नवीन समाचार, देहरादून, 17 अगस्त 2026 (Mother-Daughter Lost Life by Current)। उत्तराखंड के देहरादून जनपद के ऋषिकेश स्थित खदरी क्षेत्र में तेज वर्षा के दौरान सड़क पर गिरे बिजली के तार की चपेट में आने से 26 वर्षीय सुमन और उनकी दो वर्षीय बेटी सृष्टि की मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि तार टूटने के बाद भी उसमें बिजली का प्रवाह जारी रहा और सड़क पर जमा पानी में करंट फैल गया, जिससे मां-बेटी इसकी चपेट में आ गईं। घटना के बाद एम्स ऋषिकेश में ग्रामीणों ने हंगामा कर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की, जबकि प्रशासन ने लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
घर लौटते समय सड़क पर मौत बनकर पड़ा था बिजली का तार

घटना रविवार देर शाम की बताई गई है। खदरी ग्राम प्रधान संगीता थपलियाल के अनुसार, शिव मंदिर गली निवासी सुमन पत्नी हरपाल जेठुडी अपनी दो वर्षीय बेटी सृष्टि के साथ मोटा प्लाट स्थित अपनी बहन के घर गई थीं। तेज वर्षा के बीच वह बेटी और बेटे के साथ वापस घर लौट रही थीं।
इसी दौरान मार्ग पर बिजली का एक तार टूटकर गिरा हुआ था। बारिश और अंधेरे के कारण तार दिखाई नहीं दिया। सुमन जैसे ही सड़क पर भरे पानी के संपर्क में आईं, वह करंट की चपेट में आ गईं और उनकी दो वर्षीय बेटी भी इसकी चपेट में आ गई। दुर्घटना के बाद बेटी ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद सुमन का बेटा घबरा गया और घर जाकर परिजनों को सूचना दी। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो सड़क पर बिजली का तार पड़ा हुआ था और मां-बेटी गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में थीं। लोग दोनों को तत्काल एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया गया है कि दो वर्षीय सृष्टि ने करंट लगने के बाद मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने यूपीसीएल की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, मुकदमा दर्ज करने की मांग
मां-बेटी की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने यूपीसीएल के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली का तार टूटने के बाद भी लाइन बंद नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि समय रहते बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती तो हादसा टाला जा सकता था।
ग्रामीणों और परिजनों ने एम्स में हंगामा करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, निलंबन और मुकदमा दर्ज करने की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
हालांकि, ऊर्जा निगम ऋषिकेश के अधिशासी अभियंता शक्ति प्रसाद के अनुसार तार टूटने के बाद नीचे बह रहे पानी के संपर्क में आने से यह हादसा हुआ।
आठ लाख रुपये मुआवजे की घोषणा, ग्रामीणों ने कहा- जिम्मेदारी भी तय हो
घटना के बाद ऊर्जा निगम की ओर से पीड़ित परिवार को आठ लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई। लेकिन परिजन और ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है और घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजीव चौहान ने भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने तथा संबंधित अधिकारियों और प्रबंध निदेशक सहित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटाने की मांग भी उठाई।
एसडीएम ने कहा- लापरवाही मिली तो निलंबन होगा
ऋषिकेश की एसडीएम कुमकुम जोशी ने कहा कि विद्युत विभाग के कर्मचारियों को पहले भी सतर्क रहने के लिए कहा गया था और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि जिनके स्तर से समय पर कार्रवाई नहीं हुई, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर निलंबन की कार्रवाई होगी।
एसडीएम ने ग्रामीणों से पीड़ित परिवार को इस दुख की घड़ी में कुछ समय अकेला रहने देने की अपील भी की।
21 जुलाई को लाइनमैन की मौत के बाद फिर उठे सवाल
खदरी क्षेत्र में बिजली से जुड़ी यह पहली घटना नहीं बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले 21 जुलाई को लाइनमैन प्रदीप कश्यप की भी बिजली का फॉल्ट ठीक करने के दौरान करंट लगने से मौत हो गई थी।
उस घटना के बाद भी स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। विभागीय जांच के बाद एक अधिकारी सहित कुछ कर्मचारियों के तबादले किए जाने की बात सामने आई थी। अब मां-बेटी की मौत के बाद एक बार फिर क्षेत्र में बिजली की लाइनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल
इस घटना ने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही खड़ा किया है कि बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिरने के बाद उसमें बिजली का प्रवाह क्यों जारी रहा और बारिश के दौरान सड़क पर जमा पानी को सुरक्षित क्यों नहीं किया जा सका। फिलहाल ग्रामीण पूरे घटनाक्रम की जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
मां-बेटी की मौत ने बारिश के मौसम में खुले या टूटे बिजली तारों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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