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2027 विधान सभा चुनाव के लिए उत्तराखंड कांग्रेस को दो दर्जन से अधिक सीटों पर नए चेहरों की तलाश

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नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अगस्त 2026 (Uttarakhand Congress Seeks New Faces)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद से 2027 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) से पहले कांग्रेस (Congress) के सामने संगठन और प्रत्याशी चयन की चुनौती की तस्वीर सामने आ रही है। पार्टी के 2022 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में मैदान में रहे कई प्रमुख चेहरे अब भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party-BJP) में जा चुके हैं, जबकि कुछ अन्य नेताओं के चुनावी मैदान से दूर होने से दो दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को नये सिरे से प्रत्याशी तलाशने की स्थिति बतायी जा रही है।

Uttarakhand Congress Seeks New Faces, Uttarakhand Congresss Mission Minister (Rules For Contesting-Voting Panchayat Election) दूसरी ओर, लगातार दल-बदल से भाजपा के सामने भी नये और पुराने नेताओं के बीच टिकट की दावेदारी का प्रश्न खड़ा हो सकता है। उपलब्ध राजनीतिक जानकारी के अनुसार इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण उत्तरकाशी (Uttarkashi) जनपद में दिखाई देता है। जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर 2022 में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे पुरोला (Purola) से मालचंद (Malchand), यमुनोत्री (Yamunotri) से दीपक बिजल्वाण (Deepak Bijalwan) और गंगोत्री (Gangotri) से विजयपाल सजवाण (Vijaypal Sajwan) अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस कारण 2027 के चुनाव से पहले उत्तरकाशी की तीनों सीटों पर कांग्रेस को नये स्थानीय चेहरों और संगठनात्मक नेतृत्व की जरूरत पड़ सकती है।

नैनीताल जनपद में भी कई सीटों पर बदले राजनीतिक समीकरण

नैनीताल जनपद (Nainital District) में नैनीताल विधानसभा सीट (Nainital Assembly Seat) पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Yashpal Arya) के पुत्र पिछले दो चुनाव लड़ चुके संजीव आर्य (Sanjeev Arya) के चुनाव लड़ने से इंकार करने की बात सामने आयी है। भीमताल (Bhimtal) में कांग्रेस की पुरानी पहचान रखने वाले राम सिंह कैड़ा (Ram Singh Kaida) अब भाजपा सरकार में मंत्री हैं, जबकि पूर्व कांग्रेस विधायक दान सिंह भंडारी (Dan Singh Bhandari) भी भाजपा में जा चुके हैं।

लालकुआं (Lalkuan) विधानसभा सीट पर 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) कांग्रेस के प्रत्याशी थे। उनके चुनाव हारने के बाद 2027 में उनके यहां से चुनाव लड़ने की संभावना नहीं बतायी जा रही है। वहीं पूर्व कांग्रेस विधायक और मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल (Harish Chandra Durgapal) उम्र के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हैं, जबकि पिछली बार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ीं संध्या डालाकोटी (Sandhya Dalakoti) भी अब कांग्रेस से दूर हैं। रामनगर (Ramnagar) में 2022 में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नैनीताल के पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल (Dr. Mahendra Pal) के भी रामनगर से दोबारा चुनाव लड़ने की संभावना कम बतायी जा रही है।

कालाढूंगी (Kaladhungi) में कांग्रेस सरकार में दर्जा राज्य मंत्री रहे और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति महेश शर्मा (Mahesh Sharma) भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस तरह नैनीताल जनपद में हल्द्वानी (Haldwani) को छोड़कर कई विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को नये प्रत्याशियों की तलाश करनी पड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार नैनीताल सहित कई सीटों पर कांग्रेस ऐसे प्रत्याशियों का भी इंतजार कर रही है, जो भाजपा से टिकट न मिलने पर बागी होकर उनके खेमे में आ जाएं और उन्हें टिकट दे दिया जाए।

गढ़वाल से कुमाऊं तक कई सीटों पर दूसरी पंक्ति के नेतृत्व की चुनौती

बतायी गयी सूची के अनुसार कांग्रेस के लिए गढ़वाल मंडल (Garhwal Division) की टिहरी (Tehri), धनोल्टी (Dhanaulti), पौड़ी (Pauri), लैंसडाउन (Lansdowne), चौबट्टाखाल (Chaubattakhal), यमकेश्वर (Yamkeshwar) और बदरीनाथ (Badrinath) सीटों पर भी नेतृत्व का प्रश्न सामने है। इन सीटों से धन सिंह नेगी (Dhan Singh Negi), जोत सिंह बिष्ट (Jot Singh Bisht), नवल किशोर (Naval Kishore), अनुकृति गुसाईं रावत (Anukriti Gusain Rawat), केसर सिंह नेगी (Kesar Singh Negi), शैलेंद्र रावत (Shailendra Rawat) और राजेंद्र भंडारी (Rajendra Bhandari) जैसे नाम 2022 के चुनावी परिदृश्य से जुड़े रहे हैं।

मैदानी और कुमाऊं क्षेत्र (Kumaon Region) में खानपुर (Khanpur) से सुभाष चौधरी (Subhash Chaudhary), रुड़की (Roorkee) से यशपाल राणा (Yashpal Rana), रुद्रपुर (Rudrapur) से मीना शर्मा (Meena Sharma) और बागेश्वर (Bageshwar) से रंजीत दास (Ranjit Das) के नाम इस राजनीतिक बदलाव के संदर्भ में लिये जा रहे हैं। धर्मपुर (Dharampur) से दिनेश अग्रवाल (Dinesh Agarwal) का नाम भी सूची में शामिल है। डोईवाला (Doiwala) में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट (Hira Singh Bisht) के निधन के बाद पार्टी के सामने इस सीट पर भी नये नेतृत्व की आवश्यकता बतायी जा रही है। हीरा सिंह बिष्ट का जुलाई 2026 में निधन हुआ था। 

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दल-बदल से भाजपा के सामने भी टिकट का दबाव

यह राजनीतिक बदलाव केवल कांग्रेस के लिए चुनौती नहीं है। जिन सीटों पर कांग्रेस के प्रमुख नेता भाजपा में शामिल हुए हैं, वहां भाजपा के पुराने और प्रभावशाली नेता भी पहले से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं और नये शामिल हुए नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे भाजपा के भीतर असंतोष या बगावत की स्थिति बनने की संभावना को भी राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर देखा जा रहा है।

भाजपा ने भी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। अगस्त 2026 में पार्टी ने 121 कार्यकारी सदस्यों, 32 विशेष आमंत्रित सदस्यों और 25 स्थायी आमंत्रित सदस्यों वाली नयी प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की है। इससे स्पष्ट है कि दोनों प्रमुख दल चुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। 

कांग्रेस का दावा, टिकट केवल जिताऊ प्रत्याशी को

कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) का कहना है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गये कुछ लोग वापस आने के लिए तैयार हैं, लेकिन पार्टी केवल जिताऊ प्रत्याशी (Winnable Candidate) को टिकट देगी। इन्होंने कहा कि केवल चुनाव लड़ने के लिए लोगों को कांग्रेस में शामिल करने से कोई लाभ नहीं होगा।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा (Karan Mahara) ने भी दावा किया कि 2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस के पास मजबूत प्रत्याशी हैं। इनके अनुसार कुछ कमजोर नेता सत्ता के बिना नहीं रह सकते और इसी कारण पार्टी छोड़कर गये हैं, लेकिन कांग्रेस के पास दूसरे मजबूत उम्मीदवार मौजूद हैं।

2027 के चुनाव में अभी समय है, इसलिए वर्तमान राजनीतिक स्थिति को अंतिम प्रत्याशी सूची या चुनावी परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता। कांग्रेस के लिए चुनौती यह होगी कि वह जिन सीटों पर पुराने चेहरे उपलब्ध नहीं हैं वहां समय रहते मजबूत स्थानीय नेतृत्व तैयार कर सके। वहीं भाजपा के लिए बाहर से आये नेताओं और पुराने संगठनात्मक दावेदारों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में दोनों दलों की संगठनात्मक तैयारियां और टिकट की संभावित दावेदारियां उत्तराखंड की चुनावी राजनीति की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संकेत बन सकती हैं।

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