पर्वतीय पर्यटन नगरी नैनीताल से करीब 10 किलोमीटर दूर पटवाडांगर में उत्तराखंड सरकार ने 80 एकड़ में इंटीग्रेटेड प्रीमियम टूरिज्म सिटी विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। परियोजना के लिए आधिकारिक टेंडर जारी हो चुके हैं। इसी क्षेत्र में केंद्र सरकार की मेरू (MERU) योजना के तहत कुमाऊं विश्वविद्यालय के तीसरे परिसर का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे यह इलाका शिक्षा और पर्यटन दोनों का नया केंद्र बन सकता है।
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जुलाई 2026 (Patwadangar-New Premium Tourism City)। उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार ने नैनीताल (Nainital) के निकट पटवाडांगर (Patwadangar) क्षेत्र को एक नए पर्यटन और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (Uttarakhand Investment and Infrastructure Development Board-UIIDB) ने यहां प्रस्तावित इंटीग्रेटेड प्रीमियम टूरिज्म सिटी (Integrated Premium Tourism City) के लिए आधिकारिक ओपन टेंडर यानी खुली निविदा जारी कर दी गई हैं। लगभग ₹600 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली इस परियोजना का उद्देश्य उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाओं का विकास, निजी निवेश आकर्षित करना तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
आखिर पटवाडांगर में क्या बनने जा रहा है?
सरकार की योजना के अनुसार पटवाडांगर के देवदार और चीड़ के जंगलों के बीच स्थित लगभग 80 एकड़ सरकारी भूमि पर एक आधुनिक पर्यटन नगरी विकसित की जाएगी।
इस परियोजना में—
- 200 से अधिक लग्जरी होटल कक्ष (Luxury Keys)
- प्रीमियम होटल एवं रिसॉर्ट
- वेलनेस सेंटर
- लक्जरी विला
- प्रकृति आधारित पर्यटन (Nature Tourism)
- एडवेंचर गतिविधियां
- आधुनिक पर्यटन अनुभव
जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य विशेष रूप से उच्च आय वर्ग (Affluent Tourists) तथा विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना है।
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परियोजना के लिए निविदा जारी, जानिए महत्वपूर्ण तिथियां
यूआईआईडीबी (UIIDB) द्वारा जारी निविदा के अनुसार—
- परियोजना का नाम: Allotment of Land Parcel for Premium Hospitality Project at Patwadangar, Nainital
- दस्तावेज डाउनलोड प्रारंभ: 20 जुलाई 2026
- बोली जमा करने की शुरुआत: 28 जुलाई 2026
- अंतिम तिथि: 12 अगस्त 2026, अपराह्न 3:00 बजे
- तकनीकी निविदा खुलने का समय: 12 अगस्त 2026, शाम 4:00 बजे
- टेंडर शुल्क: ₹11,800
- धरोहर राशि (EMD): ₹75 लाख
निविदा प्रक्रिया ओपन टेंडर के माध्यम से संचालित की जा रही है।
क्या हैं इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबियां?

पटवाडांगर नैनीताल झील क्षेत्र (Lake District) के निकट स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। पंतनगर (Pantnagar) हवाई अड्डे से इसकी दूरी दो घंटे से भी कम बताई गई है। इस स्थान की ओर से नैनीताल को जोड़ने के लिए एक नया मार्ग भी बनकर तैयार हो गया है। देखें पटवाडांगर के पास से नैनीताल-हल्द्वानी का नया मार्ग:
सरकारी दस्तावेजों में इस क्षेत्र की विशेषताएं इस प्रकार बताई गई हैं—
- घने चीड़ एवं देवदार के जंगल
- पर्वतों और घाटियों का प्राकृतिक दृश्य
- प्राकृतिक जलधाराएं
- शांत वातावरण
- उच्च स्तरीय पर्यटन की व्यापक संभावनाएं
सरकार का मानना है कि भविष्य में इसे एक नए हिल स्टेशन आधारित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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केवल पर्यटन ही नहीं, शिक्षा का भी नया केंद्र बनेगा पटवाडांगर
पटवाडांगर का महत्व केवल इस पर्यटन परियोजना तक सीमित नहीं है। इसी क्षेत्र में केंद्र सरकार की मेरू (MERU) योजना के तहत कुमाऊं विश्वविद्यालय (Kumaun University) के तीसरे परिसर के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस परियोजना का शिलान्यास पहले ही किया जा चुका है। यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय के मेरु परिसर का शिलान्यास
यदि दोनों परियोजनाएं निर्धारित समय में पूरी होती हैं तो पटवाडांगर आने वाले वर्षों में कुमाऊं मंडल का एक महत्वपूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, पर्यटन और सेवा क्षेत्र (Education-Tourism Hub) बन सकता है।
स्थानीय लोगों को क्या होगा लाभ?
परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। होटल, पर्यटन, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। साथ ही क्षेत्र में सड़क, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, यातायात प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जैसे विषय भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तराखंड सरकार पिछले कुछ वर्षों से राज्य में उच्च स्तरीय पर्यटन निवेश को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। पटवाडांगर परियोजना उसी दिशा का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो नैनीताल के पर्यटन दबाव को संतुलित करने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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