जन्माष्टमी पर कान्हा-राधा के जन्म की चाहत में मुहूर्त डिलीवरी की बढ़ी मांग, हल्द्वानी में लगभग10 परिवारों ने जताई इच्छा

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 सितंबर 2026 (Muhurat Deliveries on Janmashtami)। बदले दौर के साथ लोग न जाने किस ओर जा रहे हैं, और न जाने कहाँ जाना और क्या प्राप्त करना चाहते हैं। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी (Haldwani) में जन्माष्टमी के अवसर पर घर में कान्हा या राधा के जन्म की धार्मिक इच्छा के चलते लगभग 10 परिवारों ने मुहूर्त के अनुसार सिजेरियन प्रसव (C-section Delivery) कराने की इच्छा जताई है। शहर के निजी चिकित्सालयों और क्लीनिकों में सामने आई यह प्रवृत्ति धार्मिक आस्था और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करती है, क्योंकि चिकित्सकों के अनुसार मां और नवजात की सुरक्षा किसी भी शुभ तिथि या मुहूर्त से अधिक महत्वपूर्ण है।

Muhurat Deliveries on Janmashtami V TO H DECOR Baby Krishna & Radha वॉल स्टिकर बच्चों के कमरे, बेडरूम, लिविंग  रूम, (साइज़ -45 Cm X 45 CM) : Amazon.in: घर और किचनहल्द्वानी के लगभग 13 निजी चिकित्सालयों एवं क्लीनिकों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ परिवार जन्माष्टमी के आसपास अपने बच्चे का जन्म कराने के लिए विशेष रूप से इस तिथि का चयन करना चाहते हैं। कुछ परिवार इसके लिए पहले से चिकित्सालय में भर्ती होने की तैयारी भी कर रहे हैं। हालांकि चिकित्सकीय आवश्यकता के बिना केवल किसी विशेष मुहूर्त के लिए प्रसव की तिथि या समय निर्धारित करने को लेकर विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ मां और नवजात की सुरक्षा का प्रश्न

भारत के उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित कई बड़े राज्यों एवं शहरी क्षेत्रों में कृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी अथवा अन्य शुभ अवसरों पर बच्चे के जन्म के लिए मुहूर्त के अनुसार सिजेरियन प्रसव कराने की प्रवृत्ति सामने आती रही है। इसी कड़ी में समाचारों के अनुसार हल्द्वानी में भी जन्माष्टमी पर कान्हा या राधा के जन्म की इच्छा के कारण कुछ परिवार इसी प्रकार की योजना बना रहे हैं।

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निजी चिकित्सालयों में, यदि गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की चिकित्सकीय स्थिति सामान्य हो, तो परिवार की इच्छा और चिकित्सकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रसव की तिथि निर्धारित करने पर विचार किया जा सकता है। इसके विपरीत सरकारी चिकित्सालयों में किसी धार्मिक मुहूर्त के आधार पर प्रसव का समय निर्धारित करना सामान्य व्यवस्था का हिस्सा नहीं है और वहां चिकित्सकीय आवश्यकता को प्राथमिकता दी जाती है।

हल्द्वानी की एक वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह के अनुसार कुछ परिवार बच्चे के जन्म के लिए शुभ मुहूर्त निकलवाकर उसी समय प्रसव कराने की इच्छा रखते हैं। यदि गर्भवती की सभी जांच रिपोर्ट सामान्य हों और कोई चिकित्सकीय समस्या न हो, तो परिस्थितियों के अनुसार परिवार के अनुरोध पर विचार किया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था के आवश्यक सप्ताह पूरे नहीं हुए हों अथवा मां या गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को लेकर कोई समस्या हो, तो चिकित्सक की सलाह को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी विशेष मुहूर्त की प्रतीक्षा करना उचित नहीं है।

डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि मां और बच्चे की सुरक्षा किसी भी शुभ तिथि या धार्मिक मान्यता से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि मुहूर्त के अनुसार कराये जाने वाले प्रसव और इसके बाद बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास से जुड़े पहलुओं पर व्यापक शोध की आवश्यकता है।

समय से पहले प्रसव कराने में हो सकते हैं स्वास्थ्य संबंधी जोखिम

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार केवल मनचाहे समय या मुहूर्त के आधार पर प्रसव की तिथि तय करना विशेष सावधानी का विषय है। यदि चिकित्सकीय आवश्यकता के बिना गर्भावस्था पूरी होने से पहले सिजेरियन प्रसव कराया जाता है, तो नवजात के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है।

समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में सांस लेने में परेशानी सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसी प्रकार बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के शल्य चिकित्सा कराने से मां को भी संक्रमण, अधिक रक्तस्राव और स्वास्थ्य लाभ में अधिक समय लगने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव का निर्णय केवल धार्मिक आस्था या ज्योतिषीय गणना के आधार पर नहीं, बल्कि गर्भावस्था की अवधि, मां के स्वास्थ्य, गर्भस्थ शिशु की स्थिति और चिकित्सक की सलाह को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

क्या प्राकृतिक रूप से निर्धारित समय से पहले बच्चे का जन्म तय करना उचित है?

जन्माष्टमी अथवा अन्य शुभ पर्वों पर बच्चे के जन्म की इच्छा धार्मिक और पारिवारिक आस्था से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा प्रश्न यह भी जुड़ता है कि क्या जन्म के प्राकृतिक रूप से निर्धारित समय से इतर केवल मनचाहे दिन या मुहूर्त में प्रसव कराना उचित है।

यह आशंका भी महत्वपूर्ण है कि किसी विशेष समय पर बच्चे के जन्म की इच्छा कहीं मां और नवजात के स्वास्थ्य के लिए संकट का कारण न बन जाये। चिकित्सकीय दृष्टि से प्रसव का समय बदलने का निर्णय तभी लिया जाना चाहिए, जब गर्भावस्था की स्थिति और चिकित्सकीय मानक इसकी अनुमति देते हों।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष मुहूर्त में जन्म लेने से बच्चे के भविष्य में कोई परिवर्तन होगा अथवा नहीं, यह आस्था और विश्वास का विषय है। इसका वैज्ञानिक आधार स्थापित होना अलग प्रश्न है। इसलिए केवल भविष्य की कल्पना या ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर वर्तमान में मां और नवजात के स्वास्थ्य के साथ कोई जोखिम लेना उचित नहीं माना जा सकता।

हल्द्वानी में जन्माष्टमी पर मुहूर्त डिलीवरी की बढ़ती इच्छा ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से बच्चे के जन्म का समय चुनने की प्रवृत्ति कहां तक उचित है। धार्मिक आस्था का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन चिकित्सकों की प्राथमिकता स्पष्ट है कि प्रसव के हर निर्णय में मां और नवजात की सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए।

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