हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के चर्चित एसिड अटैक मामले में निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा, दोषियों की आजीवन कारावास की सजा भी कायम
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अगस्त 2026 (High Court News 13 August 2026)। नैनीताल। हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में हल्द्वानी के इंदिरा नगर में आपसी रंजिश के चलते हुए चर्चित एसिड अटैक (Acid Attack) मामले में निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है। न्यायालय ने दोषी मां, बेटे और अन्य की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि आरोपियों का कृत्य जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है और सजा में रियायत या माफी की कोई गुंजाइश नहीं है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Justice Siddharth Sah) की खंडपीठ ने की। मामले के अनुसार वर्ष 2014 में पड़ोस में रहने वाले इरशाद और उनके परिवार के साथ आपसी विवाद के बाद मोहम्मद जैकी, उसकी मां रहमत जहां और एक नाबालिग ने गुस्से में आकर दुकान से तेजाब की बोतलें लाकर पीड़ितों पर फेंक दी थीं। इस हमले में कुल 19 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें पांच लड़कियां और 18 माह का एक मासूम बच्चा भी शामिल था। चिकित्सीय जांच के दौरान दो डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि हमले में घायल पांच लोगों के घाव और निशान जीवनभर ठीक नहीं हो सकते।
मामले के सत्र परीक्षण (Sessions Trial) के दौरान 14 गवाहों की गवाही और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने वर्ष 2018 में तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि वे लगभग 12 वर्षों से जेल में हैं और अपनी सजा काट चुके हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जाए।
पीड़ितों की ओर से अधिवक्ता दीप चंद्र जोशी ने दोषियों की रिहाई का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि एक मासूम बच्चे सहित कई लोगों की जिंदगी बर्बाद करने वाले दोषियों की सजा माफ नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए दोषियों की अपील खारिज कर दी।
फड़ वालों के अधिकारों से जुड़ी याचिका पर तीन सप्ताह बाद होगी सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड में स्ट्रीट वेंडर्स (Street Vendors) के अधिकारों और वर्ष 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम (Street Vendors Act) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई।
नेशनल हॉकर फेडरेशन (National Hawkers Federation) द्वारा वर्ष 2014 में दायर इस याचिका में स्ट्रीट वेंडर्स का समय-समय पर नियमानुसार सर्वे कराने, वेंडिंग जोन (Vending Zone) निर्धारित करने तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना उन्हें हटाने या उनका सामान जब्त नहीं करने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इससे जुड़ी कई अन्य याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। मुख्य याचिका में याचिकाकर्ता को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
वाडिया संस्थान के रजिस्ट्रार की नियुक्ति को चुनौती, हाईकोर्ट ने छह सप्ताह में जवाब मांगा
नैनीताल। हाईकोर्ट में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (Wadia Institute of Himalayan Geology) के रजिस्ट्रार पद पर तैनात पंकज कुमार वर्मा की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। प्रो. अनुराधा राय, रवींद्र जुगरान और त्रिभुवन चंद्र जोशी की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई क्वो वारंटो (Quo Warranto) याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने पंकज कुमार वर्मा के साथ भारत सरकार, वाडिया इंस्टीट्यूट और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
चकराता में इंटरनल रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति के नए विज्ञापन पर हाईकोर्ट की रोक
नैनीताल। हाईकोर्ट ने चकराता ब्लॉक में इंटरनल रिसोर्स पर्सन (Internal Resource Person) की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले में जारी नए विज्ञापन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और सामुदायिक विकास के लिए शुरू की गई चयन प्रक्रिया में दो महिला आवेदक अंतिम मेरिट सूची में पहले और दूसरे स्थान पर रही थीं। आरोप है कि एक स्थानीय विधायक की शिकायत के आधार पर बिना कोई स्पष्ट कारण बताए पूरी चयन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया और नया विज्ञापन जारी कर दिया गया, जबकि इसी प्रक्रिया के तहत कालसी और रायपुर ब्लॉक में नियुक्तियां पूरी की जा चुकी थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नए विज्ञापन पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों और पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मामले से जुड़े वीडियो साक्ष्यों और अन्य संबंधित दस्तावेजों के आधार पर भी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे पद के लिए निर्धारित सभी पात्रता मानकों को पूरा करती हैं और राजनीतिक दबाव में चयन प्रक्रिया रद्द करना अनुचित है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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