हेमकुंड साहिब हेलीपैड का अस्थायी अधिग्रहण अवैध, हाईकोर्ट ने आदेश रद्द कर 15 दिन में कब्जा लौटाने को कहा
नवीन समाचार, नैनीताल, 26 अगस्त 2026 (Nainital High Court News 26 Aug 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने चमोली (Chamoli) जनपद के गोविंद घाट (Govind Ghat) स्थित हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) हेलीपैड (Helipad) के अस्थायी अधिग्रहण को गैरकानूनी और प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन माना है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी (Justice Ravindra Maithani) की एकलपीठ ने जिला प्रशासन चमोली (District Administration Chamoli) द्वारा 23 मई 2024 और 27 जून 2025 को जारी अधिग्रहण आदेशों को निरस्त करते हुए 15 दिनों के भीतर हेलीपैड का पूरा नियंत्रण और कब्जा संबंधित कंपनी को वापस सौंपने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अवैध अधिग्रहण की अवधि के लिए उचित मुआवजा (Compensation) और लैंडिंग शुल्क (Landing Charges) का भुगतान करने को भी कहा है।
बिना नोटिस अस्थायी अधिग्रहण को हाईकोर्ट ने माना कानून का उल्लंघन
यह मामला मैसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (M/s Deccan Charters Private Limited) की ओर से दायर रिट याचिकाओं (Writ Petitions) से जुड़ा है। कंपनी वर्ष 2011 से गोविंद घाट से श्री हेमकुंड साहिबजी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा (Helicopter Service) का संचालन कर रही थी। कंपनी ने निजी भूस्वामियों से भूमि लीज (Lease) पर लेकर भारी लागत से वहां हेलीपैड और यात्री लाउंज (Passenger Lounge) विकसित किया था।
अदालत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 (Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) की धारा 81(2) के तहत किसी संपत्ति के अस्थायी अधिग्रहण से पहले प्रभावित पक्ष को लिखित नोटिस (Written Notice) और पर्याप्त समय दिया जाना अनिवार्य था। न्यायालय के अनुसार राज्य प्रशासन इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करने में पूरी तरह विफल रहा।
मामले के अनुसार मई 2024 में चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा (Chardham and Hemkund Sahib Yatra) शुरू होने के दौरान नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (Civil Aviation Development Authority) और जिला प्रशासन ने आपात स्थिति का हवाला देते हुए हेलीपैड का ताला तोड़कर कब्जा ले लिया था। इसके बाद हेलीपैड का संचालन पवन हंस लिमिटेड (Pawan Hans Limited) को सौंप दिया गया था।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि यात्रा मौसम (Yatra Season) के दौरान जनहित (Public Interest) में यह कदम उठाना आवश्यक था और कंपनी की लीज अवधि का पंजीकरण समाप्त हो चुका था। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि 24 घंटे का समय देकर या बिना पूर्व सूचना के किसी की संपत्ति का अधिग्रहण करना कानून के अनुरूप नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लीज के अपंजीकृत होने के बावजूद कंपनी उस भूमि पर वास्तविक कब्जे (Actual Possession) में थी। इसलिए भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 3(एकस) के तहत वह हितबद्ध व्यक्ति (Interested Person) की श्रेणी में आती है और उसे नोटिस प्राप्त करने तथा अपनी बात रखने का विधिक अधिकार था।
अदालत ने चमोली के जिलाधिकारी (District Magistrate, Chamoli) को आदेश दिया कि 15 दिनों के भीतर गोविंद घाट स्थित हेलीपैड का पूरा नियंत्रण और कब्जा याचिकाकर्ता कंपनी को वापस सौंपा जाए तथा इसकी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) हाईकोर्ट में दाखिल की जाए।
इसके साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि अवैध अधिग्रहण की पूरी अवधि के लिए कंपनी को यूकाडा (UCADA) की हेलीपैड नीति 2023-24 (Helipad Policy 2023-24) अथवा लैंडिंग दर सूची 2018 (Landing Rate List 2018) में निर्धारित बाजार दरों के अनुसार उचित मुआवजा और लैंडिंग शुल्क का भुगतान किया जाए।
मंसूरी के होटल टूरिस्ट होम पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति का मामला, हाईकोर्ट ने पीसीबी को दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए
नैनीताल (Nainital)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंसूरी (Mussoorie) के होटल टूरिस्ट होम (Hotel Tourist Home) पर लगाई गई 9,78,750 रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) के मामले में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttarakhand Pollution Control Board) को दोबारा सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि होटल संचालक को व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) का अवसर देने के बाद ही नया आदेश पारित किया जाए। तब तक बोर्ड होटल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई (Punitive Action) नहीं करेगा।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Chief Justice Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Justice Siddharth Shah) की खंडपीठ ने होटल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 16 अक्टूबर 2025 के नोटिस को चुनौती देते हुए कहा था कि बोर्ड ने उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना 9,78,750 रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगा दी। इस मामले में होटल संचालक पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal), नई दिल्ली (New Delhi) की प्रधान पीठ (Principal Bench) में पहुंचा था।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 17 अप्रैल 2025 को पूर्व में जारी नोटिस निरस्त करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन करते हुए नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद बोर्ड ने 27 मई 2025 को नया नोटिस जारी किया और होटल की ओर से जवाब दिए जाने के बाद 16 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी किया।
होटल की ओर से हाईकोर्ट में यह भी कहा गया कि उसने 20 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन सुनवाई का अवसर दिए बिना ही आदेश पारित कर दिया गया। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता आदित्य प्रताप सिंह (Advocate Aditya Pratap Singh) ने अदालत को आश्वस्त किया कि होटल की 20 जुलाई 2026 की ओर से दिए गए अभ्यावेदन (Representation) पर व्यक्तिगत सुनवाई के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि तब तक होटल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
























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