हाईकोर्ट ने सरकार और डीएम से पूछा: चिन्हित अतिक्रमण पर क्या कार्रवाई हुई, दो सप्ताह में मांगा जवाब
नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अगस्त 2026 (Nainital HIgh Court News 5 August 2026)। नैनीताल (Nainital)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने हल्द्वानी (Haldwani) के मुखानी चौराहे (Mukhani Chowk) को जाम (Traffic Congestion) मुक्त कराने और वहां फ्लाईओवर (Flyover) निर्माण की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation-PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार (State Government) और जिलाधिकारी (District Magistrate-DM) से पूछा है कि पूर्व में चिन्हित किए गए अतिक्रमण (Encroachment) पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं तथा मामले की अगली सुनवाई भी दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
बुधवार को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति (Justice) सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की खंडपीठ (Division Bench) में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हल्द्वानी के कई चौराहों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है तथा सड़कों के चौड़ीकरण (Road Widening) का कार्य जारी है। वहीं मुखानी चौराहे से अतिक्रमण हटाने के लिए 71 लोगों को नोटिस (Notice) जारी किए गए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता (Advocate) दुष्यंत मैनाली (Dushyant Mainali) ने न्यायालय को बताया कि वर्ष 2018 में मुखानी चौराहे पर लगातार लगने वाले जाम को देखते हुए फ्लाईओवर निर्माण का सुझाव दिया गया था। इसके बाद प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर सर्वे (Survey) कराया, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार ने उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। उन्होंने कहा कि यह शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है, जहां प्रतिदिन घंटों जाम लगता है। फ्लाईओवर बनने से विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आम यात्रियों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी पूरन चंद्र जोशी (Puran Chandra Joshi) ने वर्ष 2018 में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कालाढूंगी रोड (Kaladhungi Road) पर, विशेषकर मुखानी चौराहे के आसपास, प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इससे विद्यालयों (Schools), कार्यालयों (Offices) तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने वाले लोगों का काफी समय व्यर्थ होता है। उन्होंने यातायात समस्या के स्थायी समाधान के लिए फ्लाईओवर निर्माण की मांग की थी।
वन, राजमार्ग और राजस्व भूमि पर अतिक्रमण मामले में मुख्य सचिव को दो सप्ताह की मोहलत
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वन विभाग (Forest Department), राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway), राजकीय राजमार्ग (State Highway), वन भूमि (Forest Land) तथा राजस्व भूमि (Revenue Land) पर हुए कथित अवैध अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव (Chief Secretary) को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।
बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को तलब
नैनीताल। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) संबंधी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority-SLSA) की रिपोर्ट के आधार पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य सचिव (Health Secretary) को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा है कि बड़े पैमाने पर चिकित्सकों (Doctors) के स्थानांतरण (Transfer) के बाद रिक्त पदों पर नए चिकित्सकों की नियुक्ति (Appointment) के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है। न्यायालय ने इस संबंध में सुझाव भी प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही नैनीताल स्थित सेनेटोरियम अस्पताल (Sanatorium Hospital) को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (Super Speciality Hospital) बनाने के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) भी तलब की है।
कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट के लिए स्थान चिन्हित करें: हाईकोर्ट
नैनीताल। पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में अस्पतालों (Hospitals) के जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट (Biomedical Waste) के खुले में, नदी-नालों तथा कूड़ेदानों में फेंके जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट (Common Medical Waste Plant) के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित कर न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttarakhand Pollution Control Board-UKPCB) को जिले के सभी अस्पतालों का निरीक्षण कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल कर्मचारियों को मेडिकल वेस्ट प्रबंधन (Medical Waste Management) का प्रशिक्षण (Training) देने को भी कहा।
बिना नोटिस यूट्यूब चैनल हटाने के खिलाफ याचिका खारिज
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने यूट्यूब (YouTube) द्वारा बिना नोटिस (Notice) चैनल हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी (Justice Manoj Kumar Tiwari) की एकलपीठ (Single Bench) ने कहा कि यूट्यूब भारतीय संविधान (Constitution of India) के अनुच्छेद 12 (Article 12) के तहत ‘राज्य’ की परिभाषा में नहीं आता। इसलिए यूट्यूब जैसे निजी मंच (Private Platform) के विरुद्ध संविधान के अनुच्छेद 226 (Article 226) के अंतर्गत रिट याचिका (Writ Petition) सुनवाई योग्य नहीं है।
मामला पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) निवासी स्वाति उर्फ स्मृति नेगी (Swati alias Smriti Negi) से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने न्यायालय से हटाए गए चैनल, सामग्री (Content) और कॉपीराइट स्ट्राइक (Copyright Strike) हटाकर चैनल को पूर्व स्थिति में बहाल करने के निर्देश देने की मांग की थी। उनके अधिवक्ता ने कहा कि तीन कथित कॉपीराइट स्ट्राइक का हवाला देकर बिना नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए यूट्यूब अकाउंट (YouTube Account) हटा दिया गया।
स्मैक तस्करी के दो दोषियों को 12-12 वर्ष का कठोर कारावास, 1.20-1.20 लाख रुपये अर्थदंड
नैनीताल। विशेष न्यायाधीश (Special Judge) एनडीपीएस (NDPS) एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Additional District and Sessions Judge) संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) की अदालत ने स्मैक (Smack) तस्करी (Drug Trafficking) के मामले में दोषी करार दिए गए मोहम्मद आमिर (Mohammad Aamir) और मोहम्मद मोहित (Mohammad Mohit), दोनों निवासी अमरिया (Amariya), जिला पीलीभीत (Pilibhit) को 12-12 वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) तथा प्रत्येक पर 1.20 लाख रुपये के अर्थदंड (Fine) की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने पर दोनों को छह-छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास (Simple Imprisonment) भुगतना होगा।
मामला थाना चोरगलिया (Chorgalia Police Station), जिला नैनीताल का है। पुलिस (Police) ने 23 दिसंबर 2024 को चेकिंग (Checking) के दौरान दोनों अभियुक्तों के कब्जे से 250.94 ग्राम स्मैक बरामद की थी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष (Defence) ने अभियुक्तों की कम आयु, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की। वहीं अभियोजन (Prosecution) की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) (Assistant District Government Counsel-Criminal) पूजा साह (Pooja Sah) ने तर्क दिया कि बरामद स्मैक की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी (Commercial Quantity) में आती है और अभियुक्त इसे युवाओं को बेचकर समाज को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे थे।
अदालत ने मामले के सभी तथ्यों, परिस्थितियों और बरामद मादक पदार्थ (Narcotic Substance) की मात्रा को अत्यंत गंभीर मानते हुए 4 अगस्त 2026 को यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोषियों द्वारा जेल (Jail) में बिताई गई पूर्व अवधि को मुख्य सजा में समायोजित (Set-off) किया जाएगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
