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‘नवीन समाचार’-‘आज़ाद के तीर’ के बाद नैनी झील में नौकायन पर तेज हुई चर्चा-मांगें

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नैनीताल का आकर्षण ऐसा ! दिल्ली से स्कूटी से बिना अनुमति पहुंच गए युवक

आम आदमी पार्टी ने नौका संचालन को लेकर भेजा ज्ञापन
नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जून 2020। ‘नवीन समाचार’-‘आज़ाद के तीर’ में गत 28 जून को ‘वो लकड़ी की कश्ती, वो नैनी झील का पानी ! और हाय, वो उसमें डूब गई’ शीर्षक से विशेष सामग्री प्रकाशित होने के बाद नैनी झील में नौकायन पर चर्चा-मांगें तेज हो गई है। कोरोना महामारी के कारण 22 मार्च को लॉकडाउन लागू होने से पर्यटक नगरी नैनीताल में बंद हुआ नौकाओं का संचालन अनलॉक के दो चरणों के बाद भी प्रारंभ नहीं हो पाया है। इससे नौका संचालकों की आजीविका ठप पड़ी है। इस संबंध में नाव संचालको की पीड़ा को देखते हुये आम आदमी पार्टी की नगर कार्यकारिणी ने सोमवार को डीएम नैनीताल को नौका संचालन शुरू कराने के संबंध में ज्ञापन सौंपा और शीघ्र नौका संचालन शुरू कराने की मांग रखी। ज्ञापन सौंपने वालों में नगर अध्यक्ष शाकिर अली व जिला मीडिया प्रभारी मो.खुर्शीद हुसैन शामिल रहे।

आज़ाद के तीर में आज : वो लकड़ी की कश्ती, वो नैनी झील का पानी ! और हाय, वो उसमें डूब गई…

नौका चालकों ने अपर आयुक्त को ज्ञापन सोंप की नौका संचालन शुरू करने की मांग
नैनीताल। नैनी झील में नौकाओं का संचालन करने वाले नौका चालकों ने सोमवार को अपर आयुक्त संजय कुमार खेतवाल से मुलाकात कर उन्हें मंडलायुक्त को संबोधित ज्ञापन सोंपा। ज्ञापन में कहा गया कि नगर में सैलानियों की आवक शुरू होने के साथ अब उन्हें नैनी झील में नौका संचालन की अनुमति देने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में नाव चालक संघ के अध्यक्ष राम सिंह बिष्ट, सचिव नैन सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष पूरन बोरा, उपाध्यक्ष युसूफ अहमद व प्रबंधक विक्रम बिष्ट आदि शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : कमल विहीन हुआ नैनीताल का पौराणिक कमल ताल, इलाज सिर्फ तीन फिट की जाली, वह भी मयस्सर नहीं ?

कमल ताल तब और अब। पूर्व में जून माह में ऐसे खिलते थे कमल और वर्तमान में यह है कमल ताल की स्थिति।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जून 2020। झीलों के जनपद में जिला मुख्यालय के करीबी पर्यटन स्थल नौकुचियाताल स्थित कमल के फूलों से महके रहने वाले और पर्यटकों के लिए बड़े आकर्षण, पौराणिक ’कमल ताल’ में इस वर्ष पहली बार जून माह में कमल के फूल नहीं खिले हैं। इसका कारण सरकारी उदासीनता और महज करीब तीन फिट चौड़े नाले में एक जाली का न लगना बताया जा रहा है। यह जाली पिछले वर्षों में टूट जाने के कारण नौकुचियाताल झील की ग्रास कॉर्प प्रजाति की मछलियां कमल ताल के कमल के जलीय पौधों को कुतर रही है। इस बारे में क्षेत्रीय लोग पूर्व में सिचाई व पर्यटन विभाग से लेकर मुख्यमंत्री के सचिव तक गुहार लगा चुके हैं, बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। नतीजा कमल ताल के पहली बार कमल विहीन होने के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा कमल ताल की सफाई की जानी भी जरूरी है। 
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जब प्रकृति कोरोना व लॉक डाउन के दौर में आत्म परिष्कार कर रही है, और प्रकृति कई मायनों में अपने पुराने स्वरूप में लौट रही है, फिर भी इस वर्ष कमल ताल में कमल नहीं खिल पाये हैं। यह पहला मौका है जब दशकों बाद कमल ताल में कमल नहीं खिले हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार करीब एक किमी व्यास का कमल ताल पौराणिक तालाब है और नौ कोनों के लिये विख्यात जनपद की नौकुचियाताल झील का ही एक हिस्सा है। नौकुचियाताल झील से ही इस झील में करीब तीन फिट चौड़े नाले से पानी आता है। पिछले दशक में नौकुचियाताल झील में काई इत्यादि जलीय पौधों को खाने के लिए ग्राम कॉर्प मछलियां डाली गईं। जिनकी वजह से कमल ताल में कमल के पौधों पर बुरा प्रभाव पड़ा। संभवतया वे पानी के साथ यहां पहुंचकर कमल के पौधों को नुकसान पहुंचाती हों। इस समस्या के समाधान के लिए नाले में जाली लगाई गई, जो कि अब टूट चुकी है। इस कारण ही पिछले करीब तीन वर्षों से कमल ताल में कमल के फूलों का खिलना लगातार कम हो रहा है। और इस वर्ष तो कमल के फूल खिले ही नहीं हैं। क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी ने बताया कि पौराणिक कमल झील के अस्तित्व को बचाने के लिए उन्होंने गत वर्ष मुख्यमंत्री के तत्कालीन सचिव-कुमाऊं आयुक्त राजीव रौतेला को तथ्यों के आधार पर ज्ञापन देकर तालाब की दशा सुधारने की माँग रखी थी। इस पर श्री रौतेला ने जिला पर्यटन अधिकारी को समाधान को कहा था और पर्यटन अधिकारी ने 2019-20 की योजना में बजट स्वीकृत होने पर झील पर कार्य करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई कार्य नहीं हुआ। इस पर उन्होंने पुनः मुख्यमंत्री के समाधान पोर्टेल में इस बारे में शिकायत दर्ज कराई है। इस बारे में जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने कहा कि अवस्थापना संबंधी कार्य उनके स्तर पर नहीं होते हैं।

यह भी पढ़ें : केंद्र-राज्य के दिशा-निर्देशों से खफा मुक्तेश्वर होटल एसोसिएशन ने किया अनिश्चिकालीन होटल बंदी का ऐलान

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जून 2020। जनपद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मुक्तेश्वर के होटल, रिजॉर्ट एवं होम स्टे संचालक केंद्र एवं राज्य सरकार के पर्यटन गतिविधियों को खोलने संबंधी दिशा-निर्देशों से नाराज हैं। संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने इस बारे में गंभीर विचार-विमर्श कर सर्वसम्मति से अपने प्रतिष्ठानों एवं मुक्तेश्वर क्षेत्र में समस्त पर्यटन गतिविधियों को अनिश्चितकाल के लिए अथवा कोरोना की महामारी से निजात मिलने तथा जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन होने तक पूर्ण रूप से बंद रखने का प्रस्ताव पास किया है। संगठन के अध्यक्ष प्रदीप दर्मवाल ने बताया कि उनकी आपत्ति दिशा-निर्देशों में चार बिंदुओं को लेकर है। पहला, दिशा-निर्देशों में जिन ‘हाईलोड’ शहरों की बुकिंग नहीं लेने के निर्देश हैं, 90 फीसद कारोबार उन्हीं शहरों से है। दूसरा, यहां आने वाले पर्यटकों को सात दिन के लिए क्वारन्टाइन होने की शर्त है। इस शर्त पर किसी पर्यटक का आना असंभव है। तीसरा, पर्यटक को किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नहीं जाना है, तो पर्यटक यहां आयेंगे ही क्यूं। चौथा रेस्टोरेंटों की समयावधि सुबह सात से शाम के साह बजे इस व्यवसाय के विरुद्ध है। क्योंकि लोग इस समय के बाद ही भोजन करते हैं। उनका कहना है कि इन कारणों के साथ ही होटलों को व्यवस्थायें बनाने में अतिरिक्त व्यय भी करना पड़ेगा। इसलिए इन दिशा-निर्देशों में होटलों को खोलना संभव ही नहीं है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने किया बाहरी लोगों को क्वारन्टाइन किये जाने के विरोध का ऐलान

नवीन समाचार, नैनीताल, 03 जून 2020। नगर के होटलों व रेस्टोरेंटा के संगठन नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने अन्य जिलों व स्थानों के लोग को नैनीताल शहर में क्वारन्टाइन के लिए लाए जाने पर नगर की जनता के साथ इसका भरपूर विरोध करने का ऐलान किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अपने निर्णय से अवगत कराया है।
श्री साह ने पत्र में नैनीताल जनपद को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध रेड जोन घोषित करने पर भी नाराजगी जताई है। साथ ही कहा है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों पर बाहरी प्रदेशों से आने वाले लोगों को सीमा पर ही क्वारन्टाइन किया जाना है, जबकि नैनीताल सीमा से 80 किमी एवं नजदीकी रेलवे स्टेशन से 40 किमी दूर है। नगर के प्रशासन द्वारा क्वारंटाइन के लिए अधिगृहीन होटल 20 मार्च से बंद हैं और इनके समस्त कर्मचारी लॉक डाउन के अपने घर जा चुके हैं। इसलिये किसी भी होटल में क्वारन्टाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नगर में अनेक होटल रिहायशी क्षेत्र में हैं। शहर में अभी एक भी कोरोना का पॉजिटिव मामला नहीं है। ऐसे में यदि बाहरी लोगों को यहां लायाा जाता है तो नगर में कोरोना के संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

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