नैनीताल में आरोप-पत्र दाखिल करने में देरी पर गंभीर सवाल, कई आरोपितों को मिली वैधानिक जमानत; हाई कोर्ट ने भी एफएसएल रिपोर्ट समय पर देने को कहा

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 सितंबर 2026 (Questions Over Delay in Charge Sheet)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद में गंभीर आपराधिक मामलों में निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने 5 सितंबर को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को पत्र भेजकर इस पर चिंता जताई, जबकि नैनीताल में विशेष न्यायालयों द्वारा दिए गए हालिया आदेशों में भी आरोप-पत्र समय पर दाखिल न होने के आधार पर आरोपितों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(3) के तहत वैधानिक जमानत दिए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।

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by Husband for Dowry)। (High Court Suspended Sentence of Minor Convicted) (Husband Sentenced 20 Years in prison got Relief (Accused Allegedly Said-I will Come and Rape You) (High Courts Important Decision on Eligibility) (Nainital-Neighbor Attack-Bail Rejected in other (Accused in 2022 Khatima Murder Case Granted Bail) (Uttarakhand High Court Orders Removal Ramnagar) (Accused Acquitted-Kumaon level Lawyer Conference (Arrest Banned in Firing case during Betalghat) (Court Asked DM Nainital toTake Action on Patwari) (4th Bail Plea of ​​Murderous Attack Rejected)। Courts Order-Road accident accused Acquitted (Advocate Sanjay Suyal acquitted of Charges (High Court Order-DGP-Home Secretar Detail Report) (Nainital-Accused of Casteist abuse-Acquitted) (High Court Sought Record of Results-Achievments) (Accused in Banbhoolpura Incident Acquitted (Nainital District Panchayat-Hearing-High Court) Hearing on Petition Related to PanchayatElection (UDN-Judicial Intervention in Reservation Dispute) (High Court-Reservation-Jila Panchayat Adhyaksh Nainital-Accused Acquitted in Electricity Theft Accused Acquitted in Gas Cylinder BlackMarketing (Bail Cancelled-Orders to Send Jail Obscene Photos) Attempt to Murder Husband with Help of Lover (Minor Girl Falsely Accused Stepfather For Rape (court-orders-fir-against-cow-squad-for-youths-my (Court Orders FIR Against Cow Squad for Youths My (Order to register murder charges against 6people (Big Dicision of Court in Fake CBI Officer Case (Woman Burnt Husband-Bail Cancelled-Sent to Jail) (HighCourt Did not Grant Bail to Rana for Bribery) (Illicit Relations-Husband-Father-in-law Murdered) (Relief to Son of Accused of Raping Minor by HC) (Accused of 12-year Girl Rape Usman Ali Bail Plea) (Son of Rape Accused did not get Relief by Court) (BJP Leader Mukesh Bora ke viruddh NBW jaariइसी बीच उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने 24 सितंबर 2026 को एक मामले की सुनवाई में आरोप-पत्र दाखिल करने की समयसीमा और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट में देरी को गंभीरता से लिया । इस पर राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि प्रदेशभर में 150 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की ‘इन्वेस्टिगेशन सेल’ गठित की गई है तथा दुष्कर्म, पॉक्सो (POCSO), एनडीपीएस (NDPS) सहित गंभीर मामलों में एफएसएल रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था की गई है।

जिला शासकीय अधिवक्ता ने एसएसपी को क्यों लिखा पत्र?

5 सितंबर 2026 के पत्र में जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी), नैनीताल ने कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किए जाने के बाद निर्धारित समय में आरोप-पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति सामने आ रही है। पत्र के साथ ऐसे कई मामलों की सूची भी दी गई है, जिनमें आरोपितों को जमानत मिली। सूची में मुखानी, वनभूलपुरा, भवाली, भीमताल, हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर और काठगोदाम थानों से जुड़े मामले शामिल हैं।

पत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के गंभीर मामलों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े मामलों में भी आरोप-पत्र दाखिल करने में देरी का उल्लेख किया गया है। जिला शासकीय अधिवक्ता ने संबंधित विवेचनाधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया, ताकि आरोपितों को प्रक्रिया संबंधी कमी का लाभ न मिले और पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके।

986 ग्राम चरस बरामदगी के मामले में भी मिली डिफॉल्ट जमानत

इस पूरे मामले का एक स्पष्ट उदाहरण हल्द्वानी थाने से जुड़े एनडीपीएस मामले में सामने आया है। साबिर हुसैन के विरुद्ध धारा 8/20 एनडीपीएस अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज था। न्यायालय के आदेश के अनुसार, उसे 21 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 22 जुलाई को प्रथम रिमांड स्वीकृत हुआ था। उसके कब्जे से 986 ग्राम चरस बरामद होने के आधार पर गिरफ्तारी की गई थी।

21 सितंबर 2026 तक आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल नहीं हुआ था। अभियोजन पक्ष ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया। न्यायालय ने माना कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी आरोप-पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, इसलिए आरोपित धारा 187(3) बीएनएसएस के तहत डिफॉल्ट जमानत पाने का अधिकारी है। न्यायालय ने उसका जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत देने का आदेश दिया।

रामनगर के गंभीर मामले में 90 दिन बीतने के बाद मिली जमानत

एक अन्य मामले में रामनगर थाने में प्राथमिकी संख्या 160/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 103(1), 115(2), 140(3), 352 तथा एससी-एसटी अधिनियम की संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज था। इसमें विशाल सैनी और होशियार सिंह भंडारी न्यायिक अभिरक्षा में थे।

दोनों आरोपितों की ओर से कहा गया कि 23 मई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने के बाद निर्धारित 90 दिन की अवधि बीतने के बावजूद अंतिम रिपोर्ट/आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। अभियोजन की ओर से भी यह तथ्य स्वीकार किया गया। हालांकि विवेचक के अनुरोध पर आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिए जाने की जानकारी न्यायालय के समक्ष रखी गई थी।

न्यायालय ने माना कि 90 दिन की निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी थी और आरोप-पत्र दाखिल नहीं हुआ था। इसके आधार पर दोनों की डिफॉल्ट जमानत स्वीकार की गई। न्यायालय ने प्रत्येक आरोपित से 40-40 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो-दो जमानती प्रस्तुत करने की शर्त रखी। साथ ही विवेचक द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित रहने तथा साक्ष्य से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त भी लगाई गई।

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न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश अभियोजन की प्रक्रियागत कमी के आधार पर दिया गया है और इससे मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है।

हाई कोर्ट ने एफएसएल रिपोर्ट में देरी पर जताई गंभीर चिंता

इसी विषय से जुड़े व्यापक स्तर के मामले में 24 सितंबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में आनंद प्रकाश धवन एवं अन्य बनाम उत्तराखंड राज्य मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की अदालत को राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें बताया गया कि प्रदेशभर में 150 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की इन्वेस्टिगेशन सेल गठित कर तैनात की गई है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में उच्चतम न्यायालय के जोगिंदर कुमार और ललिता कुमारी मामलों में दिए गए निर्देशों के पालन के लिए अधिकारियों को परिपत्र जारी किए गए हैं तथा लंबित विवेचनाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।

90 और 60 दिन की समयसीमा के बीच एफएसएल को 75 और 45 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश

उच्च न्यायालय को बताया गया कि दुष्कर्म, पॉक्सो, एनडीपीएस सहित गंभीर मामलों में आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए मामले के अनुसार 90 या 60 दिन की वैधानिक अवधि होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एफएसएल को अपनी रिपोर्ट क्रमशः 75 या 45 दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य मुकदमे के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और एफएसएल को निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले संबंधित विवेचनाधिकारी को रिपोर्ट उपलब्ध करानी चाहिए। पुलिस महानिदेशक की ओर से सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि नमूना एकत्र होने के एक सप्ताह के भीतर एफएसएल भेजा जाए। राज्य सरकार ने यह भी बताया कि एफएसएल में वैज्ञानिक अधिकारियों की संख्या 11 से बढ़ाकर 28 की गई है।

हाई कोर्ट ने नियमित प्रशिक्षण की भी सलाह दी

उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को प्रत्येक शहर में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी। इसके लिए न्यायिक अधिकारियों और विचारण की प्रक्रिया का व्यापक अनुभव रखने वाले अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने को कहा गया। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी मिलने के बाद इस स्तर के मुद्दे को बंद किया, लेकिन भविष्य में आवश्यकता के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाते रहने की अपेक्षा जताई।

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मामले को 30 सितंबर 2026 को पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

मामला केवल जमानत का नहीं, समयबद्ध विवेचना का भी

नैनीताल के जिला शासकीय अधिवक्ता के पत्र और विशेष न्यायालयों के हालिया आदेशों से एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है कि आरोप-पत्र दाखिल करने की निर्धारित अवधि का पालन न होने पर गंभीर मामलों में भी आरोपितों को वैधानिक जमानत का अधिकार मिल सकता है। वहीं उच्च न्यायालय की कार्यवाही से स्पष्ट है कि समय पर वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराना भी विवेचना और आरोप-पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि डिफॉल्ट जमानत का मिलना संबंधित मामले में आरोपित को निर्दोष घोषित करना नहीं है। रामनगर के जमानत आदेश में न्यायालय ने भी स्पष्ट किया है कि आदेश प्रक्रियागत कमी के आधार पर है और मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं करता।

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