नवीन समाचार, देहरादून, 30 सितंबर 2026 (Electric Current Useful to Quit Alcohol)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के देहरादून (Dehradun) में शराब की निर्भरता से जूझ रहे मरीजों में तलब (Craving) कम करने को लेकर एक महत्वपूर्ण शोध सामने आया है।
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) और श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (SGRRIM&HS) से जुड़े मनोरोग विशेषज्ञों के शोध में मस्तिष्क के विशेष हिस्से पर हल्का विद्युत प्रवाह देने वाली ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) तकनीक से शराब छोड़ने के दौरान होने वाली तलब में उल्लेखनीय कमी पाई गई है। प्रकाशित शोधअध्ययन में सक्रिय tDCS पाने वाले समूह में तलब के माप में कमी नकली उपचार पाने वाले समूह की तुलना में लगभग दोगुनी यानी अधिक प्रभावशाली पाई गई है।
यह शोध Primary Care Companion for CNS Disorders के 2026 के अंक में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के निष्कर्षों में tDCS को शराब निर्भरता के उपचार में एक संभावित सहायक उपचार बताया गया है और बड़े स्तर पर आगे के शोध की आवश्यकता भी बताई गई है।
पांच दिन में 10 सत्र, मस्तिष्क के विशेष हिस्से पर दिया गया विद्युत प्रवाह
शोध में खोपड़ी पर इलेक्ट्रोड लगाकर मस्तिष्क के दोनों ओर स्थित डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Dorsolateral Prefrontal Cortex-DLPFC) को लक्षित किया गया। सक्रिय उपचार समूह को 2 मिलीएम्पियर (mA) का विद्युत प्रवाह प्रत्येक सत्र में 20 मिनट के लिए दिया गया। यह प्रक्रिया पांच दिनों में कुल 10 सत्रों में की गई।
शोध में सक्रिय tDCS समूह में शराब की तलब के Penn Alcohol Craving Scale (PACS) स्कोर में औसतन 14.17 अंक की कमी दर्ज की गई। वहीं नकली उपचार वाले समूह में कमी 7.08 अंक रही। यानी सक्रिय उपचार समूह में कमी लगभग दोगुनी रही और दोनों समूहों के बीच अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था।
48 मरीजों पर किया गया नियंत्रित परीक्षण
अध्ययन में 50 पुरुष मरीजों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें शराब निर्भरता सिंड्रोम (Alcohol Dependence Syndrome) का निदान था। इनमें से 48 मरीजों ने अध्ययन पूरा किया और उन्हीं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। मरीजों की औसत आयु 38.5 वर्ष थी। उन्हें सक्रिय tDCS और नकली उपचार वाले दो समूहों में बांटा गया।
यह अध्ययन देहरादून के एक तृतीयक स्तर के मनोरोग केंद्र में किया गया। इसमें उपचार शराब छोड़ने के दौरान होने वाले सक्रिय विथड्रॉल (Withdrawal) चरण में शुरू किया गया था।
दवा के साथ सहायक उपचार के रूप में संभावना
शोधकर्ताओं के निष्कर्ष के अनुसार, शुरुआती उपचार अवधि में जब शराब छोड़ने के बाद तलब अधिक परेशान कर सकती है, तब tDCS को मौजूदा उपचार के साथ सहायक उपचार के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना है। अध्ययन ने इसे अपेक्षाकृत कम लागत वाली और अच्छी तरह सहन की जाने वाली तकनीक के रूप में वर्णित किया है।
हालांकि, इसे शराब की लत का अकेला या निश्चित उपचार मानना अभी उचित नहीं होगा। प्रकाशित शोध स्वयं इसे आगे बड़े और निर्णायक परीक्षणों में जांचे जाने योग्य उपचार बताता है। इसलिए मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के बिना इस तकनीक के लिए उपचार शुरू नहीं करना चाहिए।
एचआईएमएस और एसजीआरआर से जुड़े विशेषज्ञों का शोध
शोध में देहरादून से जुड़े मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ट्विंकल शर्मा, डॉ. प्रियरंजन अविनाश, डॉ. रॉबिन विक्टर, डॉ. प्रवीण रिखाड़ी और डॉ. शोभित गर्ग शामिल रहे। अध्ययन का शीर्षक है—“Bilateral Transcranial Direct-Current Stimulation Over the Dorsolateral Prefrontal Cortex Significantly Reduces Relief Craving During Alcohol Withdrawal”।
शोध का पंजीकरण ISRCTN88255964 के रूप में किया गया था। अध्ययन में तलब और शराब निर्भरता की गंभीरता को मानकीकृत मापदंडों के माध्यम से आंका गया।
कैसे काम कर सकती है यह तकनीक?
tDCS में मस्तिष्क के लक्षित हिस्से पर खोपड़ी के बाहर से बहुत कम तीव्रता का प्रत्यक्ष विद्युत प्रवाह दिया जाता है। इस अध्ययन में दोनों ओर के DLPFC को लक्षित किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सक्रिय tDCS से शराब छोड़ने के दौरान होने वाली विशेष प्रकार की तलब में नकली उपचार की तुलना में अधिक कमी आई।
इस शोध की खास बात यह है कि प्रभाव मरीजों में निर्भरता की गंभीरता के अलग-अलग स्तरों पर भी देखा गया। हालांकि अध्ययन का आकार छोटा था और सभी प्रतिभागी पुरुष थे, इसलिए इसके निष्कर्षों को व्यापक आबादी पर लागू करने से पहले बड़े अध्ययनों की आवश्यकता रहेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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