नवीन समाचार, देहरादून, 6 नवंबर 2026 (UK-4 PCS Officers Granted Seniority)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में पीसीएस अधिकारियों की वरिष्ठता को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद पर अब विराम लगता दिखाई दे रहा है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेश के अनुपालन में राज्य शासन ने चार प्रमोटी यानी पदोन्नत पीसीएस अधिकारियों को एक अक्टूबर 2007 से डिप्टी कलेक्टर पद पर नियमित पदोन्नति और वरिष्ठता का लाभ देने का शासनादेश जारी कर दिया है।
इससे चंद्र सिंह मर्तोलिया, उत्तम सिंह चौहान, हरवीर सिंह और जगदीश चंद्र कांडपाल को वर्ष 2010 के स्थान पर वर्ष 2007 से वरिष्ठता निर्धारित होने के साथ वेतनमान, बकाया धनराशि और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति की प्रक्रिया में भी लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद शासन ने जारी किया निर्णय
यह विवाद चयन वर्ष 2007-08 की रिक्तियों के सापेक्ष पीसीएस संवर्ग में पदोन्नति और वरिष्ठता निर्धारण से जुड़ा है। प्रमोटी पीसीएस अधिकारी लंबे समय से एक अक्टूबर 2007 से अपनी नियमित पदोन्नति और वरिष्ठता निर्धारित करने की मांग कर रहे थे। वहीं सीधी भर्ती से नियुक्त पीसीएस अधिकारी इसका विरोध कर रहे थे। विवाद के कारण कार्मिक विभाग में वरिष्ठता निर्धारण का मामला लंबे समय तक लंबित रहा।
इस प्रकरण में नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने भी प्रमोटी अधिकारियों के पक्ष में निर्णय दिया था। इसके बाद राज्य सरकार और सीधी भर्ती के पीसीएस अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। जुलाई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीधी भर्ती के अधिकारियों की याचिका खारिज करते हुए याचिका दायर करने वाले प्रमोटी अधिकारियों को अक्टूबर 2007 से वरिष्ठता का लाभ देने के लिए तीन माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसी के अनुपालन में उत्तराखंड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने अब संशोधित शासनादेश जारी किया है।
चार अधिकारियों को पदोन्नति और वेतनमान का लाभ
शासनादेश के अनुसार चंद्र सिंह मार्तोलिया, उत्तम सिंह चौहान, हरवीर सिंह और जगदीश चंद्र कांडपाल को चयन वर्ष 2007-08 की रिक्तियों के सापेक्ष एक अक्टूबर 2007 से डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियमित पदोन्नति का लाभ प्रदान किया गया है। पहले इनकी पदोन्नति और वरिष्ठता के लिए वर्ष 2010 की तिथि प्रभावी थी।
संशोधित तिथि के आधार पर अब इन्हें नियमानुसार सेवा अवधि पूरी होने पर निम्नलिखित वेतनमानों का लाभ मिलेगा:
- पांच वर्ष की सेवा पूरी होने पर वरिष्ठ वेतनमान।
- 12 वर्ष की सेवा पूरी होने पर चयन श्रेणी वेतनमान।
- 14 वर्ष की सेवा पूरी होने पर विशेष श्रेणी वेतनमान।
इसके साथ ही संशोधित पदोन्नति तिथि के आधार पर देय बकाया धनराशि के भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
आईएएस में पदोन्नति की प्रक्रिया पर भी पड़ेगा प्रभाव
इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण पहलू चारों अधिकारियों की भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति (IAS Induction) से जुड़ा है। शासनादेश में संशोधित वरिष्ठता के आधार पर आईएएस संवर्ग में उपलब्ध रिक्तियों के सापेक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हालांकि, आईएएस में पदोन्नति का लाभ निर्धारित पात्रता, उपलब्ध रिक्तियों और चयन प्रक्रिया के अनुसार ही मिलेगा। वरिष्ठता की नई तिथि से इन अधिकारियों की सेवा संबंधी गणना और आगे की पदोन्नति की संभावनाएं प्रभावित होंगी।
इस प्रकार लंबे समय से न्यायालयों में चल रहे विवाद के बाद शासन के नए निर्णय से चार प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों को लगभग तीन वर्ष पहले की तिथि से वरिष्ठता और उससे जुड़े सेवा लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है। अब विभाग को संशोधित वरिष्ठता सूची, वेतनमान, बकाया भुगतान और आईएएस में पदोन्नति से संबंधित आगे की कार्यवाही पूरी करनी होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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