-देहरादून की राजपुर रोड विधानसभा में अब बदरीनाथ और केदारनाथ से भी कम मतदाता
नवीन समाचार, देहरादून, 17 अक्टूबर 2026 (Questions on Decline of 11 Lakh Voters)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव और 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बीच 11,07,695 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। यह कुल मतदाताओं की संख्या में 13.40 प्रतिशत की गिरावट है। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और प्रवीण उप्रेती की ओर से जारी एक रिपोर्ट में मतदाता सूची में आई इस कमी को लेकर निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता, जवाबदेही और पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि मतदाताओं की संख्या में आई इस कमी के पीछे कितने लोगों की मृत्यु, पलायन, दोहरी प्रविष्टियों अथवा अन्य कारणों से नाम हटाए गए। क्या इस कमी में बड़ी संख्या में दिवंगत लोग, दूसरे स्थानों पर जा चुके मतदाता अथवा अपात्र प्रविष्टियां शामिल हैं? रिपोर्ट में इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर देने के लिए निर्वाचन आयोग से विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक करने की माँग की गई है। केवल मतदाताओं की संख्या में कमी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हटाए गए सभी नाम दिवंगत लोगों या घुसपैठियों के थे।
82.66 लाख से घटकर लगभग 71.59 लाख रह गई संख्या
“एसआईआर (SIR) और 2022 से 2027 के विधानसभा चुनावों के बीच उत्तराखंड के बदलते मतदाता परिदृश्य” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में उत्तराखंड में 82,66,644 मतदाता थे। 3 अक्टूबर 2026 की अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 71.59 लाख रह गई। इस प्रकार 11,07,695 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2012 से 2022 के बीच उत्तराखंड में लगभग 18.89 लाख मतदाता जुड़े थे। इसके विपरीत, पिछले विधानसभा चुनाव के बाद मतदाताओं की संख्या में आई बड़ी गिरावट को देखते हुए इसके कारणों की विस्तृत और पारदर्शी समीक्षा आवश्यक बताई गई है।
अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में सबसे अधिक गिरावट का दावा
रिपोर्ट में विभिन्न राज्यों के मतदाता आँकड़ों की तुलना करते हुए उत्तराखंड में 13.40 प्रतिशत की गिरावट को सर्वाधिक बताया गया है। प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 11.4 प्रतिशत, गोवा में 9.18 प्रतिशत, तमिलनाडु में 8.79 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 6.88 प्रतिशत, मणिपुर में 5.28 प्रतिशत, केरल में 1.12 प्रतिशत और पंजाब में 0.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बिहार और असम में संबंधित तुलनाओं के दौरान मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का उल्लेख किया गया है।
हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि अलग-अलग राज्यों में संदर्भ वर्ष, मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथियाँ और पुनरीक्षण की प्रक्रियाएँ अलग-अलग हैं। इसलिए इन आँकड़ों की तुलना समान आधार पर करना आवश्यक है। रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग से एक समान मानकों पर आधारित तुलनात्मक विवरण जारी करने की माँग की गई है।
देहरादून जिले में 3.03 लाख मतदाताओं की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, जिलों के स्तर पर मतदाताओं की संख्या में गिरावट का वितरण भी समान नहीं रहा। देहरादून जिले में लगभग 3.03 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई, जो 20.22 प्रतिशत है। रिपोर्ट में शामिल जिलों में प्रतिशत के लिहाज से यह सर्वाधिक गिरावट बताई गई है।
अन्य जिलों में पौड़ी गढ़वाल में 14.89 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 13.61 प्रतिशत और टिहरी गढ़वाल में 13.14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
विधानसभा क्षेत्रों के स्तर पर देहरादून कैंट में 34.19 प्रतिशत, राजपुर रोड में 32.64 प्रतिशत और धर्मपुर में 27.59 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में आई असाधारण कमी के कारणों की अलग से समीक्षा की जानी चाहिए।
राजपुर रोड में बदरीनाथ और केदारनाथ से भी कम मतदाता
रिपोर्ट में देहरादून की राजपुर रोड विधानसभा सीट की तुलना बदरीनाथ और केदारनाथ विधानसभा क्षेत्रों से की गई है। इसके अनुसार, वर्ष 2022 में राजपुर रोड में 1,19,615 मतदाता थे। बदरीनाथ में 1,04,795 और केदारनाथ में 93,016 मतदाता दर्ज किए गए थे।
3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में राजपुर रोड के मतदाताओं की संख्या घटकर 80,569 रह गई। इसके विपरीत, बदरीनाथ में 91,555 और केदारनाथ में 85,924 मतदाता दर्ज किए गए।
इस प्रकार राजपुर रोड में अब दोनों हिमालयी विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में कम मतदाता हैं। वर्ष 2022 के बाद राजपुर रोड में 39,046 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई, जबकि बदरीनाथ में 13,240 और केदारनाथ में 7,092 मतदाता कम हुए।
रिपोर्ट में राजपुर रोड सहित इन विधानसभा क्षेत्रों में एसडीडी (SDD) और नो मैपिंग (No Mapping) से संबंधित आँकड़ों का मिलान कर स्थिति स्पष्ट करने की माँग की गई है।
36 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की गिरावट अधिक
रिपोर्ट में मतदाता सूची का लिंग के आधार पर विश्लेषण करते हुए एक अन्य महत्वपूर्ण चिंता सामने रखी गई है। इसके अनुसार, उत्तराखंड के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से 36 में महिला मतदाताओं की संख्या में प्रतिशत के लिहाज से गिरावट पुरुष मतदाताओं की तुलना में अधिक रही।
जिलों के स्तर पर ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा में भी यही प्रवृत्ति दिखाई देने का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में द्वाराहाट एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र था, जहाँ महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक थी। रिपोर्ट में अध्ययन किए गए वर्ष 2027 के लिए मतदाता सूची के आँकड़ों में किसी भी विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक नहीं बताई गई है।
रिपोर्ट तैयार करने वालों ने निर्वाचन आयोग से सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों और मतदान केंद्रों के पुरुष एवं महिला मतदाताओं के अलग-अलग आँकड़े प्रकाशित करने की माँग की है। इसमें पुनरीक्षण से पहले और बाद की संख्या तथा नाम हटाए जाने के दर्ज कारण भी शामिल करने को कहा गया है। पात्र महिलाओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और अभिलेखों में सुधार करने के लिए सुलभ अवसर उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया है।
‘मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की विश्वसनीयता का आधार’
सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्ष पारदर्शिता, जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को लेकर गंभीर सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार, जब नागरिकों को यह पता नहीं होता कि उनका नाम मतदाता सूची में है या नहीं और मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तो इससे लोकतंत्र कमजोर होता है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को स्वयं सक्रिय होकर पात्र मतदाताओं तक पहुँचना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूट न जाए। मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावों की विश्वसनीयता और लोकतंत्र के स्वास्थ्य का मूल आधार है।
नौटियाल ने जनता का विश्वास बहाल करने के लिए आँकड़ों का समय पर खुलासा करने, पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायतों के निवारण की सुलभ व्यवस्था बनाने की आवश्यकता बताई।
निर्वाचन आयोग से विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक करने की माँग
रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग से 11.07 लाख मतदाताओं की कमी का विधानसभा क्षेत्रवार और मतदान केंद्रवार विवरण जारी करने की माँग की गई है। नाम हटाए जाने के कारणों को मृत्यु, पलायन, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य श्रेणियों में अलग-अलग दर्शाने तथा पिछली मतदाता सूचियों से उनका मिलान करने को कहा गया है।
इसके अतिरिक्त, देहरादून कैंट, राजपुर रोड और धर्मपुर में मतदाताओं की संख्या में आई असाधारण गिरावट की विस्तृत समीक्षा, सभी विधानसभा क्षेत्रों में महिला एवं पुरुष मतदाताओं के आँकड़ों का प्रकाशन और अन्य राज्यों के साथ समान मानकों पर आधारित तुलना की माँग की गई है।
रिपोर्ट में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision) को पारदर्शी और सुलभ बनाने पर भी बल दिया गया है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम जाँचने, दावे एवं सुधार प्रस्तुत करने तथा आवेदनों और शिकायतों की स्थिति जानने की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ समयबद्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की माँग की गई है।
अनूप नौटियाल ने कहा कि इस रिपोर्ट का उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता, जनता के विश्वास और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के अधिकार को मजबूत करना है। उन्होंने आँकड़ों के संग्रह और दस्तावेजीकरण में योगदान के लिए अपने सहयोगी प्रवीण उप्रेती का आभार व्यक्त किया।
Tags:
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
नैनीताल में क्लिक करके नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य सभी महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ी जा सकती हैं। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचार, अल्मोड़ा के समाचार, बागेश्वर के समाचार, चंपावत के समाचार, ऊधमसिंह नगर के समाचार, देहरादून के समाचार, उत्तरकाशी के समाचार, पौड़ी के समाचार, टिहरी जनपद के समाचार, चमोली के समाचार, रुद्रप्रयाग के समाचार, हरिद्वार के समाचार और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार भी पढ़ सकते हैं।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ें। हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (Questions on Decline of 11 Lakh Voters) :

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।



















