नवीन समाचार, देहरादून, 3 सितंबर 2026 (Uttarakhand Waqf Boards New Nikah-Nama)। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय के लिए यूसीसी के प्रावधानों के अनुरूप नया निकाहनामा तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के अनुसार प्रस्तावित नए निकाहनामे में दूसरे, तीसरे और चौथे विवाह से जुड़े प्रावधानों और कॉलम को हटाकर केवल एक विवाह का प्रावधान रखा जाएगा। बोर्ड का कहना है कि नए प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले यूसीसी तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे : https://youtu.be/Cl0gwACMCT8
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी जानकारी साझा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद नए निकाहनामे में यूसीसी के प्रावधानों को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने इसे मुस्लिम महिलाओं और बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में कदम बताया तथा इस संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
यूसीसी के प्रावधानों के अनुरूप तैयार होगा नया निकाहनामा
शादाब शम्स के अनुसार उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की ओर से तैयार किए जा रहे नए निकाहनामे पर ‘Under Uniform Civil Code’ अंकित किया जाएगा और इसमें राज्य में लागू यूसीसी के प्रासंगिक प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए यूसीसी के ड्राफ्ट और उसके क्रियान्वयन से जुड़े लोगों के साथ बातचीत की जा रही है। शम्स के अनुसार इस संबंध में शत्रुघ्न, सुलेखा डांगवाल और मनु गौर सहित यूसीसी से जुड़े लोगों के साथ विचार-विमर्श चल रहा है। बोर्ड का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक के बाद निकाहनामे के अंतिम प्रारूप को तैयार कर इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह के कॉलम हटाने की तैयारी
प्रस्तावित निकाहनामे में सबसे बड़ा बदलाव बहुविवाह से संबंधित प्रावधानों में किया जा रहा है। शादाब शम्स के अनुसार नए प्रारूप से दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह से जुड़े कॉलम हटा दिए जाएंगे और निकाहनामे में केवल एक विवाह का विकल्प दर्ज किया जाएगा।
वक्फ बोर्ड का मानना है कि राज्य में लागू समान नागरिक संहिता के अनुरूप विवाह संबंधी नियमों को निकाहनामे की प्रक्रिया में भी शामिल किया जाना आवश्यक है। इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निकाह संपन्न कराने वाले काजियों और मौलानाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पंजीकृत मौलवी ही करा सकेंगे निकाह
देहरादून। उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार प्रस्तावित व्यवस्था तैयार कर रही है। इसके तहत केवल पंजीकृत मौलवी ही निकाह करा सकेंगे और निकाहनामे का सरकारी स्तर पर पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की व्यवस्था होगी।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य विवाह संबंधी अभिलेख व्यवस्थित रखना और विवाद की स्थिति में आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मस्जिदों और निकाह कराने वाले मौलवियों को निकाह से पहले समान नागरिक संहिता के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
काजियों और निकाह कराने वालों को भी नियमों का पालन करना होगा
शादाब शम्स के अनुसार वक्फ बोर्ड से जुड़े प्रबंधन ढांचे के माध्यम से काजियों की नियुक्ति की जाती है, जो निकाह की प्रक्रिया संपन्न कराते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में निकाह पढ़ाने वाले लोगों से यूसीसी के अनुरूप निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई के प्रावधानों का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि नए निकाहनामे और उससे संबंधित प्रक्रिया का अंतिम स्वरूप बोर्ड द्वारा प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा।
हलाला जैसी प्रथाओं को लेकर भी प्रस्तावित बदलाव
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि प्रस्तावित नए प्रारूप में हलाला जैसी प्रथाओं को लेकर भी रोक संबंधी व्यवस्था शामिल करने की बात कही गई है। बोर्ड का उद्देश्य यूसीसी के प्रावधानों के अनुरूप विवाह और निकाह की प्रक्रिया से संबंधित एक संशोधित दस्तावेज तैयार करना बताया गया है।
शादाब शम्स के अनुसार नए निकाहनामे को तैयार करते समय मुस्लिम समुदाय से संबंधित यूसीसी के प्रावधानों को शामिल किया जाएगा और इसे जल्द ही अंतिम रूप देकर लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
नए प्रावधानों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सिर्फ एक शादी का विकल्प: नए निकाहनामे में अब दूसरी, तीसरी या चौथी शादी के लिए कोई कॉलम या प्रावधान नहीं रखा गया है। [1, 2]
- कानूनी कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति पहली पत्नी के रहते या कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरा निकाह करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- अनिवार्य पंजीकरण: राज्य की मस्जिदों या कमेटियों के केवल वही मौलाना/काजी निकाह करा सकेंगे, जो सरकारी तंत्र या उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के तहत रजिस्टर्ड होंगे।
- फर्जीवाड़ा रोकने के उपाय: निकाह कराने वाले मौलवी का रजिस्ट्रेशन नंबर सरकारी यूसीसी पोर्टल पर ऑटो-वेरीफाई किया जाएगा। बिना रजिस्ट्रेशन के चोरी-छिपे निकाह कराने वाले मौलवी पर भी प्रतिबंध रहेगा।
- पहचान का सत्यापन: निकाह से पहले दूल्हा और दुल्हन दोनों के आधार कार्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं ताकि सही उम्र (महिला के लिए न्यूनतम 18 वर्ष और पुरुष के लिए 21 वर्ष) और पहचान सुनिश्चित की जा सके।
- 9 सवालों का शपथ पत्र: नए नियम के अनुसार, निकाह से पहले एक हलफनामा (Affidavit) देना होगा जिसमें वैवाहिक स्थिति (Marital Status) और नियमों के पालन की घोषणा होगी।
- 60 दिनों के भीतर पंजीकरण: निकाह संपन्न होने के बाद 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण यूसीसी उत्तराखंड पोर्टल (ucc.uk.gov.in) पर कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। बिना इसके शादी को पूर्ण कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।
- विदेशी नागरिकों के लिए राहत: नेपाल, भूटान या तिब्बत के नागरिकों के लिए नियमों में थोड़ी ढील देते हुए वे फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (FRO) के सर्टिफिकेट या वैध पासपोर्ट के माध्यम से भी पंजीकरण करा सकते हैं।
- तलाक और हलाला पर प्रतिबंध: यूसीसी के तहत इद्दत, निकाह हलाला और ट्रिपल तलाक जैसी प्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- नए निकाहनामे के प्रारूप में मुस्लिम बेटियों की सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी को लेकर जागरूकता संबंधी क्लॉज भी जोड़े गए हैं।
उत्तराखंड में अंतरधार्मिक विवाह और धर्मांतरण से जुड़े यह प्रमुख प्रावधान भी हो सकते हैं शामिल
- जबरन धर्मांतरण पर रोक
- जबरन, धोखे, दबाव, प्रलोभन आदि के जरिए धर्म परिवर्तन कराना कानून के तहत अपराध है।
- उत्तराखंड सरकार के अनुसार धर्मांतरण विरोधी कानून में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
- स्वैच्छिक धर्मांतरण
- धर्म परिवर्तन से संबंधित प्रक्रिया धर्मांतरण विरोधी कानून के प्रावधानों के अनुसार पूरी करनी होती है।
- केवल अंतरधार्मिक विवाह होना अपने-आप में जबरन धर्मांतरण सिद्ध नहीं करता।
- विवाह का अनिवार्य पंजीकरण
- यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में होने वाले विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य है।
- यूसीसी के आधिकारिक पोर्टल पर विवाह पंजीकरण की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है।
- विवाह पंजीकरण के लिए दस्तावेज
- पति-पत्नी की तस्वीरें, विवाह की तस्वीर तथा आयु और निवास संबंधी प्रमाण सहित निर्धारित दस्तावेज मांगे जाते हैं।
- 27 जनवरी 2025 या उसके बाद हुए विवाहों के लिए विवाह कराने वाले व्यक्ति का प्रमाणपत्र भी निर्धारित दस्तावेजों में शामिल है।
- अंतरधार्मिक विवाह
- यदि दोनों व्यक्ति अपना धर्म बदले बिना विवाह करना चाहते हैं, तो लागू वैधानिक व्यवस्था के तहत विवाह किया जा सकता है। आपके दिए स्रोत में विशेष विवाह अधिनियम का उल्लेख है, लेकिन इस बिंदु की वर्तमान उत्तराखंड-विशिष्ट प्रक्रिया को अलग से आधिकारिक स्रोत से सत्यापित करना जरूरी है।
- यूसीसी में विवाह पंजीकरण
- विवाह के पंजीकरण के लिए उत्तराखंड के आधिकारिक यूसीसी पोर्टल पर सेवा उपलब्ध है।
- वर्तमान पोर्टल के अनुसार सामान्य पंजीकरण शुल्क 250 रुपये और निर्धारित सेवा अवधि 15 दिन है।
- महत्वपूर्ण सावधानी
- यह कहना सही नहीं होगा कि “अंतरधार्मिक विवाह अपने-आप अवैध है” या कि “मुस्लिम युवक गैर-मुस्लिम युवती से विवाह नहीं कर सकता।”
- वास्तविक कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि विवाह किस कानून के तहत हो रहा है और धर्म परिवर्तन हुआ है या नहीं।
मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों से जुड़े ढांचे के माध्यम से लागू करने की तैयारी
वक्फ बोर्ड का कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में मस्जिदें, दरगाहें और अन्य धार्मिक संपत्तियां वक्फ व्यवस्था से जुड़ी हैं। बोर्ड के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से वक्फ के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों के अलावा कुछ संपत्तियां ‘वक्फ-बाय-यूजर’ की व्यवस्था से भी इसके दायरे में आती हैं।
इसी प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से नए निकाहनामे के प्रावधानों को लागू करने की तैयारी की जा रही है। बोर्ड का कहना है कि संबंधित प्रबंधन समितियों और निकाह कराने वाले काजियों के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड का प्रस्तावित नया निकाहनामा विवाह संबंधी प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि निकाहनामे का अंतिम प्रारूप, उसके सभी प्रावधान और लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया बोर्ड द्वारा संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श पूरा करने के बाद सामने आएगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
