बनबसा में धामी कैबिनेट के 24 बड़े फैसले: युवाओं के लिए ₹200 करोड़, चिकित्सकों के लिए बढ़ा मानदेय, निजी विश्वविद्यालयों की जमीन की शर्त बदली

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नवीन समाचार, चंपावत, 4 अक्टूबर 2026 (24 Major Decisions in Dhami Cabinet) में पहली बार चंपावत (Champawat) जनपद के बनबसा (Banbasa) में हुई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। बैठक में युवाओं के कौशल विकास, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, निजी विश्वविद्यालयों, भूमि अधिकार, नजूल भूमि, वन भूमि हस्तांतरण, कर्मचारियों की संपत्ति के विवरण, पंतनगर एयरपोर्ट, कुक्कुट पालन, वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े फैसले किए गए।

24 Major Decisions in Dhami Cabinet
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बैठक के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 के लिए पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये का प्रावधान, करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को लाभ, राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि, निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि संबंधी शर्त में बदलाव और पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तार के लिए ₹66.2916 करोड़ की अवशेष धनराशि जारी करने की मंजूरी शामिल है।

राज्य गठन के लगभग 26 वर्ष बाद चंपावत में पहली बार कैबिनेट बैठक होने के कारण भी इसे प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि भविष्य में मंत्रिमंडल की बैठकें केवल देहरादून तक सीमित न रखकर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी।

1. युवाओं के लिए ₹200 करोड़ की कौशल संवर्धन योजना

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता, उद्यमिता और व्यावहारिक दक्षता बढ़ाना है।

योजना के अंतर्गत राज्य के राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 1.19 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना पर पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

योजना में विद्यार्थियों को उनकी डिग्री के साथ कौशल आधारित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। प्रत्येक सेमेस्टर में छह क्रेडिट के कौशल पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) सहित नई तकनीकों और रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसका सीधा उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी केवल पारंपरिक डिग्री लेकर रोजगार तलाशने के बजाय उद्योग और बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप अतिरिक्त कौशल के साथ उच्च शिक्षा पूरी करें।

2. जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा

कैबिनेट ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोन्स्ट्रेटर के वेतन/मानदेय के पुनर्निर्धारण को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार पहले यह राशि लगभग 75 हजार रुपये थी, जिसे बढ़ाकर एक लाख रुपये से अधिक किया गया है।

इस निर्णय को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने और इन पदों पर रिक्तियों को कम करने के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। आपके उपलब्ध कैबिनेट विवरण में यह भी कहा गया है कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में इन पदों की कमी को देखते हुए देय वेतन और मानदेय का पुनर्निर्धारण किया गया है।

3. निजी विश्वविद्यालय खोलने की जमीन की शर्त बदली

कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित नीति एवं मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है।

अब 10 एकड़ भूमि की अनिवार्यता के स्थान पर 20,000 वर्गमीटर भूमि में भी निजी विश्वविद्यालय स्थापित किया जा सकेगा। इसके साथ ही पांच करोड़ रुपये के गारंटी फंड की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

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पर्वतीय क्षेत्रों के लिए न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र तथा मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम 20,000 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र से संबंधित व्यवस्था भी संशोधित मानकों में शामिल है। निजी विश्वविद्यालयों के प्रस्तावों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अलग मूल्यांकन मानक निर्धारित किए जाने हैं।

इस बदलाव से निजी उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए मौजूदा भूमि संबंधी बाध्यता कम होने की संभावना है, हालांकि वास्तविक स्थापना संबंधित गुणवत्ता और अन्य नियामकीय मानकों के पालन पर निर्भर करेगी।

4. पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए ₹66.29 करोड़

कैबिनेट ने पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट (Pantnagar Greenfield Airport) के विस्तार से संबंधित हस्तांतरित परिसंपत्तियों के लिए उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (TDC) को ₹66.2916 करोड़ की अवशेष धनराशि जारी करने को मंजूरी दी है।

यह धनराशि कॉरपोरेशन की कार्ययोजना के अनुसार निर्माण एवं अन्य निर्धारित कार्यों पर खर्च की जाएगी।

5. कर्मचारियों को संपत्ति का विवरण देना होगा

कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है।

इसके तहत कर्मचारियों की चल-अचल और बहुमूल्य संपत्तियों से संबंधित विवरण देने के प्रावधानों को वर्तमान परिस्थितियों और अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के अनुरूप स्पष्ट किया जाएगा।

समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के कर्मचारियों से संबंधित संपत्ति विवरण की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट एवं व्यवस्थित करने का उद्देश्य कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी का नियमानुसार अभिलेखीकरण करना है।

6. वर्ग-3 और वर्ग-4 भूमि के पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार

कैबिनेट ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

नैनीताल जनपद के नगर पंचायत लालकुआं में संबंधित पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार दिए जाएंगे।

वहीं देहरादून के परगना जौनसार-बावर में वर्ग-4 भूमि के विनियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। संबंधित भूमि के विनियमितीकरण की अवधि को 2004 के सर्किल रेट के आधार पर एक वर्ष के लिए बढ़ाया जाएगा, जिसके बाद वर्तमान सर्किल रेट लागू होगा।

7. नजूल भूमि के नियमितीकरण के लिए अभियान

कैबिनेट ने प्रदेश में नजूल भूमि (Nazul Land) के नियमितीकरण के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

इसमें खटीमा, बनबसा और चंपावत के साथ प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में मौजूद नजूल भूमि से जुड़े मामलों को भी नियमानुसार नियमित करने की प्रक्रिया शामिल होगी।

यह फैसला ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण है जहां लंबे समय से नजूल भूमि के नियमितीकरण की प्रक्रिया लंबित रही है।

8. वन भूमि मामलों के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई

वन भूमि हस्तांतरण (Forest Land Transfer) के मामलों के तकनीकी परीक्षण, ऑनलाइन संरेखण (Alignment) की जांच और नोडल कार्यालय को मजबूत करने के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (Project Management Unit-PMU) बनाने को मंजूरी दी गई है।

इसके लिए छह पद स्वीकृत किए गए हैं। इसका उद्देश्य वन भूमि से जुड़े प्रस्तावों की तकनीकी जांच, निगरानी और विभिन्न स्तरों पर समन्वय को बेहतर करना है।

9. वन विभाग में विभागाध्यक्ष की व्यवस्था बदली

मंत्रिमंडल ने वन विभाग में विभागाध्यक्ष से जुड़ी व्यवस्था में भी परिवर्तन को मंजूरी दी है।

निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व को विभागाध्यक्ष की सूची से हटाया जाएगा तथा मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं, नैनीताल और मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल, पौड़ी को विभागाध्यक्ष घोषित किया जाएगा।

सरकार के अनुसार इससे वनाग्नि, दैवीय आपदा, बाढ़ नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में निर्णय लेने और कार्रवाई में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।

10. पंतनगर के अलावा पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभागों में समन्वय

पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभागों के बीच बेहतर समन्वय, पर्यवेक्षण और प्रशासनिक एकरूपता के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित करने को मंजूरी दी गई है।

इससे तीनों विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी तथा केंद्र और राज्य की योजनाओं के बेहतर समन्वय की व्यवस्था मजबूत करने का उद्देश्य है।

11. पहाड़ी कुक्कुट पालकों के लिए लगभग ₹2 करोड़ की सहायता

पर्वतीय क्षेत्रों में कुक्कुट पालन करने वाले लाभार्थियों के लिए कुक्कुट आहार (Poultry Feed) पर सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार इससे लगभग 2,000 कुक्कुट पालकों को लाभ मिलेगा और लगभग दो करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।

कैबिनेट ने कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना में भुगतान की व्यवस्था भी बदली है। अब वर्तमान CBDC/e-RUPI आधारित व्यवस्था के स्थान पर आधार सीडेड अथवा आधार लिंक्ड बैंक खाते के माध्यम से DBT से भुगतान किया जाएगा।

12. राजकोषीय घाटे की सीमा 3 प्रतिशत

कैबिनेट ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी है।

इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के तीन प्रतिशत पर तय की गई है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा GSDP के 30 प्रतिशत रखी गई है। आपदा और सुरक्षा से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में नियमानुसार अतिरिक्त छूट का प्रावधान रहेगा।

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यह फैसला राज्य के मध्यम अवधि के वित्तीय प्रबंधन और ऋण अनुशासन से जुड़ा है।

13. संपत्ति की रजिस्ट्री में PAN सत्यापन

स्टाम्प एवं निबंधन विभाग में संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े लेन-देन में क्रेता, विक्रेता तथा अन्य संबंधित पक्षों द्वारा दिए जाने वाले PAN (Permanent Account Number) के सत्यापन की व्यवस्था लागू करने को मंजूरी दी गई है।

इसका उद्देश्य गलत अथवा फर्जी PAN के इस्तेमाल को रोकना और आयकर विभाग को भेजी जाने वाली रिपोर्टिंग में आंकड़ों की शुद्धता बढ़ाना है।

14. छठवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में रखी जाएगी

छठवें राज्य वित्त आयोग की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में रखने की मंजूरी दी गई है।

आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए राज्य के शुद्ध कर राजस्व से स्थानीय निकायों को हस्तांतरण तथा उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक ढांचे से संबंधित सिफारिशें की हैं।

विधानसभा में रिपोर्ट रखे जाने के बाद स्थानीय निकायों के वित्तीय संसाधनों और राज्य से होने वाले हस्तांतरण की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय होगी।

15. जिला मजिस्ट्रेट सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेंगे

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 19(3) को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने की मंजूरी दी गई है।

निर्धारित परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को 14 दिन की सूचना देने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को संबंधित मामले में सहायक लोक अभियोजक (Assistant Public Prosecutor) नियुक्त कर सकेंगे।

16. सतर्कता अधिष्ठान की अधिसूचना में बदलाव

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू होने के बाद सतर्कता अधिष्ठान से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में नई आपराधिक संहिता की धाराओं के अनुरूप आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य पुराने कानूनी संदर्भों को वर्तमान आपराधिक कानून के अनुरूप करना है।

17. सतर्कता अधिष्ठान के ढांचे में बदलाव

सतर्कता अधिष्ठान के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई है।

इसके तहत आठ आरक्षी नागरिक पुलिस, एक आरक्षी डाक रनर और दो आरक्षी चालक सहित कुल 11 पद समाप्त किए जाएंगे। दूसरी ओर मुख्य आरक्षी नागरिक पुलिस के पांच पद बढ़ाए जाएंगे तथा अपर उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के तीन, मुख्य आरक्षी डाक रनर का एक, मुख्य आरक्षी चालक का एक और अपर उपनिरीक्षक चालक का एक नया पद सृजित किया जाएगा।

अर्थात सतर्कता अधिष्ठान के उपलब्ध मानव संसाधन को उसकी वर्तमान कार्य आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्गठित किया जाएगा।

18. समूह ‘ग’ के पदों पर साक्षात्कार की व्यवस्था में बदलाव

राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े संशोधन नियमों को मंजूरी दी गई है।

जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को संबंधित परिशिष्ट से हटाया जाएगा। वहीं उप कारापाल के पद पर शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा होने के कारण साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त की जाएगी।

इसका प्रभाव भर्ती प्रक्रिया में चयन के चरणों पर पड़ेगा।

19. जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी का पद लोक सेवा आयोग के दायरे से बाहर

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के कार्यों के परिसीमन से संबंधित संशोधन विनियम, 2026 को मंजूरी दी गई है।

जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी का पद लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा। उपलब्ध विवरण के अनुसार सेवा नियमावली में यह राजपत्रित समूह ‘ख’ का पद है।

इसी क्रम में प्रांतीय रक्षक दल से जुड़े अधिकारियों के पद को समूह ‘ख’ में शामिल किए जाने का निर्णय भी सामने आया है।

20. परिसंपत्ति मुद्रीकरण की आय में 92 प्रतिशत संबंधित सार्वजनिक अभिकरण को

उत्तराखंड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास और विनियमन अधिनियम की धारा 49 के तहत अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी गई है।

इसके तहत सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश अथवा मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को देने का प्रावधान किया गया है।

मुद्रीकरण से प्राप्त धनराशि का उपयोग संबंधित अवस्थापना एवं पूंजीगत परियोजनाओं के लिए किए जाने की व्यवस्था से इसे जोड़ा गया है।

21. 1873 का नहर एवं जल निकास अधिनियम खत्म करने की तैयारी

कैबिनेट ने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को निरस्त करने तथा उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 को विधानसभा में रखने की मंजूरी दी है।

राज्य के पर्वतीय और मैदानी दोनों प्रकार के भौगोलिक क्षेत्रों की अलग-अलग जरूरतों को देखते हुए सिंचाई एवं जल निकासी से संबंधित कानूनी ढांचे को राज्य के अनुरूप बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जा सकता है।

22. नरेंद्रनगर में खुलेगा उप निबंधक कार्यालय

टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर में उप निबंधक कार्यालय (Sub-Registrar Office) खोलने को मंजूरी दी गई है।

इसके क्षेत्राधिकार में नरेंद्रनगर तहसील के 98 और पावकी देवी उप तहसील के 35, यानी कुल 133 राजस्व गांव शामिल होंगे।

इससे इन क्षेत्रों के लोगों को भूमि और संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े कार्यों के लिए दूर के कार्यालयों पर निर्भरता कम होगी।

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23. वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा की नई नियमावली

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा (Vector Borne Disease Control Service) के कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को निर्धारित करने के लिए उत्तराखंड वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई है।

इससे संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और विभागीय व्यवस्था के लिए अलग नियामक ढांचा स्पष्ट होगा।

24. भूमि व्यवस्था, सौंदर्यीकरण और प्रशासनिक प्रावधानों में बदलाव

कैबिनेट ने उत्तराखंड में लागू उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य संशोधित अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए प्रक्रिया एवं दिशा-निर्देश स्पष्ट करना है।

इसके साथ ही न्यायाधिकरण, देहरादून के आदेश और उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की संस्तुति के आधार पर 7 जनवरी 2022 के शासनादेश से गठित सौंदर्यीकरण उपशाखा को निक्षेपित किए जाने को भी मंजूरी दी गई है।


बनबसा में कैबिनेट बैठक का संदेश भी महत्वपूर्ण

चंपावत में पहली बार और राज्य की राजधानी से बाहर बनबसा में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित होने को केवल स्थान परिवर्तन के रूप में नहीं देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि भविष्य में भी कैबिनेट बैठकें प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को शासन के स्तर पर सीधे रखा जा सके।

बनबसा-टनकपुर क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा है। ऐसे में बैठक के दौरान सीमांत क्षेत्रों के विकास, आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सरकार की प्राथमिकता सामने आई।

कुल मिलाकर बनबसा की बैठक में लिए गए 24 निर्णयों में युवा कौशल और रोजगार, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, भूमि अधिकार, वित्तीय अनुशासन, सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही, कृषि-पशुपालन, आधारभूत ढांचा और प्रशासनिक सुधार प्रमुख रूप से सामने आए हैं।

इनमें सबसे अधिक व्यापक प्रभाव वाली योजनाओं में 1.19 लाख विद्यार्थियों को लक्षित करने वाली ₹200 करोड़ की कौशल संवर्धन योजना, निजी विश्वविद्यालयों के लिए बदले गए मानक, मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में वृद्धि तथा भूमि और नजूल संबंधी निर्णय शामिल हैं।

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