नवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 अप्रैल 2026 (Scam in Banbhulpura Rehabilitation)। हल्द्वानी के बहुचर्चित बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने के उपरांत सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशानुसार प्रारंभ हुई पुनर्वास प्रक्रिया में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े की बात सामने आ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के अंतर्गत स्वयं को बेघर बताकर आवेदन करने वाले सैकड़ों व्यक्तियों के पास अन्य राज्यों में पहले से पक्के मकान होने की बात और इस पूरे प्रकरण में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के कार्यकर्ताओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
बाहरी राज्यों में पक्के मकान, बनभूलपुरा में बने ‘बेघर’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन द्वारा कराए जा रहे डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) में चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में आये हैं। जांच के दौरान पाया गया कि कई आवेदकों ने हल्द्वानी में स्वयं को भूमिहीन और बेघर दर्शाया है, जबकि उनके नाम पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहले से पक्के मकान पंजीकृत हैं।
इसके अतिरिक्त, कई ऐसे व्यक्ति भी चिन्हित किये गये हैं जो मूलतः बाहरी राज्यों के निवासी हैं और बनभूलपुरा में केवल किराएदार के रूप में रह रहे थे, किंतु उन्होंने स्वयं को स्थायी निवासी बताकर योजना का लाभ लेने हेतु आवेदन कर दिया। जांच में कूटरचित (फर्जी) निवास दस्तावेजों के प्रयोग की भी आशंका जताई जा रही है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के कार्यकर्ताओं पर संदेह
सूत्रों के अनुसार, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र की मस्जिदों और मरकजों में शिविर लगाकर लोगों के आवेदन पत्र भरवाए थे। आरोप है कि सहायता के नाम पर अपात्र और फर्जी व्यक्तियों के आवेदन भी एक ही पैटर्न पर भरवाकर उन्हें दावेदारों की पंक्ति में खड़ा कर दिया गया। चर्चा यह भी है कि इस प्रकरण को विधिक रूप से उलझाकर सर्वोच्च न्यायालय में लंबी अवधि तक खींचने की योजना भी बनाई जा रही है।
सत्यापन हेतु 6 टीमें सक्रिय, कड़े मानकों पर हो रही जांच
नगर निगम प्रशासन ने इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लिया है। नगर आयुक्त पारितोष वर्मा के अनुसार सत्यापन हेतु 6 विशेष टीमों का गठन किया गया है। अपात्र आवेदनों को निरस्त करने हेतु निम्नलिखित मानकों की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है:
आवेदक के पास देश में कहीं भी पक्का मकान न हो।
वह 1 सितंबर 2024 से पूर्व से नगर निगम हल्द्वानी क्षेत्र का निवासी हो।
आवेदक की आय निर्धारित श्रेणी (EWS, LIG या MIG) के अंतर्गत हो।
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि गलत सूचना देने वाले किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अंतिम सूची तैयार कर सर्वोच्च न्यायालय को प्रेषित की जाएगी।
नैनीताल के जिलाधिकारी का वक्तव्य
मामले की गंभीरता पर नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा:
“जब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह आंकड़ा लगभग 5,000 का था, तो अब आवेदकों की संख्या बढ़कर 7,000 कैसे हो गई? यह स्पष्ट रूप से संदेह उत्पन्न करता है। इसी कारण आवेदनों का सूक्ष्म स्तर (Micro Level) पर सत्यापन कराया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी में न्यायिक विभाग के विशेषज्ञों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।”
यह है पूरा मामला?
सर्वोच्च न्यायालय ने बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में स्पष्ट किया था कि अतिक्रमणकारियों को उस भूमि पर रहने का विधिक अधिकार नहीं है। न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन का अवसर देने और पात्र पाए जाने पर 6 माह तक ₹2,000 प्रतिमाह की सहायता देने के निर्देश दिए थे। अब प्रशासन की अंतिम सूची ही यह निर्धारित करेगी कि वास्तव में किन परिवारों को पुनर्वास का लाभ प्राप्त होगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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