नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अप्रैल 2026 (Nainital-Daily-Wage Forest Worker Dies)। नैनीताल के जंगलों में वनाग्नि (Forest Fire) की रोकथाम के लिए तैनात एक दैनिक वेतनभोगी वन कर्मी की शुक्रवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय निवासियों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए भारी हंगामा किया। मृतक की पहचान नगर के बिड़ला क्षेत्र निवासी 56 वर्षीय आनंद लाल के रूप में हुई है।
क्या है पूरा मामला?
नैनीताल के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आकाश गंगवार ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 11:00 बजे आनंद लाल अन्य वन कर्मियों के साथ बिड़ला चुंगी क्षेत्र के जंगलों में नियमित चेकिंग (गश्त) पर थे। वनाग्नि सीजन को देखते हुए यह टीम जंगल में धुंआ या आग की निगरानी कर रही थी।
गश्त के दौरान, सूखे पत्तों पर पैर फिसलने या अचानक चक्कर आने के कारण आनंद लाल गिरकर बेहोश हो गए। साथी कर्मी उन्हें तत्काल स्थानीय लोगों एवं 108 एम्बुलेंस की मदद से बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गए, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें ‘मृत घोषित’ कर दिया।
आग बुझाने के दौरान नहीं हुई मौत: डीएफओ
डीएफओ आकाश गंगवार ने स्पष्ट किया कि:
नगर पालिका वन क्षेत्र में शुक्रवार को कहीं भी आग लगने की घटना नहीं हुई थी।
वन कर्मी की मृत्यु आग बुझाने के दौरान नहीं, बल्कि नियमित गश्त/अभियान के दौरान हुई है।
उनके शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।
सुरक्षा उपकरणों पर उठे सवाल, मुआवजे की मांग
घटना के बाद पूर्व सभासद दीपक कुमार ‘भोलू’ सहित अन्य स्थानीय लोगों ने वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि:
बिना सुरक्षा उपकरण: वन कर्मियों को बिना आवश्यक सुरक्षा किट और उपकरणों के दुर्गम जंगलों में भेजा जा रहा है।
लापरवाही: कर्मियों की सेहत और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है। उधर, वन क्षेत्राधिकारी ललित कार्की ने बताया कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
सुरक्षा प्रबंधों पर डीएफओ ने कहा कि विभाग मानकों के अनुसार अग्नि सुरक्षा प्रबंध और कर्मियों के ग्रुप इंश्योरेंस की व्यवस्था रखता है। फिलहाल, वन विभाग और पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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