नवीन समाचार, देहरादून, 25 जुलाई 2026 (34 Transfer-Appointment Cancell)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) में अधिशासी अधिकारियों (Executive Officer-EO) की तैनाती को लेकर उपजा विवाद अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। शहरी विकास मंत्री (Urban Development Minister) राम सिंह कैड़ा (Ram Singh Kaida) ने 17 जुलाई 2026 को जारी 34 अधिशासी अधिकारियों एवं प्रभारी अधिशासी अधिकारियों के तबादला और तैनाती आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में 25 जुलाई को आदेश जारी कर विभाग को नई व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला नगर निकायों में रिक्त पड़े अधिशासी अधिकारी के पदों पर विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ का दायित्व सौंपे जाने से जुड़ा है। आदेश जारी होने के बाद नियुक्तियों की वैधानिकता, चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे थे।
क्या था पूरा मामला?
शहरी विकास विभाग में नियमित अधिशासी अधिकारियों की संख्या सीमित होने के कारण कई अधिकारियों को नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त (Assistant Municipal Commissioner) के रूप में तैनात किया गया था। इसके बाद नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में रिक्त हुए ईओ पदों पर क्लर्क, कर अधीक्षक, सफाई निरीक्षक तथा लेखा संवर्ग के कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी दे दी गई।
विभाग के इस निर्णय के बाद विभिन्न स्तरों पर यह प्रश्न उठने लगे कि इन नियुक्तियों का आधार क्या था और क्या यह व्यवस्था प्रचलित नियमों के अनुरूप है।
नियमावली को लेकर उठे सवाल
विवाद का मुख्य कारण स्थानीय निकाय (केंद्रीकृत) सेवा नियमावली-2019 (Local Bodies Centralized Service Rules-2019) है। इस नियमावली के अनुसार अधिशासी अधिकारी के पद पर नियमित नियुक्ति केवल पदोन्नति अथवा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (Uttarakhand Public Service Commission-UKPSC) के माध्यम से ही की जा सकती है।
इसके अतिरिक्त, पूर्व से चली आ रही प्रशासनिक व्यवस्था में प्रभारी अधिशासी अधिकारी का दायित्व सामान्यतः उप जिलाधिकारी (Sub-Divisional Magistrate-SDM) स्तर के अधिकारियों को सौंपा जाता रहा है। ऐसे में अन्य संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाए जाने पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए।
मंत्री ने निरस्त किए सभी आदेश
विवाद बढ़ने के बाद शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए 17 जुलाई को जारी सभी 34 तबादला एवं प्रभारी तैनाती आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय सचिव को नए आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
चयन प्रक्रिया पर उठ रहे हैं पारदर्शिता के सवाल
प्रभारी अधिशासी अधिकारियों के चयन को लेकर भी विभाग सवालों के घेरे में है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुल 18 कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाए जाने के लिए कोई स्पष्ट मानक या चयन प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई।
यह भी कहा जा रहा है कि यदि वरिष्ठता को आधार माना गया होता तो कई वरिष्ठ कर्मचारी इस सूची में शामिल होने चाहिए थे। आरोप है कि कुछ ऐसे कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाया गया, जो अपने-अपने संवर्ग की वरिष्ठता सूची में काफी नीचे के स्थान पर हैं, जबकि उनसे वरिष्ठ कर्मचारी अभी भी अपने मूल पदों पर कार्यरत हैं।
‘पिक एंड चूज’ नीति अपनाने के आरोप
विभाग पर मनमाने तरीके से चयन करने और ‘पिक एंड चूज’ (Pick and Choose) नीति अपनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। मीडिया द्वारा इस संबंध में अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास (Additional Secretary and Director Urban Development) विनोद गिरी गोस्वामी (Vinod Giri Goswami) से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
नए आदेशों पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें शहरी विकास विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले नए आदेशों पर हैं। उम्मीद की जा रही है कि विभाग रिक्त अधिशासी अधिकारी पदों पर नियुक्ति एवं प्रभारी व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिससे भविष्य में इस प्रकार के विवाद की पुनरावृत्ति न हो।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
