एसएसपी बोले—विधायक से दोबारा बात करेगी पुलिस, नए साक्ष्य मिलने पर होगी जाँच; आत्मदाह की चेतावनी वापस ले चुके हैं कांग्रेस विधायक
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 18 अक्टूबर 2026 (Congress MLA Sumit Hridayesh Press)। हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश की फोन टैपिंग और मोबाइल की लोकेशन पर निगरानी रखे जाने की आशंका से जुड़े मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी के अनुसार, विधायक ने अप्रैल 2025 में दी गई शिकायत में विकास बिष्ट और आशीष कुंथल नाम के दो व्यक्तियों का उल्लेख किया था। मामले की स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) से कराई गई जाँच में फोन टैपिंग अथवा लोकेशन ट्रैक किए जाने के आरोपों की पुष्टि करने वाले ठोस साक्ष्य नहीं मिले।
एसएसपी के अनुसार, जाँच में यह सामने आया कि विकास बिष्ट विधायक के सोशल मीडिया से जुड़े कार्य देखता था। पुलिस अब विधायक से दोबारा बातचीत कर मामले से संबंधित तथ्य और जानकारी जुटाएगी। यदि विधायक कोई नई शिकायत या साक्ष्य उपलब्ध कराते हैं, तो उनकी भी जाँच की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी की संलिप्तता के प्रमाण मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, शिकायत में किसी व्यक्ति का नाम होना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
मोबाइल की जाँच कराने के बाद हुआ था संदेह
विधायक की ओर से पहले दी गई जानकारी के अनुसार, हल्द्वानी निवासी एक परिचित ने दिल्ली में उनकी मुलाकात नोएडा निवासी एक युवक से कराई थी। युवक मोबाइल की मरम्मत का काम करता था। विधायक ने अपना मोबाइल फोन यह पता लगाने के लिए उसे दिया था कि कहीं फोन टैप तो नहीं हो रहा है।
विधायक का कहना था कि कुछ दिन बाद मोबाइल वापस मिलने पर उन्हें उसकी लोकेशन पर निगरानी रखे जाने का संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने दोनों व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी। शिकायत में उठाई गई आशंकाओं की पुलिस और खुफिया विभाग ने अपने स्तर से जाँच की।
एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी के हालिया बयान के अनुसार, वर्ष 2025 में हुई जाँच में आरोपों की पुष्टि करने वाले ठोस साक्ष्य नहीं मिले थे। दूसरी ओर, सुमित हृदयेश ने कहा है कि उनकी शिकायत के संबंध में न तो उनके बयान दर्ज किए गए और न ही उन्हें जाँच के निष्कर्षों की जानकारी दी गई। इस प्रकार पुलिस और विधायक के पक्ष में जाँच की प्रक्रिया को लेकर अंतर दिखाई देता है। अब दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित बातचीत से मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
प्रेसवार्ता में परिवार की सुरक्षा को लेकर जताई थी चिंता
14 अक्टूबर को हल्द्वानी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुमित हृदयेश भावुक हो गए थे। उन्होंने अपनी, पत्नी और बेटी सहित परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएँ जताई थीं। उनका आरोप था कि नेताओं और उनके परिवारों के फोन टैप किए जा रहे हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से भ्रामक औडियो और वीडियो सामग्री तैयार कर प्रसारित की जा सकती है।
विधायक ने यह भी आशंका जताई थी कि उनकी गाड़ी की दुर्घटना कराई जा सकती है। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करेंगे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह सहित अन्य नेताओं के फोन की निगरानी किए जाने की आशंका का भी उल्लेख किया था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अगले दिन वापस लिए ‘आत्मदाह’ संबंधी शब्द
इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण बदलाव 15 अक्टूबर को सामने आया, जब सुमित हृदयेश ने सामाजिक माध्यम पर वीडियो जारी कर आत्मदाह की चेतावनी वाले अपने शब्द वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह भावनओं में बहकर ऐसा कह गए थे और उन्हें इस प्रकार की बात नहीं कहनी चाहिए थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा नहीं करना चाहते। उन्होंने न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास जताते हुए अपने समर्थकों का आभार भी व्यक्त किया।
विधायक ने अपनी प्रेसवार्ता में राज्य सरकार को इस कथित प्रकरण का जिम्मेदार ठहराने से भी परहेज किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति व्यक्तिगत विश्वास जताते हुए कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि राज्य सरकार इस मामले में शामिल है। यह रुख उनके फोन टैपिंग संबंधी आरोपों के बीच राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना।
संजय नेगी को लेकर पेशकश से कांग्रेस में चर्चा
सुमित हृदयेश की 14 अक्टूबर की पत्रकार वार्ता में प्रेसवार्ता में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति और निष्कासित नेताओं-रामनगर के कांग्रेस से निष्कासित नेता संजय नेगी और बाजपुर के सोनू शर्मा की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। सुमित ने दोनों को कांग्रेस में दोबारा शामिल कराने की माँग की और कहा कि यदि पार्टी चाहे तो संजय नेगी को हल्द्वानी विधानसभा सीट से अवसर देने के लिए वह अपनी विधायकी छोड़ने तक को तैयार हैं। इस बयान ने फोन टैपिंग के मुद्दे के साथ-साथ कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में भी चर्चा को जन्म दिया।
यह पेशकश राजनीतिक दृष्टि से असामान्य रही, क्योंकि सुमित हृदयेश स्वयं हल्द्वानी से निर्वाचित विधायक हैं। पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति और निष्कासित नेता की मौजूदगी ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में सवालों को जन्म दिया। पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पेशकश पर स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने तक इसे विधायक का व्यक्तिगत प्रस्ताव ही माना जाना चाहिए। कुछ कांग्रेस नेताओं की ओर से इस मामले में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने रखने की अपेक्षा जताए जाने की खबरें हैं।
हरीश रावत ने जताई थी चिंता, जाँच पर टिकी निगाहें
सुमित हृदयेश के आरोपों के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों के सामने कथित निगरानी और दबाव जैसी आशंकाओं को गंभीर बताते हुए सुमित हृदयेश को धैर्य और साहस बनाए रखने की सलाह दी थी।
दूसरी ओर, भाजपा की ओर से सरकार की पारदर्शिता पर भरोसा जताते हुए मामले में किसी वास्तविक खतरे की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध जाँच में अभी तक फोन टैपिंग के आरोपों की पुष्टि करने वाले ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं।
मुख्यमंत्री धामी पर आरोप नहीं लगाने से भी चर्चा
अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएँ जताने के बावजूद सुमित हृदयेश ने पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस प्रकरण के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास जताते हुए राज्य सरकार को इस कथित गतिविधि में शामिल मानने से परहेज किया। इससे उनके आरोपों का राजनीतिक संदर्भ भी चर्चा में आया। एक ओर उन्होंने फोन टैपिंग और परिवार की सुरक्षा के मामले में कार्रवाई की माँग की, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार को सीधे कटघरे में नहीं रखा।
इस पूरे प्रकरण में फिलहाल दो अलग प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। पहला, फोन टैपिंग और लोकेशन ट्रैकिंग संबंधी आरोपों के समर्थन में कोई तकनीकी साक्ष्य मिलता है या नहीं। दूसरा, कांग्रेस नेतृत्व संजय नेगी को लेकर विधायक की पेशकश और उनके बयानों पर क्या रुख अपनाता है। पुलिस की जाँच और पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इन सवालों पर अधिक स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
एसएसपी के अनुसार, हल्द्वानी पुलिस, स्थानीय अभिसूचना इकाई और विशेष अभियान समूह (SOG) की टीम विधायक से बातचीत कर मामले से संबंधित जानकारी जुटाएगी। यदि कोई नया साक्ष्य सामने आता है, तो उसकी जाँच की जाएगी। पुलिस ने यह भी कहा है कि जाँच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में तीन प्रश्न महत्वपूर्ण हैं—क्या फोन टैपिंग या लोकेशन ट्रैकिंग के आरोपों के समर्थन में कोई तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध है, विधायक की पुरानी शिकायत की जाँच किस आधार पर की गई थी और अब प्रस्तावित बातचीत से कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर मिलने तक फोन टैपिंग और सुरक्षा संबंधी आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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