नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अक्टूबर 2026 (No Relief for Sahu-Husband of Minister)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने राज्य की काबीना मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को गिरफ्तारी से राहत देने और उनके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी (FIR) निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता रेखा आर्या को नोटिस जारी कर 3 नवंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मंत्री की ओर से लगाए गए मारपीट, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग, धमकी और कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों में कथित जालसाजी के आरोपों से संबंधित है। इन आरोपों की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है, जबकि गिरधारी लाल साहू ने आरोपों को निराधार बताते हुए अपने विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी है।
पहली सुनवाई के बाद दूसरी पीठ में पहुंचा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरधारी लाल साहू ने अपने विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। गत 28 अक्टूबर को न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई थी। हालांकि, न्यायमूर्ति पुरोहित ने यह बताते हुए सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया कि वह पहले गिरधारी लाल साहू के अधिवक्ता रह चुके हैं। इसके बाद मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखा गया।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब मांगा। उपलब्ध समाचार विवरणों के अनुसार, न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तिथि निर्धारित की है। फिलहाल साहू को गिरफ्तारी से संरक्षण देने अथवा प्राथमिकी निरस्त करने का आदेश नहीं दिया गया है।
याचिका में साहू की ओर से कहा गया है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप झूठे हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने न्यायालय से प्राथमिकी निरस्त करने तथा गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने अपनी याचिका में रेखा आर्या पर भी लगभग 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह आरोप भी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।
15 अक्टूबर को दर्ज हुई थी प्राथमिकी
रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के विरुद्ध शिकायत दी थी। इसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में उन्होंने कथित मारपीट, उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग, जान से मारने की धमकी और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियों से संबंधित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का कथित दुरुपयोग कर उन्हें निदेशक पद से हटाने का प्रयास किया गया।
रेखा आर्या ने यह आरोप भी लगाया कि विवाह के समय उन्हें पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी। ये सभी शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना है।
शिकायत के बाद रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया था। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के डालनवाला स्थित कृष्णा मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने निजी मामले को सार्वजनिक करने का निर्णय इसलिए लिया, ताकि घरेलू हिंसा का सामना करने वाली अन्य महिलाएं भी उसके विरुद्ध आवाज उठा सकें।
कथित ऑडियो की प्रामाणिकता जांच के दायरे में
विवाद को व्यापक चर्चा मिलने का एक प्रमुख कारण रेखा आर्या की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गईं दो कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं। इनमें गिरधारी लाल साहू और कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी के बीच बातचीत होने का दावा किया गया। कथित बातचीत में कानूनी सहायता, जमानत, पैसों, फ्लैट खरीदने और रेखा आर्या के मंत्री पद से जुड़े विषयों का उल्लेख बताया गया। रेखा आर्या ने इन रिकॉर्डिंग को अपने आरोपों से जोड़ते हुए हत्या की साजिश की आशंका जताई।
दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर आरोपों को खारिज किया और कथित ऑडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से तैयार किया गया फर्जी ऑडियो बताया। उन्होंने रेखा आर्या पर लगभग 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जांच कराने की मांग भी की।
पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के आरोपों और उपलब्ध ऑडियो-वीडियो सामग्री की जांच शुरू की है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कथित ऑडियो को उसकी प्रामाणिकता और मामले से संबंधित होने की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Forensic Science Laboratory) भेजने की प्रक्रिया की गई। इसलिए रिकॉर्डिंग में कही गई बातों को फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
दस सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच
मामले की जांच के लिए पुलिस ने एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किया था। शुरुआती पुलिस संबंधी विवरणों में इसे दस सदस्यीय दल बताया गया, जबकि कुछ समाचार रिपोर्टों में नौ सदस्यीय दल का उल्लेख भी हुआ है। एसआईटी रेखा आर्या के बयान दर्ज कर चुकी है और उनसे प्राप्त साक्ष्यों सहित अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
जांच दल गिरधारी लाल साहू से पूछताछ और उनका पक्ष दर्ज करने के लिए बरेली भी पहुंचा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके घर पर नहीं मिलने के बाद परिवार को नोटिस दिया गया था और जांच में सहयोग करने को कहा गया था। साहू के विरुद्ध लगाए गए आरोपों, कथित दस्तावेजी जालसाजी और ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।
कुछ दिन पहले एसआईटी द्वारा मंत्री के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि कर्मचारियों ने रेखा आर्या के लिए कथित जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी आरोपों की पुष्टि की। हालांकि, जांच दल की ओर से इन बयानों के आधार पर आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित घोषित नहीं किया गया है।
विधानसभा में भी उठा था मामला
इस विवाद की गूंज 28 अक्टूबर को भराड़ीसैंण में आयोजित उत्तराखंड विधानसभा के सत्र में भी सुनाई दी थी। कांग्रेस विधायकों ने रेखा आर्या के पति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों और जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष ने मंत्री से संबंधित लगभग 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति के आरोपों पर भी चर्चा कराने की मांग की थी।
विरोध के दौरान कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े लहराए, सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की और सदन के वेल में कागज फेंके। विपक्ष ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू की ओर से लगाए गए संपत्ति संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अब उच्च न्यायालय में 3 नवंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। राज्य सरकार और रेखा आर्या का पक्ष सामने आने के बाद न्यायालय याचिका पर आगे विचार करेगा। तब तक प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। पुलिस जांच और न्यायालय की कार्यवाही के परिणाम ही तय करेंगे कि दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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