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चार-पांच साल के बच्चों में दिख रहे यौवन के लक्षण, पीजीआई में हर माह या रहे चौंकाने वाले नये मामले

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नवीन समाचार, चंडीगढ़, 14 अगस्त 2026 (Signs of Early Puberty in Children)। देश के हरियाणा (Haryana) राज्य से चार-पाँच वर्ष के बच्चों में समय से पहले यौवन (Precocious Puberty) या जवानी आने के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं, जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। पीजीआई रोहतक (PGI Rohtak) के बाल अंतःस्राव विज्ञान क्लीनिक (Pediatric Endocrinology Clinic) में करीब चार वर्ष की बच्ची में माहवारी जैसी रक्तस्राव और लगभग पांच वर्ष के बच्चे में चेहरे पर मुंहासे व शरीर के गुप्त हिस्सों पर बाल आने के मामले सामने आये हैं। 

Signs of Early Puberty in Children वक्त से पहले जवान हो रहा है आपका बच्चा? तो Early Puberty के इन लक्षणों को न  करें नजरअंदाजबताया गया है कि पीजीआई रोहतक में हरियाणा के सभी जिलों के अलावा राजस्थान (Rajasthan) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से भी बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पीजीआई के विशेषज्ञों के अनुसार इन बच्चों में से लड़कियों में आठ वर्ष और लड़कों में नौ वर्ष की उम्र से पहले यौवन के स्पष्ट लक्षण शुरू होना प्रीकोशियस प्यूबर्टी (Precocious Puberty) यानी असामयिक यौवनारंभ कहलाता है। इसमें शरीर में यौवन से जुड़े हार्मोन सामान्य उम्र से पहले सक्रिय हो जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पीजीआई में उपचार करा रहे लगभग 40 बच्चों में सात लड़के हैं, जबकि लड़कियों की संख्या अधिक है। 

चार साल की बच्ची में माहवारी जैसी रक्तस्राव

पीजीआई के बाल अंतःस्राव विज्ञान क्लीनिक में करीब चार वर्ष की बच्ची को माहवारी जैसी रक्तस्राव होने पर लाया गया था। जांच में उसके यौवन से जुड़े हार्मोन उम्र के अनुसार अपेक्षा से अधिक मिले। इसके बाद विशेषज्ञों ने उपचार शुरू किया और बच्ची को नियमित रूप से हार्मोन को दबाने वाला इंजेक्शन दिया जा रहा है। 

एक अन्य मामले में करीब पांच वर्ष का बच्चा अपनी उम्र से काफी बड़ा दिखाई दे रहा था। उसके चेहरे पर मुंहासे और निजी-गुप्त अंगों पर बाल आने लगे थे। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण शरीर में समय से पहले हार्मोनल बदलाव की ओर संकेत कर सकते हैं और इनकी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है। क्लीनिक में हर माह करीब छह नये बच्चे ऐसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं और लगभग 40 बच्चों को हर माह हार्मोन को दबाने वाले लीयूपरोलाइड (Leuprolide) इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। 

यह हैं बच्चों में यौवन के संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार लड़कियों में स्तनों का विकास, लंबाई तेजी से बढ़ना और समय से पहले माहवारी जैसे लक्षण और लड़कों में अंडकोष और जननांगों का विकास, शरीर पर बाल आना, आवाज में बदलाव और मांसपेशियों का विकास समय से पहले यौवन के संकेत हो सकते हैं। जानकारों के अनुसार खानपान में बदलाव, गर्म तासीर के भोजन की अधिकता भी इन बदलावों का कारण हो सकती है। 

हर माह छह नये मामले, 2019 से बढ़ी संख्या

पीजीआई के बाल अंतःस्राव विज्ञान क्लीनिक की चिकित्सक प्रो. अंजलि वर्मा (Prof. Anjali Verma) के अनुसार हर माह करीब छह नये मामले सामने आ रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है। इनके अनुसार वर्ष 2019 में ऐसे नये मामलों की संख्या हर माह करीब दो से तीन थी। अब अधिक जागरूकता के कारण अधिक बच्चे विशेषज्ञ उपचार तक पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञ के अनुसार मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे केवल एक कारण मानना उचित नहीं है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर अभिभावकों को घबराने के बजाय विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए, क्योंकि हर बच्चे में समय से पहले दिखाई देने वाले शारीरिक बदलाव का कारण और उपचार एक जैसा नहीं होता।

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लीयूपरोलाइड से कुछ समय के लिए रोके जाते हैं हार्मोन

प्रो. अंजलि वर्मा के अनुसार इस स्थिति में कुछ बच्चों के मस्तिष्क से सामान्य उम्र की तुलना में अधिक मात्रा में यौवन संबंधी हार्मोन निकलने लगते हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए कुछ बच्चों को हर माह लीयूपरोलाइड (Leuprolide) इंजेक्शन दिया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ वर्षों तक उपचार चलने के बाद करीब 11 से 12 वर्ष की उम्र में चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार इंजेक्शन बंद किया जा सकता है। इसके बाद सामान्य रूप से यौवन की प्रक्रिया फिर शुरू हो सकती है। हालांकि, समय से पहले यौवन के हर मामले में तत्काल दवा शुरू करना आवश्यक नहीं माना जाता और उपचार का निर्णय चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाता है।

लड़कों में नौ वर्ष से पहले लक्षण दिखें तो विशेष जांच जरूरी-क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार लड़कों में नौ वर्ष की उम्र से पहले यौवन के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच को विशेष गंभीरता से लेना चाहिए। कुछ मामलों में इसके पीछे मस्तिष्क से संबंधित कारण भी हो सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार हार्मोन की जांच, हड्डियों की उम्र का एक्स-रे (Bone Age X-Ray) और अन्य जांच की जाती हैं। कुछ बच्चों में मस्तिष्क की एमआरआई (MRI) भी आवश्यक हो सकती है।

समय से पहले यौवन के लक्षणों को केवल सामान्य शारीरिक बदलाव मानकर छोड़ना उचित नहीं है। खासकर बहुत कम उम्र में ऐसे संकेत दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पीजीआई में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ने का एक कारण जागरूकता बढ़ना भी है, इसलिए बढ़ते आंकड़ों को किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। क्योंकि पहले ऐसे मामले होने पर भी चिकित्सालय नहीं आते थे। 

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