नवीन समाचार, नैनीताल (Nainital), 21 अगस्त 2026 (Bail Rejected in Bhimtal Assault Case)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद (Nainital District) के भीमताल (Bhimtal) में हुए बहुचर्चित सामूहिक मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश (In-charge District and Sessions Judge) संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) की अदालत ने तीन आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
अदालत ने घायल रमेश किरौला (Ramesh Kirola) की चिकित्सीय प्रतिवेदन और चिकित्सक के बयान को देखते हुए उनकी चोटों को गंभीर और प्राणघातक प्रकृति का माना है। मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रमेश किरौला अब भी कोमा (Coma) की स्थिति में बताए जा रहे हैं और इस प्रकरण में पहले भी जमानत तथा अभिरक्षा से जुड़े आदेशों को लेकर उच्च न्यायालय (High Court) को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

अभियोजन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना भीमताल स्थित एक भोजनालय (Restaurant) में देर रात विवाद के बाद हुई थी। आरोप है कि राहुल रावत (Rahul Rawat), गौरांग रौतेला (Gaurang Rautela), अजय कुल्याल (Ajay Kulyal), गौरव कुल्याल (Gaurav Kulyal), आयुष बोरा (Ayush Bora) और उनके 10-12 अन्य साथी भोजनालय पहुंचे और शटर पीटकर भीतर बैठकर शराब पीने की जिद करने लगे। मना करने पर भोजनालय संचालक के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई तथा बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भाई राहुल रैक्वाल (Rahul Raikwal) पर भी हमला किए जाने का आरोप है।
भोजनालय से शुरू हुआ विवाद, रास्ते में भी हुआ हमला
अभियोजन के अनुसार, रिपोर्टकर्ता के सिर पर नुकीले हथियार से वार किया गया और भोजनालय के बाहर खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। घटना की सूचना मिलने के बाद घायल जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre-CHC) भीमताल की ओर जा रहे थे, तभी भीमताल तिराहे (Bhimtal Tiraha) के पास आरोपितों ने बोलेरो वाहन (Bolero Vehicle) रुकवाकर फिर हमला किया।
आरोप है कि इस दौरान रमेश किरौला और योगेश किरौला (Yogesh Kirola) को सड़क पर गिराकर लोहे की रॉड (Iron Rod), नुकीले हथियार और कड़े से वार किए गए। आरोप यह भी है कि चिकित्सालय पहुंचने के बाद भी मारपीट की गई। घटना में रमेश किरौला को गंभीर चोटें आईं और उनकी हालत लगातार चिंताजनक बनी रही।
गंभीर हालत में दिल्ली तक कराया गया उपचार
रमेश किरौला को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें सुशीला तिवारी चिकित्सालय (Sushila Tiwari Hospital), हल्द्वानी (Haldwani), फिर कृष्णा अस्पताल (Krishna Hospital) और अंततः दिल्ली (Delhi) के मैक्स अस्पताल (Max Hospital) ले जाया गया।
जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी (District Government Counsel-Criminal) सुशील कुमार शर्मा (Sushil Kumar Sharma) ने न्यायालय को बताया कि रमेश किरौला अब भी कोमा (Coma) की स्थिति में हैं। उनके सिर में फ्रैक्चर (Fracture) सहित गंभीर चोटें पाई गई हैं और उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों के साथ घायल के चिकित्सीय प्रतिवेदन और चिकित्सक के बयान पर विचार किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपितों को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं पाया और उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
पहले भी उच्च न्यायालय पहुंचा था मामला
इस प्रकरण में इससे पहले अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Additional Chief Judicial Magistrate-ACJM), नैनीताल की अदालत ने विवेचक की ओर से भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita-BNS) की धारा 109 के तहत दायर अभिरक्षा (Remand) संबंधी प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था।
इसके विरुद्ध पीड़ित पक्ष उच्च न्यायालय (High Court) पहुंचा था। उच्च न्यायालय ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निचली अदालत के रिमांड संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया था। प्रकरण में घायल रमेश किरौला के मारपीट के बाद कोमा में होने के तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना गया था।
वर्तमान जमानत प्रकरण में अदालत के सामने चिकित्सीय साक्ष्यों के साथ घायल की गंभीर स्थिति का तथ्य भी रखा गया। न्यायालय ने इन्हीं परिस्थितियों में तीन आरोपितों को जमानत देने से इनकार किया है। हालांकि जमानत खारिज होना आरोपितों की दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अंतिम निर्णय विचारण (Trial) के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।
प्रमुख आरोपित गौरांग रौतेला अभी फरार
प्रकरण में बताया गया है कि प्रमुख आरोपित गौरांग रौतेला (Gaurang Rautela) अभी फरार है। उसके विरुद्ध मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (Chief Judicial Magistrate-CJM) की अदालत से गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant-NBW) भी जारी किया जा चुका है।
मामले में पुलिस की विवेचना (Investigation) और न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है। घटना से जुड़े चिकित्सीय साक्ष्य, चिकित्सक के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरोपितों की व्यक्तिगत भूमिका भी न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित होनी है।
इस मामले ने गंभीर मारपीट के मामलों में चिकित्सीय साक्ष्य की भूमिका और घायल की स्थिति को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को भी सामने रखा है। विशेष रूप से तब, जब गंभीर रूप से घायल व्यक्ति स्वयं बयान देने की स्थिति में न हो, ऐसे में चिकित्सीय प्रतिवेदन और चिकित्सकों के बयान जैसे साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल अदालत द्वारा तीन आरोपितों की जमानत खारिज किए जाने के बाद मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। वहीं फरार बताए जा रहे गौरांग रौतेला की गिरफ्तारी भी विवेचना में महत्वपूर्ण बिंदु बनी हुई है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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