सार्वजनिक भूमि व फुटपाथ पर बिना अनुमति व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार नहीं: हाईकोर्ट
नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर (High Court News 18 September 2026)। नैनीताल। उच्च न्यायालय (High Court) के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने नैनीताल और उसके आसपास के पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से अनुपालन हलफनामा प्रस्तुत कर बताया गया कि न्यायालय के आदेश के अनुसार बारापत्थर और खुर्पाताल के पास यू-बैंड से अस्थायी फड़ एवं मोबाइल फूड वैन (Mobile Food Van) को नारायण नगर पार्किंग स्थल पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके अलावा सड़कों और पर्यटक स्थलों को साफ रखने के लिए सप्ताह में दो बार यांत्रिक अपशिष्ट प्रबंधन (Mechanical Waste Management) प्रक्रिया लागू की गयी है तथा खुर्पाताल व्यू प्वाइंट और अन्य खतरनाक मोड़ों पर 15 दिनों के भीतर सुरक्षात्मक जाली (Fencing) लगाने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन द्वारा पेश किए गये हलफनामे पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पंकज मिगलानी ने आपत्ति जताते हुए अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि पूर्व में दिए गये आदेशों का पालन हलफनामे में स्पष्ट नहीं है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि क्षेत्र में एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-Use Plastic) पर प्रतिबंध के बावजूद इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है, जो पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहा है।
इस पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन और प्लास्टिक प्रतिबंध की स्थिति स्पष्ट करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। साथ ही कोर्ट कमिश्नर (Court Commissioner) को मौके का निरीक्षण कर हलफनामे में किए गये दावों की जमीनी स्थिति सत्यापित करने के निर्देश दिए गये हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यू-बैंड से हटाए गये मोबाइल फूड वैन संचालकों की ओर से दाखिल रिकॉल आवेदन (Recall Application) को पूरी तरह खारिज कर दिया। वैन संचालकों ने दलील दी थी कि नारायण नगर पार्किंग में पर्यटकों की आवाजाही कम होने से उनके आजीविका के अधिकार का हनन हो रहा है।
हालांकि उच्च न्यायालय ने परिवहन विभाग और कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ये वैन बिना अनुमति के फुटपाथ पर चल रही थीं, जिससे यातायात दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ था और भारी मात्रा में कचरा फैल रहा था।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक भूमि या फुटपाथ पर बिना अनुमति व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी सराहा कि राज्य प्रशासन ने उन्हें पूरी तरह हटाने के बजाय रोजगार बचाने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया है।
सार्वजनिक पोर्टल बंद किए जाने के विरुद्ध जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस विभाग द्वारा दर्ज अभियोगों से जुड़ी शिकायतों के लिए संचालित सार्वजनिक पोर्टल (Public Portal) बंद किए जाने के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने पुलिस विभाग से पूछा है कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशा-निर्देशों का अनुपालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश हैं कि अभियोग दर्ज होने के बाद उसे सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि पीड़ित पक्ष और उनके अधिवक्ता आसानी से इसकी जानकारी हासिल कर सकें। हालांकि उत्तराखंड में पोर्टल बंद कर शिकायतकर्ताओं को केवल ओटीपी (OTP) के माध्यम से सूचना दी जा रही थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है।
यह जनहित याचिका हरिद्वार की नेशनल पब्लिक ट्रस्ट (National Public Trust) ने दायर की है, जिसमें लंबे समय से बंद पड़े इस पोर्टल को दोबारा शुरू करने की मांग की गयी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि यदि यह पोर्टल जल्द सुचारू रूप से शुरू नहीं किया गया तो आगामी सुनवाई की तिथि पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (Director General of Police) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ सकता है।
वन अधिकार दावों की अस्वीकृति पर प्रभावितों को अपीलीय प्राधिकरण जाने की छूट
नैनीताल। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने वन अधिकार दावों की अस्वीकृति और बेदखली आदेशों के विरुद्ध मोहम्मद बशीर सहित 16 याचिकाकर्ताओं की रिट याचिकाओं का एक साथ निस्तारण कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित अपीलीय प्राधिकरणों के समक्ष अपील करने की छूट दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता दो सप्ताह के भीतर बेदखली आदेशों के विरुद्ध वन संरक्षक के पास और दावों की अस्वीकृति के विरुद्ध मंडल स्तरीय समिति में अपील दाखिल करते हैं तो देरी का हवाला दिए बिना उनके मामलों की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर की जाएगी।
यह पूरा मामला पीढ़ियों से वन क्षेत्र में रह रहे वनवासियों द्वारा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी अधिनियम, 2006 (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006) के तहत किए गये दावों से जुड़ा है। उपजिलाधिकारी द्वारा इन दावों को खारिज किए जाने के बाद प्रभागीय वन अधिकारी ने जुलाई 2026 में बेदखली के आदेश जारी किए थे, जिन्हें उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी थी।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भारतीय वन अधिनियम (Indian Forest Act) की धारा 61-ए के तहत अपील का विकल्प मौजूद है। इस पर याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता तनुप्रिया जोशी (Tanupriya Joshi) ने उच्च न्यायालय में मामला लंबित रहने के कारण हुई देरी पर राहत की मांग की थी, जिस पर सहमति जताते हुए अदालत ने यह व्यवस्था दी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
