नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अगस्त 2026 (High Court Acquitted Dehradun Murder)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने वर्ष 2013 में सात वर्षीय बच्चे की कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपित अमित कौशल (Amit Kaushal) को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायालय ने देहरादून (Dehradun) की फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) और विशेष पॉक्सो न्यायालय (Special POCSO Court) द्वारा अप्रैल 2018 में दी गयी सजा को रद्द कर दिया। खंडपीठ ने माना कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) की कड़ी को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
मामला 23 अगस्त 2013 का है। देहरादून जनपद के डोईवाला (Doiwala) स्थित घर से सात वर्षीय बच्चा पुन्नू लापता हो गया था। अगले दिन 24 अगस्त को उसका शव आरोपित के पारिवारिक परिसर में खड़ी एक एस्टीम कार (Esteem Car) से बरामद हुआ था। बच्चे के पिता की तहरीर पर पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कार से शव मिलने को अकेला आधार नहीं माना जा सकता
जांच के बाद पुलिस ने अमित कौशल को गिरफ्तार किया और न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया। इसके बाद देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट/विशेष पॉक्सो जज ने अप्रैल 2018 में उसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 302, 377, 201 और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनायी थी। इस फैसले के विरुद्ध अमित कौशल ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपील (Criminal Appeal) दाखिल की।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Justice Siddhartha Sah) की खंडपीठ ने की। बचाव पक्ष की अधिवक्ता ममता बिष्ट (Mamta Bisht) ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि अपराध किस प्रकार हुआ और इसे आरोपित ने ही अंजाम दिया।
साक्ष्यों की समीक्षा के दौरान खंडपीठ ने पाया कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि जिस कार से बच्चे का शव बरामद हुआ, उसका मालिकाना हक केवल आरोपित के पास था। पुलिस जांच के दौरान कार की चाबी भी आरोपित के पास नहीं मिली थी, बल्कि परिवार के एक अन्य सदस्य यानी उसकी मां के पास थी।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि फॉरेंसिक (Forensic) रिपोर्ट में कार की सीट या कवर पर खून अथवा अन्य संबंधित अंश नहीं मिले थे। ऐसे में केवल संयुक्त पारिवारिक परिसर में खड़ी कार से बच्चे का शव बरामद होने को आरोपितके विरुद्ध हत्या का निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 पर हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
खंडपीठ ने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 106 का इस्तेमाल अभियोजन के मामले में मौजूद कमियों को पूरा करने के लिए नहीं किया जा सकता। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित आपराधिक मामले में अभियोजन को स्वयं ऐसी साक्ष्यों की पूरी कड़ी स्थापित करनी होती है, जिससे अपराध में आरोपित की संलिप्तता संदेह से परे साबित हो।
अदालत ने मामले के उपलब्ध तथ्यों, गवाहों के बयानों और दस्तावेजी एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन आरोपित के विरुद्ध आरोपों को आवश्यक कानूनी स्तर तक साबित नहीं कर पाया। इसके बाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2018 में निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर दिया तथा अमित कौशल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
जेल से तत्काल रिहाई के आदेश
हाईकोर्ट ने आरोपित को तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि यह रिहाई इस शर्त के अधीन है कि आरोपित किसी अन्य मामले में वांछित न हो। इस फैसले का महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह है कि गंभीर आपराधिक आरोपों के बावजूद केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि के लिए अभियोजन को घटनाओं की ऐसी पूरी और विश्वसनीय कड़ी स्थापित करनी होती है, जो आरोपित के अलावा किसी अन्य संभावना को समाप्त करती हो। हाईकोर्ट ने इस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को उस स्तर का नहीं पाया और इसी आधार पर 2018 की दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।



















