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दिलचस्प-भावुक करने वाला मामला : 25 सप्ताह में जन्मा मात्र 700 ग्राम का बच्चा, फिर 2 माह में ‘निकू ग्रेजुएट’ बनकर घर लौटा, श्रीनगर बेस अस्पताल ने बचाई जिंदगी…

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नवीन समाचार, श्रीनगर गढ़वाल, 17 अगस्त 2026 (Baby Just 700 Grams-Born at 25 Weeks)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) जनपद के श्रीनगर गढ़वाल (Srinagar Garhwal) से चिकित्सा क्षेत्र की उम्मीद जगाने वाली एक बेहद भावुक कहानी सामने आई है। रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल नाम की एक महिला के बच्चे का जन्म सामान्य समय से करीब तीन से चार महीने पहले महज 25 सप्ताह (Weeks) में हुआ और जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 700 ग्राम था।

Baby Just 700 Grams-Born at 25 Weeks, Premature baby born Base Hospital
पूरी टीम के साथ नवजात ‘निकू ग्रेजुएट’

बेहद नाजुक हालत में श्रीनगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय के नवजात निकू यानी गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती यह बच्चा करीब दो महीने के उपचार और लगातार निगरानी के बाद 1.3 किलोग्राम वजन के साथ मां का दूध पीने लगा और स्वस्थ होकर ‘निकू ग्रेजुएट’ (NICU Graduate) बनकर घर लौट गया।

इस छोटे से बच्चे की कहानी सिर्फ एक सफल उपचार की कहानी नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल में अत्यंत कम वजन और समय से पहले जन्मे नवजात को बचाने में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लगातार मेहनत की भी मिसाल है।

700 ग्राम से 1.3 किलोग्राम तक का सफर

अल्पना नौटियाल के लिए 16 जून का दिन बेहद चिंता भरा था। उनकी डिलीवरी महज 25 सप्ताह की गर्भावस्था में हो गई। जन्म के समय बच्चा केवल 700 ग्राम का था और उसकी हालत बेहद नाजुक थी।

बेहतर उपचार के लिए नवजात को श्रीनगर बेस चिकित्सालय के NICU में भर्ती कराया गया। ऐसे समय से पहले जन्मे बच्चों में फेफड़ों सहित शरीर के कई अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते और संक्रमण का खतरा भी अधिक रहता है। इसलिए उन्हें सामान्य नवजातों की तुलना में कहीं अधिक विशेषज्ञ देखभाल और लगातार निगरानी की जरूरत होती है।

बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग और NICU की टीम ने बच्चे को चिकित्सकीय निगरानी में रखा। आवश्यकतानुसार श्वसन सहायता, दवाओं, पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव पर लगातार ध्यान दिया गया। करीब दो महीने बाद बच्चे की हालत में लगातार सुधार हुआ और उसका वजन बढ़कर 1,300 ग्राम हो गया। वह मां का दूध भी पीने लगा। स्थिति स्थिर होने पर चिकित्सकों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी।

मां की आंखों में खुशी के आंसू, डॉक्टरों ने कहा ‘NICU Graduate’

जिस बच्चे को जन्म के समय जीवन के लिए गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था, उसके स्वस्थ होकर घर जाने का क्षण परिवार के लिए भावुक कर देने वाला था। बच्चे की मां अल्पना नौटियाल ने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि अस्पताल की टीम ने उनके बच्चे को अपने बच्चे की तरह संभाला।

बच्चे के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के अवसर को NICU टीम ने भी खास बना दिया। उसे कैप और हुड पहनाकर ‘NICU Graduate’ के रूप में बधाई दी गई। NICU वार्ड में केक काटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। इस दौरान बच्चे के पिता और दादी भी भावुक हो गए। परिजनों के अनुसार चिकित्सकों ने केवल बच्चे का उपचार नहीं किया, बल्कि इस कठिन दौर में पूरे परिवार का हौसला भी बनाए रखा।

आखिर ‘NICU Graduate’ क्यों कहलाया?

NICU यानी Newborn Intensive Care Unit (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) अस्पताल की वह विशेष इकाई है जहां ऐसे नवजातों को रखा जाता है जिन्हें जन्म के बाद विशेष उपचार, जीवन रक्षक सहायता और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है।

इस मामले में बच्चा 25 सप्ताह में पैदा हुआ था और उसका वजन केवल 700 ग्राम था। इसलिए उसके लिए शुरुआती समय बेहद चुनौतीपूर्ण था। ऐसे नवजातों में फेफड़ों का पूर्ण रूप से विकसित न होना, शरीर का बेहद कम वजन और संक्रमण का अधिक खतरा प्रमुख चिकित्सकीय चुनौतियां हो सकती हैं।

NICU में ऐसे बच्चों के लिए इन्क्यूबेटर (Incubator), वेंटिलेटर या CPAP जैसी श्वसन सहायता, लगातार स्वास्थ्य निगरानी के लिए मॉनिटर और विशेष पोषण व्यवस्था जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जाता है।

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समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए क्यों जरूरी है NICU?

सामान्यतः गर्भावस्था लगभग 40 सप्ताह की होती है और 37 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को Preterm यानी समय से पहले जन्मा बच्चा कहा जाता है। इस मामले में बच्चा केवल 25 सप्ताह में पैदा हुआ, यानी सामान्य अवधि से काफी पहले।

इतनी कम गर्भावस्था अवधि में जन्मे बच्चों के फेफड़े और शरीर के अन्य अंग अभी विकास की प्रक्रिया में होते हैं। इसी कारण उन्हें सांस लेने, शरीर का तापमान बनाए रखने, पर्याप्त पोषण लेने और संक्रमण से बचने के लिए विशेष देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।

NICU में इन्क्यूबेटर बच्चे के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करता है, जबकि आवश्यकतानुसार वेंटिलेटर या CPAP जैसी तकनीकें सांस लेने में सहायता देती हैं। मॉनिटर के जरिए बच्चे की हृदय गति, सांस और रक्त में ऑक्सीजन स्तर पर लगातार नजर रखी जाती है।

पिछले एक वर्ष में कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का उपचार

श्रीनगर बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग के अनुसार पिछले एक वर्ष में NICU में 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का सफल उपचार किया गया है। इनमें रुद्रप्रयाग समेत पर्वतीय क्षेत्रों से गंभीर अवस्था में रेफर होकर पहुंचे बच्चे भी शामिल रहे हैं।

अस्पताल की टीम के अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, लगातार मॉनिटरिंग, आवश्यक दवाओं, पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव के साथ चिकित्सकों तथा नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस बच्चे के मामले में भी यही लंबी चिकित्सकीय देखभाल धीरे-धीरे रंग लाई और 700 ग्राम का नवजात 1.3 किलोग्राम वजन तक पहुंचकर मां का दूध लेने की स्थिति में आया।

‘निकू ग्रेजुएट’ का यह पल परिवार के लिए क्यों खास है

अत्यंत कम वजन और बहुत कम गर्भावस्था अवधि में जन्म लेने वाले बच्चे के लिए NICU से स्वस्थ होकर घर जाना परिवार के लिए बड़ी राहत का क्षण होता है। इस बच्चे के लिए ‘NICU Graduate’ का खिताब इसी सफर की खुशी का प्रतीक बना।

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रुद्रप्रयाग के पर्वतीय क्षेत्र से आए इस परिवार के लिए श्रीनगर बेस अस्पताल की NICU टीम की यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गंभीर स्थिति वाले नवजात को उपचार के लिए हर बार मैदानी क्षेत्र के बड़े केंद्र तक ले जाना संभव नहीं होता। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्र में उपलब्ध विशेषज्ञ नवजात चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनती हैं।

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