21 वर्ष से कम आयु में विवाह पर विवाद, फिर भी जोड़े को सुरक्षा; हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2026 (High Court on Marriage Under Age)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) स्थित उच्च न्यायालय (High Court) ने एक विवाहित जोड़े की सुरक्षा से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। विवाह के समय युवक की आयु 21 वर्ष से कम होने को लेकर आपत्ति उठाई गई थी, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी बालिग युवती (Adult Woman) ने अपनी इच्छा से विवाह किया है और उसे सुरक्षा संबंधी खतरा है, तो केवल आयु संबंधी विवाद के आधार पर उसे संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने संबंधित थाना प्रभारी (Station House Officer-SHO) को खतरे का आकलन कर आवश्यक होने पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
संबंधित पक्षों और न्यायालयी अभिलेखों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला एक विवाहित जोड़े द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि उन्हें निजी पक्षकारों तथा उनके सहयोगियों से सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि विवाह के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने का आरोप है। याचिका में कहा गया कि दोनों ने 24 मार्च 2026 को विवाह किया था। हाईस्कूल (High School) प्रमाणपत्र के अनुसार विवाह के समय युवती की आयु 19 वर्ष 6 माह तथा युवक की आयु 20 वर्ष थी।
परामर्शदाता की रिपोर्ट बनी निर्णय का आधार
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों को परामर्शदाता (Counsellor) के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। परामर्शदाता की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि युवती अपने माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती और वह अपने पति के साथ रहकर संतुष्ट एवं सुरक्षित महसूस कर रही है।
दूसरी ओर विवाह का विरोध कर रहे पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि विवाह के समय युवक ने 21 वर्ष की आयु पूरी नहीं की थी, इसलिए विवाह को वैध नहीं माना जा सकता। इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यदि आयु संबंधी कोई कानूनी प्रश्न है भी, तो वह विवाह की वैधता से जुड़ा विषय हो सकता है, लेकिन इससे उनके जीवन और सुरक्षा के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी लिया गया संज्ञान
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की एकलपीठ (Single Bench) ने सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Lata Singh vs State of Uttar Pradesh) मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया। न्यायालय ने माना कि बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार प्राप्त है और ऐसे मामलों में यदि सुरक्षा का खतरा हो तो राज्य की जिम्मेदारी बनती है कि आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराया जाए।
पुलिस को सुरक्षा और काउंसलिंग दोनों के निर्देश
न्यायालय ने संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि वह दोनों की सुरक्षा को लेकर वास्तविक खतरे का मूल्यांकन करें। यदि जीवन अथवा शारीरिक सुरक्षा पर खतरा पाया जाता है तो तत्काल आवश्यक पुलिस संरक्षण उपलब्ध कराया जाए।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि युवती के परिवार और विवाह का विरोध कर रहे अन्य लोगों को बुलाकर कानून के अनुरूप परामर्श (Counselling) दिया जाए, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह आदेश ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां विवाह की वैधता को लेकर अलग कानूनी प्रश्न मौजूद हों, लेकिन साथ ही जोड़े की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने हो। न्यायालय ने संकेत दिया है कि सुरक्षा का अधिकार और वैवाहिक विवाद दो अलग-अलग विषय हैं तथा जीवन और स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा सर्वोपरि है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
