूने जांच में विफल पाए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिए गए पांच में से चार नमूने दूषित और उपयोग के लिए अयोग्य मिले।
दूषित पानी से 200 से अधिक लोग बीमार, तीन मौतें
दूषित पानी पीने के बाद ज्योलीकोट में 200 से अधिक लोगों के पेट दर्द, उल्टी और संक्रमण की शिकायत से बीमार हुए गंभीर मरीजों को नैनीताल, हल्द्वानी, बरेली और दिल्ली के अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार 50 से अधिक मरीजों का उपचार विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
ज्योलीकोट के अतिरिक्त चोपड़ा और खुर्पाताल में भी पेयजल की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मरीजों की चिकित्सकीय जांच में लिवर एंजाइम सामान्य स्तर से 100 से 380 गुना तक बढ़े पाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
दूषित पानी से तीन लोगों की मौत का भी मामला सामने आया है। इनमें ज्योलीकोट ज्योलीकोट क्षेत्र की स्थानीय महिला अनीता की संक्रमण की शुरुआत में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में मौत हो गई थी, जबकि इसके बाद दो छोटे बच्चों की मां 26 वर्षीय नीमा जोशी की पीलिया और लीवर में गंभीर संक्रमण के कारण बरेली के अस्पताल में मौत हुई। वहीं सड़ियाताल के गाजा गांव निवासी 16 वर्षीय रितेश की टायफाइड और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में मौत होने की जानकारी दी गई है।
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के पानी के पेयजल लाइन में रिसने का आरोप
जानकारी के अनुसार दुर्गापुर पेयजल संयंत्र के ठीक ऊपर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है। आरोप है कि यहां से लंबे समय से सीवर का पानी पेयजल लाइन में रिस रहा था। ग्रामीणों की ओर से 20 जून से ही पानी में झाग और बदबू के साथ उल्टी-दस्त की शिकायतें गईं। लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने अनशन शुरू किया। इसके बाद 27 अगस्त को दूषित पेयजल लाइन को काटे जाने की जानकारी दी गई है। मामले में मुख्य जल स्रोत को भी सील किया गया है।
हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अधिकारियों से पूछा कि दूषित पेयजल की समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों की ओर से इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाने पर न्यायालय ने नाराजगी जताई।
न्यायालय ने मामले की जांच के लिए गठित समिति में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनंद वर्धन को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में दाखिल करने को कहा गया है।
जल संस्थान के वरिष्ठ रसायनज्ञ ने विभागीय दबाव और ज्योलीकोट प्रकरण से व्यथित होने की बात कहते हुए इस्तीफा दे दिया
इधर, नैनीताल जल संस्थान की प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ योगेंद्र पाल ने विभागीय दबाव और ज्योलीकोट प्रकरण से व्यथित होने की बात कहते हुए इस्तीफा दे दिया। उनके स्थान पर विभाग ने रानीखेत से नए रसायनज्ञ की तैनाती की है।
पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर लगाए, स्कूलों में अवकाश
ज्योलीकोट के करीब 15 वर्ष पुराने जल संग्रह एवं वितरण टैंक में क्लोरीनेटर लगाए जाने की जानकारी है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हल्द्वानी से दो टैंकर लगाए गए हैं। इनमें से एक टैंकर दिन में दो से तीन चक्कर लगाकर पानी पहुंचा रहा है। स्थिति गंभीर होने के बाद जिलाधिकारी की ओर से प्रभावित क्षेत्रों के विद्यालयों में सात दिन का अवकाश घोषित किया गया था। साथ ही पानी के स्रोतों के क्लोरीनेशन और स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए गए थे।
मामले में अब हाईकोर्ट की निगरानी के बीच जांच समिति की कार्रवाई और मुख्य सचिव की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इससे दूषित पेयजल की वजह, जिम्मेदारी और अब तक की प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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