नवीन समाचार, नैनीताल, 27 मई 2026 (Nainital-Bakrid-Sacrifices in Open)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की सरोवरनगरी नैनीताल (Nainital) में डीएसए मैदान (DSA Ground) में बकरीद (Bakrid/Eid-ul-Adha) की नमाज की अनुमति निरस्त किए जाने को लेकर विवाद और चर्चा तेज हो गई है। मंगलवार को अंजुमन इस्लामिया (Anjuman Islamia) के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। संगठन का कहना है कि लगभग एक शताब्दी से डीएसए मैदान में ईद की नमाज अदा की जाती रही है और इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी पहले अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अंजुमन इस्लामिया को 25 मई को डीएसए मैदान में ईद की नमाज अदा करने की अनुमति प्रदान की गई थी। संगठन के अनुसार उसी दिन शाम करीब सात बजे प्रशासन की ओर से अनुमति निरस्त कर दिए जाने की सूचना दी गई, जिसके बाद मुस्लिम समुदाय में असमंजस और नाराजगी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
‘वर्षों से होती रही है मैदान में नमाज’
ज्ञापन में कहा गया कि डीएसए मैदान में दशकों से नंदा देवी महोत्सव (Nanda Devi Mahotsav), दशहरा (Dussehra) और अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में केवल ईद की नमाज की अनुमति रद्द किया जाना समुदाय के लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ईद मिल्लादुल कमेटी (Eid Milladul Committee) के अध्यक्ष सैय्यद समीर अली (Syed Sameer Ali) ने कहा कि वर्षों से एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में नमाजी सामूहिक नमाज अदा करते रहे हैं और अब वैकल्पिक व्यवस्था करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से पुनः अनुमति देने की मांग करने की बात कही।
प्रशासन बोला—सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) ने स्पष्ट किया कि स्टेकहोल्डर्स और पुलिस प्रशासन के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया गया है कि जिले में सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नमाज केवल मस्जिदों और अधिकृत इबादतगाहों में ही अदा की जाएगी।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि वर्तमान में डीएसए मैदान में खेल प्रतियोगिता और टूर्नामेंट संचालित हो रहे हैं, इसलिए खेल गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
पुलिस ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी (Dr Manjunath TC) ने कहा कि पूरे जनपद में सार्वजनिक स्थलों और सार्वजनिक संपत्तियों पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसएसपी ने यह भी कहा कि कुर्बानी केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थलों पर ही की जाएगी। साथ ही कुर्बानी की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने, अवशेष खुले में ले जाने और सार्वजनिक स्थलों को प्रदूषित करने पर भी कार्रवाई की जाएगी। आयोजकों को साफ-सफाई, पानी और अपशिष्ट निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यापार मंडल ने परंपरा का दिया हवाला
मल्लीताल व्यापार मंडल (Mallital Vyapar Mandal) अध्यक्ष किशन नेगी (Kishan Negi) ने कहा कि वह लगभग 70 वर्षों से डीएसए मैदान में ईद की नमाज होते देखते आ रहे हैं और इससे कभी यातायात अथवा कानून व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मैदान में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम लंबे समय से आयोजित होते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर इस निर्णय को लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर प्रशासन सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की नीति पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय और कुछ स्थानीय नागरिक इसे पुरानी सामाजिक परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं।
प्रशासन और परंपरा के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय नगरों में सीमित सार्वजनिक स्थलों, सुरक्षा, यातायात और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को निर्णय लेने पड़ते हैं। वहीं लंबे समय से चली आ रही धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के कारण ऐसे निर्णय संवेदनशील भी बन जाते हैं।
उत्तराखंड सरकार ने ईद-उल-जुहा (बकरीद) के सार्वजनिक अवकाश की तिथि में संशोधन किया है। पूर्व में घोषित आदेश के अनुसार यह अवकाश 27 मई 2026 को निर्धारित किया गया था, जिसे अब परिवर्तित कर 28 मई 2026 कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट-1881 के अंतर्गत राज्य के सभी बैंक, कोषागार एवं उप-कोषागार भी 28 मई को बंद रहेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व आदेश की अन्य सभी शर्तें यथावत प्रभावी रहेंगी।
नैनीताल में बकरीद को लेकर बड़े निर्णय
उत्तराखंड (Uttarakhand) की सरोवरनगरी नैनीताल (Nainital) में आगामी ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Adha) यानी बकरीद पर्व को लेकर प्रशासन, पुलिस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मल्लीताल कोतवाली (Mallital Kotwali) में आयोजित बैठक में नमाज व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, स्लाटर हाउस संचालन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज या कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी तथा सभी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित की जाएंगी।
कुर्बानी केवल अधिकृत स्लाटर हाउस में ही की जा सकेगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार बैठक में एसपी क्राइम एवं यातायात डॉ. जगदीश चंद्र (Dr Jagdish Chandra) ने कहा कि कुर्बानी केवल अधिकृत स्लाटर हाउस (Slaughter House) में ही की जा सकेगी। खुले स्थानों, गलियों या सार्वजनिक क्षेत्रों में इसकी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने बताया कि तल्लीताल (Tallital) स्थित स्लाटर हाउस वर्तमान में बंद है। ऐसे में यदि उसे अस्थायी रूप से खोलना है तो अमन कमेटी (Aman Committee) को न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी। अनुमति न मिलने की स्थिति में शहर से बाहर स्थित अधिकृत वधशालाओं का उपयोग करना होगा।
डीएसए मैदान में नमाज के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति के बाद ही मिलेगी अनुमति
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि डीएसए मैदान (DSA Ground) में नमाज का आयोजन सक्षम अधिकारी से अनुमति के बाद ही होगा और यातायात व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। बैठक में एसडीएम नवाजिश खलिक (Nawazish Khalik), सीओ अंजना नेगी (Anjana Negi), व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन नेगी (Kishan Negi), महामंत्री त्रिभुवन फर्त्याल (Tribhuvan Singh Fartyal), हारून खान (Haroon Khan), मो. फारुख (Mohd Farukh) सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
नमाज के लिये डीएसए मैदान की अनुमति देने के बाद की गयी निरस्त
नैनीताल। नैनीताल जिमखाना के अवैतनिक महासचिव मनोज जोशी ने अंजुमन इस्लामिया को नैनीताल के डीएसए मैदान को आज 25 मई को पहले ईद की नमाज पढ़ने हेतु अनुमति दी, लेकिन बाद में इसे निरस्त कर दिया। श्री जोशी ने अनुमति को निरस्त करते हुए कहा है कि डीएसए मैदान मुख्यतः खेल गतिविधियों के लिये है। इस पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों हेतु अनुमति के लिये प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य है। उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, और अनुमति देने के लिये वह अधिकृत नहीं हैं। इसलिये अनुमति निरस्त की जाती है।
नैनीताल झील संरक्षण को लेकर खुले में पशु कुर्बानी रोकने की मांग पर मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
इसी बीच मल्लीताल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष नितिन कार्की (Nitin Karki) ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) को ज्ञापन भेजकर खुले स्थानों पर पशु कुर्बानी रोकने और नैनीताल झील (Naini Lake) की स्वच्छता सुनिश्चित करने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और नगर पालिका परिषद नैनीताल को भी भेजी गयी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि नैनीताल एक संवेदनशील पारिस्थितिक और पर्यटन नगर है तथा झील इसकी प्रमुख प्राकृतिक धरोहर है। आरोप लगाया गया कि पूर्व वर्षों में कुछ स्थानों पर खुले क्षेत्रों और नालों के समीप कुर्बानी होने से जैविक अपशिष्ट झील तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इस कारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
निगरानी टीम और विशेष स्वच्छता अभियान की मांग
ज्ञापन में मांग की गयी है कि खुले स्थानों, सार्वजनिक मार्गों और नालों के आसपास पशु कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा कुर्बानी केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित वैध वधशालाओं में ही सुनिश्चित की जाए। साथ ही नगर में सार्वजनिक सूचना बोर्ड लगाने, झील और नालों को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने तथा नगर पालिका, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त निगरानी टीम गठित कर त्योहारों के दौरान विशेष स्वच्छता अभियान चलाने की भी मांग की गयी है।
प्रशासन की ओर से सभी समुदायों से शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पर्व मनाने की अपील की गयी है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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